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Kriti Sanon का बड़ा खुलासा: ‘Mimi’ और ‘Do Patti’ के बाद समझ आया किरदार सिर्फ पर्दे पर नहीं रहता… मानसिक सेहत के लिए क्यों जरूरी है ‘स्विच ऑफ’ करना?
Kriti Sanon ने बताया कि इंटेंस किरदार निभाने के बाद उनके व्यवहार और भावनाओं पर भी असर पड़ा। अभिनेत्री ने कहा कि कलाकारों के लिए काम से खुद को अलग करना और मानसिक-भावनात्मक संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।
फिल्मों में किरदार खत्म होते ही कहानी पर्दे पर खत्म हो जाती है, लेकिन कई बार उस किरदार का असर कलाकार के भीतर कुछ और समय तक बना रहता है। Kriti Sanon ने अब इसी अनुभव को लेकर खुलकर बात की है। अभिनेत्री का कहना है कि लंबे समय तक उन्हें लगता था कि कैमरा बंद होते ही वह अपने किरदार को भी पीछे छोड़ देती हैं, लेकिन Mimi और Do Patti जैसी फिल्मों ने उनकी यह सोच बदल दी।
एक हालिया एक्सक्लूसिव बातचीत में Kriti Sanon ने बताया कि अभिनय के दौरान कलाकार लगातार अपनी भावनाओं के साथ काम करते हैं और यही वजह है कि मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य का ध्यान रखना उतना ही जरूरी है जितना किसी फिल्म के लिए तैयारी करना।
‘किरदार का असर बाद में महसूस होता है’
Kriti Sanon ने बताया कि Mimi और Do Patti से पहले वह मानती थीं कि उनके निभाए किरदार असल जिंदगी में उन्हें प्रभावित नहीं करते। लेकिन इन फिल्मों के अनुभव ने उन्हें महसूस कराया कि कोई कलाकार खुद को भले ही पूरी तरह अलग समझे, फिर भी किरदार का प्रभाव कहीं न कहीं अवचेतन स्तर पर रह सकता है।
उनके मुताबिक, कई बार इसका एहसास तुरंत नहीं होता। कुछ दिन या एक सप्ताह बाद व्यक्ति अपने व्यवहार, मूड या किसी परिस्थिति पर अपनी प्रतिक्रिया में बदलाव महसूस कर सकता है। यही वह बिंदु था, जहां अभिनेत्री को समझ आया कि किरदार से जानबूझकर ‘स्विच ऑफ’ करना भी अभिनय प्रक्रिया का हिस्सा होना चाहिए।
यह बात खास तौर पर उन कलाकारों के लिए महत्वपूर्ण है, जो लगातार भावनात्मक या मानसिक रूप से चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभाते हैं। दर्शक पर्दे पर सिर्फ कुछ घंटे के लिए किरदार देखते हैं, लेकिन अभिनेता को उस किरदार के साथ शूटिंग के दौरान कई सप्ताह या महीनों तक रहना पड़ सकता है।
निजी जिंदगी और किरदार के बीच संतुलन भी चुनौती
Kriti Sanon ने सिर्फ किरदार से दूरी बनाने की बात नहीं की, बल्कि यह भी बताया कि कलाकारों को कई बार अपनी निजी भावनाओं को काम से अलग रखना पड़ता है।
ऐसे मौके भी आए हैं जब वह निजी जिंदगी में भावनात्मक रूप से कठिन दौर से गुजर रही थीं, लेकिन कैमरे के सामने उन्हें कॉमेडी करनी थी। यानी निजी जिंदगी में मन भारी हो सकता है, लेकिन पर्दे पर किरदार को खुश और हल्का दिखाना पड़ता है।
यही अभिनय की मुश्किल परत है—अपने भीतर चल रही भावनाओं को एक तरफ रखकर उस व्यक्ति को जीना, जिसे निर्देशक ने कहानी में लिखा है।
‘हम लगातार अपनी भावनाओं से खेलते हैं…’
Kriti Sanon ने इस पूरी प्रक्रिया को समझाते हुए मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कलाकार लगातार अपनी भावनाओं को छूते और उनके साथ काम करते हैं, इसलिए खुद को संतुलित रखना जरूरी है।
अभिनेत्री ने Meditation और Therapy जैसी चीजों को भी मानसिक संतुलन बनाए रखने के संभावित सहारे के तौर पर बताया। उन्होंने कहा कि वह खुद भी समय-समय पर मेडिटेशन करती हैं और उन्हें यह काफी मददगार लगता है।
यह पहली बार नहीं है जब Kriti Sanon ने मनोरंजन उद्योग के दबाव और मानसिक थकान पर बात की हो। इससे पहले Bhediya के प्रमोशन के दौरान भी उन्होंने बताया था कि लगातार शहरों की यात्रा, इंटरव्यू और प्रमोशनल गतिविधियों के बीच वह बेहद थक गई थीं और एक समय भावुक होकर रो पड़ी थीं।
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‘Bhediya’ के प्रमोशन में टूट गई थीं Kriti
Kriti Sanon ने उस अनुभव को याद करते हुए बताया था कि Bhediya के प्रमोशन के दौरान उन्हें लगातार अलग-अलग शहरों में जाना पड़ रहा था। रात में यात्रा, अगले दिन इंटरव्यू और फिर वही सिलसिला—इस रूटीन ने उन्हें मानसिक रूप से काफी थका दिया था।
एक दिन प्रमोशन के दौरान वह अचानक रोने लगीं और उन्होंने महसूस किया कि वह पूरी तरह थक चुकी हैं। अभिनेत्री ने यह भी माना था कि ऐसी परिस्थितियां मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती हैं।
इस पुराने अनुभव और उनके हालिया बयान को साथ रखकर देखें तो साफ नजर आता है कि Kriti Sanon के लिए मानसिक स्वास्थ्य अब सिर्फ एक व्यक्तिगत मुद्दा नहीं, बल्कि उनके पेशेवर जीवन का भी अहम हिस्सा बन चुका है।

‘Mimi’ से मिला करियर का बड़ा मोड़
Mimi का जिक्र इस बातचीत में खास महत्व रखता है। फिल्म में एक सरोगेट मां की भूमिका निभाने के लिए Kriti Sanon ने अपने लुक और शरीर में बड़ा बदलाव किया था। इस प्रदर्शन के लिए उन्हें व्यापक प्रशंसा मिली और बाद में National Film Award for Best Actress से सम्मानित किया गया।
इसके बाद Do Patti में उन्होंने अभिनय के साथ निर्माता के तौर पर भी नई जिम्मेदारी संभाली। फिल्म में उन्होंने डबल रोल निभाया था और यह उनके करियर के उन प्रोजेक्ट्स में शामिल रहा, जिनमें उन्होंने अभिनय के साथ रचनात्मक जिम्मेदारी भी बढ़ाई।
‘Cocktail 2’ के बाद फिर चर्चा में Kriti
हाल के समय में Kriti Sanon को Cocktail 2 में Shahid Kapoor और Rashmika Mandanna के साथ देखा गया। फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों से मिली-जुली प्रतिक्रिया मिली। Hindustan Times की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म के प्रदर्शन के बाद Kriti ने यह भी कहा था कि उन्हें पहले से अंदाजा था कि इसकी तुलना 2012 की Cocktail से होगी और उनका किरदार Deepika Padukone के निभाए Veronica जैसा नहीं था।
हालांकि, इन सबके बीच अभिनेत्री का मानसिक स्वास्थ्य को लेकर दिया गया बयान शायद उनके हालिया इंटरव्यू की सबसे व्यक्तिगत बातों में से एक है।
आखिरकार, ग्लैमर की दुनिया में कैमरे के सामने मुस्कुराना जितना आसान दिखाई देता है, उसके पीछे भावनाओं को संभालना उतना ही मुश्किल हो सकता है। Kriti Sanon की बात इस ओर इशारा करती है कि कलाकार के लिए ‘कट’ सिर्फ शूटिंग खत्म होने का संकेत नहीं होना चाहिए—कभी-कभी खुद को किरदार से बाहर निकालना भी उतना ही जरूरी होता है।
