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‘धुरंधर’ और ‘रामायण’ पर नेगेटिविटी क्यों? Mukesh Chhabra का बड़ा बयान “समझ नहीं आता ये सब कौन करवा रहा है”
मुकेश छाबड़ा बोले—दोनों प्रोजेक्ट्स में पूरी ईमानदारी से किया काम, फिर भी क्यों उठ रहे सवाल?
बॉलीवुड में इन दिनों फिल्मों को लेकर सोशल मीडिया पर बढ़ती नेगेटिविटी एक बड़ा मुद्दा बनती जा रही है। इसी बीच मशहूर कास्टिंग डायरेक्टर Mukesh Chhabra ने फिल्म ‘धुरंधर’ और ‘रामायण’ को लेकर फैल रही आलोचनाओं पर खुलकर अपनी बात रखी है।
हाल ही में दिए गए एक इंटरव्यू में उन्होंने साफ कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि आखिर ये नेगेटिविटी कहां से आ रही है और कौन इसे बढ़ावा दे रहा है।
“कौन करवा रहा है ये सब?”
Mukesh Chhabra ने कहा,
“मैंने ‘रामायण’ और ‘धुरंधर’ दोनों प्रोजेक्ट्स पर पूरी ईमानदारी और पवित्रता के साथ काम किया है। लेकिन जो नेगेटिविटी फैल रही है, वह समझ से परे है। सच कहूं तो मुझे नहीं पता ये सब कौन करवा रहा है।”
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उनके इस बयान ने फिल्म इंडस्ट्री में एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
सोशल मीडिया ट्रेंड्स या सोची-समझी रणनीति?
आज के दौर में किसी भी फिल्म की रिलीज से पहले ही सोशल मीडिया पर उसके खिलाफ ट्रेंड शुरू हो जाते हैं।
- कई बार बिना फिल्म देखे ही आलोचना शुरू हो जाती है
- कुछ लोग इसे पब्लिसिटी स्टंट मानते हैं
- तो कुछ इसे इंडस्ट्री के अंदर की प्रतिस्पर्धा से जोड़ते हैं
मुकेश छाबड़ा का इशारा भी इसी ओर माना जा रहा है कि यह नेगेटिविटी शायद ऑर्गेनिक नहीं, बल्कि प्लान्ड हो सकती है।
‘रामायण’ जैसे प्रोजेक्ट पर दबाव
‘रामायण’ जैसी पौराणिक कहानी पर आधारित फिल्में हमेशा से दर्शकों की भावनाओं से जुड़ी होती हैं।
ऐसे में छोटी सी भी गलती या विवाद बड़ा मुद्दा बन सकता है। यही कारण है कि इस तरह के प्रोजेक्ट्स पर काम करने वाले कलाकारों और टीम पर काफी दबाव होता है।
‘धुरंधर’ को लेकर क्यों विवाद?
फिल्म ‘धुरंधर’ को लेकर भी सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।

हालांकि फिल्म अभी रिलीज नहीं हुई है, लेकिन उसके पहले ही उसे लेकर राय बनना शुरू हो गई है—जो कि इंडस्ट्री के लिए एक चुनौती बनती जा रही है।
इंडस्ट्री के लिए क्या संकेत?
Mukesh Chhabra का यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि बॉलीवुड को अब सिर्फ फिल्म बनाने पर ही नहीं, बल्कि उसकी छवि को बचाने पर भी काम करना होगा।
अगर इसी तरह बिना वजह नेगेटिविटी बढ़ती रही, तो इसका असर फिल्मों के बॉक्स ऑफिस कलेक्शन और दर्शकों के भरोसे पर पड़ सकता है।
निष्कर्ष
‘धुरंधर’ और ‘रामायण’ को लेकर उठ रही आलोचनाओं पर मुकेश छाबड़ा की प्रतिक्रिया ने यह साफ कर दिया है कि फिल्म इंडस्ट्री अब एक नए दौर से गुजर रही है—जहां असली चुनौती सिर्फ अच्छी फिल्म बनाना नहीं, बल्कि उसे नेगेटिव माहौल से बचाना भी है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि आने वाले समय में यह ट्रेंड कैसे बदलता है और दर्शक किस तरह से इन फिल्मों को स्वीकार करते हैं।
