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‘अगर अच्छा खाना है तो रेस्टोरेंट जाइए…’ R Madhavan ने Theater में खाने की आदत पर उठाए सवाल, बयान ने छेड़ दी नई बहस

‘अगर अच्छा खाना है तो रेस्टोरेंट जाइए…’ आर. माधवन ने थिएटर में खाने की आदत पर उठाए सवाल, बयान ने छेड़ दी नई बहस

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आर. माधवन का कहना है कि थिएटर में फिल्म के दौरान खाना परोसना दर्शकों का ध्यान भटकाता है और सिनेमाई अनुभव को प्रभावित करता है।

**आर. माधवन ने सिनेमाघरों में फिल्म के दौरान खाना परोसने की बढ़ती संस्कृति पर अपनी बेबाक राय रखी है। अभिनेता का कहना है कि थिएटर फिल्म देखने की जगह है, न कि रेस्तरां, और बार-बार खाने का ऑर्डर व सर्विस दर्शकों के अनुभव को प्रभावित करती है।

एक इंटरव्यू में आर. माधवन ने कहा कि आज के समय में दर्शक अपनी व्यस्त जिंदगी से तीन घंटे निकालकर फिल्म देखने आते हैं। कई बार परिवार के अलग-अलग सदस्यों की पसंद अलग होती है, फिर भी वे साथ बैठकर फिल्म का आनंद लेने की कोशिश करते हैं। ऐसे में अगर फिल्म के बीच लगातार खाने-पीने की आवाजाही होती रहे, तो पूरी तल्लीनता टूट जाती है।

उन्होंने कहा, “अगर आपको अच्छा खाना ही खाना है, तो रेस्टोरेंट जाइए। थिएटर का उद्देश्य फिल्म का अनुभव लेना है।” उनके मुताबिक, जब कोई दर्शक फिल्म के बीच खाना ऑर्डर करता है और स्टाफ सीट तक खाना पहुंचाता है, तो आसपास बैठे लोगों का ध्यान भी कहानी से हट जाता है।

आर. माधवन ने इस स्थिति की तुलना उस दर्शक से की, जो फिल्म के दौरान बार-बार अपना मोबाइल फोन इस्तेमाल करता है। उनका कहना है कि दोनों ही स्थितियां दूसरे लोगों के सिनेमाई अनुभव में बाधा डालती हैं।

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अभिनेता के इस बयान पर सोशल मीडिया पर भी चर्चा तेज हो गई। कई फिल्म प्रेमियों ने उनकी बात का समर्थन करते हुए कहा कि थिएटर में अनावश्यक आवाजाही, पैकेट खोलने की आवाज और बीच-बीच में खाने की सर्विस वास्तव में फिल्म देखने के अनुभव को प्रभावित करती है। वहीं कुछ लोगों का मानना है कि प्रीमियम थिएटर में फूड सर्विस अब दर्शकों की सुविधा का हिस्सा बन चुकी है।

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हालांकि, इस मुद्दे पर राय अलग-अलग हो सकती है, लेकिन आर. माधवन का यह बयान एक बार फिर इस सवाल को सामने ले आया है कि क्या सिनेमाघरों का माहौल पूरी तरह फिल्म-केंद्रित रहना चाहिए या आधुनिक सुविधाओं के साथ उसे बदलते समय के अनुसार ढालना चाहिए।

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