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₹120 करोड़ खर्च, फिर भी पानी हुआ हरा! व्हाइट हाउस के रिफ्लेक्टिंग पूल पर उठे सवाल
करोड़ों डॉलर की मरम्मत के बाद दोबारा खोला गया व्हाइट हाउस का ऐतिहासिक रिफ्लेक्टिंग पूल, लेकिन कुछ ही दिनों में लौट आई शैवाल की परत।
वॉशिंगटन: अमेरिका के सबसे प्रतिष्ठित स्थलों में गिने जाने वाले व्हाइट हाउस रिफ्लेक्टिंग पूल को हाल ही में बड़े स्तर पर पुनर्निर्माण के बाद जनता के लिए फिर से खोला गया। लेकिन उद्घाटन के कुछ ही दिनों बाद इसकी तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने लगीं, जिनमें पूल का पानी हरे रंग का दिखाई दे रहा था।
रिपोर्ट्स के अनुसार, इस परियोजना पर करीब 1.4 करोड़ डॉलर (लगभग ₹120 करोड़) खर्च किए गए थे। उद्देश्य था कि पूल की संरचना को मजबूत किया जाए और उसके पानी को आकर्षक नीले रंग का स्वरूप दिया जाए। हालांकि, अपेक्षित परिणाम लंबे समय तक कायम नहीं रह सके।
क्या था पुनर्निर्माण का उद्देश्य?
White House Reflecting Pool वर्षों से अमेरिकी राजधानी का एक प्रमुख आकर्षण रहा है। इस बार किए गए नवीनीकरण में पूल की मरम्मत, जल प्रणाली में सुधार और इसके सौंदर्यीकरण पर विशेष ध्यान दिया गया।
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बताया गया कि पानी को एक खास नीला रंग देने की योजना बनाई गई थी, जिसे “American Flag Blue” की अवधारणा से प्रेरित माना गया। इसका मकसद पूल को और अधिक आकर्षक बनाना था।
लेकिन उद्घाटन के कुछ समय बाद ही पानी में फिर से शैवाल (Algae) दिखाई देने लगे, जिससे पूल का रंग हरा पड़ गया।
क्यों लौट आती है शैवाल की समस्या?
विशेषज्ञों के मुताबिक, खुले जलाशयों में शैवाल का बनना एक सामान्य प्राकृतिक प्रक्रिया है। धूप, तापमान, पोषक तत्वों की अधिकता और जल प्रवाह की स्थिति इसके विकास को प्रभावित करती है।
हालांकि, आलोचकों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि खर्च करने के बावजूद यदि समस्या जल्दी लौट आती है, तो रखरखाव और तकनीकी उपायों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
प्रशासन ने क्या कहा?
अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि National Park Service अब इस ऐतिहासिक पूल की नियमित निगरानी और देखभाल कर रही है।
विभाग के प्रवक्ताओं के अनुसार, वर्तमान प्रशासन इस स्थल के रखरखाव को प्राथमिकता दे रहा है और आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं ताकि इसकी सुंदरता बरकरार रखी जा सके।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
पूल की तस्वीरें सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाए कि करोड़ों डॉलर खर्च होने के बावजूद समस्या दोबारा कैसे लौट आई। वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि प्राकृतिक जल स्रोतों में शैवाल को पूरी तरह खत्म करना आसान नहीं होता और इसके लिए लगातार रखरखाव की आवश्यकता होती है।
यह घटना एक बार फिर याद दिलाती है कि बड़े सार्वजनिक ढांचों के निर्माण या नवीनीकरण के बाद नियमित देखभाल भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितना उनका निर्माण।
फिलहाल, प्रशासन का दावा है कि पूल की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और इसे लंबे समय तक आकर्षक बनाए रखने के प्रयास जारी हैं।
