Accidents
Surat में 10वीं मंज़िल से गिरते-गिरते टल गई मौत एक लोहे की ग्रिल ने बचाई 57 साल के शख्स की जान…
हाई-राइज़ अपार्टमेंट में फिसलकर 8वीं मंज़िल की खिड़की की ग्रिल में उल्टा फंसा व्यक्ति, करीब एक घंटे तक चला हाई-रिस्क रेस्क्यू
Surat शहर में मंगलवार को एक ऐसा हादसा सामने आया, जिसने देखने वालों की सांसें थाम दीं। 57 वर्षीय नितिन अडिया नामक व्यक्ति अपने 10वीं मंज़िल के फ्लैट की खिड़की के पास आराम कर रहा था, तभी अचानक संतुलन बिगड़ने से वह नीचे फिसल गया।
हालांकि किस्मत ने इस बार साथ दिया। सीधे ज़मीन पर गिरने के बजाय नितिन अडिया 8वीं मंज़िल की खिड़की के बाहर लगी लोहे की ग्रिल में उल्टे लटक गए। एक पैर ग्रिल में फंस गया और उनका पूरा शरीर हवा में झूलता रहा।
यह घटना Jahangirpura इलाके के Times Galaxy रिहायशी परिसर में हुई, जहाँ देखते ही देखते अफरा-तफरी मच गई।
करीब एक घंटे तक मौत और ज़िंदगी के बीच लटके रहे
स्थानीय निवासियों ने जैसे ही व्यक्ति को लटका देखा, तुरंत शोर मचाया और Fire Brigade तथा आपात सेवाओं को सूचना दी।

सोशल मीडिया पर वायरल हुए वीडियो में नितिन अडिया दर्द और घबराहट में साफ दिखाई दे रहे हैं, जबकि नीचे बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए थे। किसी भी गलत मूवमेंट से बड़ा हादसा हो सकता था।
तीन फायर स्टेशन, एक मिशन: जान बचाना
खबरों के अनुसार, Surat Fire and Emergency Services की टीमें जहांगीरपुरा, Palanpur और Adajan फायर स्टेशनों से मौके पर पहुंचीं।
- एक टीम ने नीचे सेफ्टी नेट बिछाया
- दूसरी टीम 10वीं मंज़िल से रस्सियों और सेफ्टी बेल्ट से व्यक्ति को सहारा देने लगी
- तीसरी टीम 8वीं मंज़िल से ग्रिल तक पहुंची
रेस्क्यू को बेहद सावधानी से अंजाम दिया गया।
हाइड्रॉलिक कटर से काटी गई ग्रिल
एक फायर अधिकारी ने बताया,
“यह हाई-रिस्क रेस्क्यू था। पहले हमने ऊपर से रस्सियों और सेफ्टी बेल्ट से शरीर का भार संभाला, उसके बाद ही हाइड्रॉलिक कटर से ग्रिल को धीरे-धीरे काटा गया।”

करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद नितिन अडिया को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
अस्पताल में भर्ती, खतरे से बाहर
रेस्क्यू के बाद उन्हें तुरंत Gurukrupa Hospital ले जाया गया, जहाँ डॉक्टरों ने पुष्टि की कि वे खतरे से बाहर हैं। हालांकि उनके पैर में चोट आई है, लेकिन जान को कोई खतरा नहीं है।
सोशल मीडिया पर भावुक प्रतिक्रियाएं
घटना के वीडियो सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं आने लगीं।
एक यूज़र ने लिखा, “डरावना था, रेस्क्यू टीम को सलाम।”
वहीं दूसरे ने कहा, “इतनी देर लटके रहना असहनीय दर्द रहा होगा।”
समय पर मदद ने बचाई जान
फायर अधिकारियों का कहना है कि अगर स्थानीय लोग समय पर अलर्ट न करते और रेस्क्यू टीमों में समन्वय न होता, तो नतीजा बेहद खतरनाक हो सकता था। यह घटना शहरी इलाकों में सुरक्षा उपायों और बालकनी-ग्रिल डिज़ाइन पर भी सवाल खड़े करती है।
