Economy
World Bank की चेतावनी: 2026 में Global Growth घटकर 2.5%, India की रफ्तार 6.6% पर
मिडिल ईस्ट संकट और महंगाई का असर, फिर भी दुनिया में सबसे तेज़ बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में रहेगा भारत
वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर एक बड़ी चेतावनी सामने आई है। World Bank ने 2026 के लिए ग्लोबल ग्रोथ का अनुमान घटाकर 2.5% कर दिया है, जो कोविड-19 महामारी के बाद सबसे धीमी रफ्तार मानी जा रही है।
भारत की अर्थव्यवस्था पर क्या असर?
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत की आर्थिक वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026-27 में 6.6% रहने का अनुमान है। हालांकि यह पहले की तुलना में थोड़ी धीमी है, लेकिन फिर भी भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा।
World Bank ने कहा कि इस साल की शुरुआत में भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत रही है, जिसमें घरेलू मांग का बड़ा योगदान है। खासकर ग्रामीण इलाकों में खपत मजबूत बनी हुई है, जबकि शहरी मांग में भी सुधार देखा गया है।
क्यों धीमी पड़ रही है ग्रोथ?
रिपोर्ट में बताया गया है कि मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष के कारण ऊर्जा की कीमतों में तेजी आई है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ रही है। इसका सीधा असर आम लोगों की खर्च करने की क्षमता और कंपनियों के निवेश पर पड़ रहा है।
महंगे तेल और गैस की वजह से महंगाई बढ़ने का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बन रहा है।
सरकार के कदम देंगे राहत
World Bank का मानना है कि सरकार द्वारा उठाए गए कुछ कदम इस दबाव को कम कर सकते हैं। जैसे:
- फ्यूल टैक्स में कटौती
- कृषि क्षेत्र में उर्वरकों की उपलब्धता बढ़ाना
- GST दरों में संभावित कमी
ये सभी कदम उपभोक्ताओं की मांग को बनाए रखने में मदद कर सकते हैं।
आगे की तस्वीर: फिर तेज़ होगी रफ्तार
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की अर्थव्यवस्था 2028 में फिर से 7.2% की रफ्तार पकड़ सकती है और 2029 में करीब 7% पर स्थिर रह सकती है।
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इसके पीछे घरेलू मांग में सुधार, एक्सपोर्ट में बढ़ोतरी और विदेशी निवेश (FDI) में वृद्धि को अहम कारण बताया गया है।
वैश्विक स्तर पर क्यों बढ़ी चिंता?
World Bank ने साफ कहा है कि मिडिल ईस्ट का संकट वैश्विक व्यापार पर असर डाल रहा है, खासकर तेल और गैस की सप्लाई पर। Strait of Hormuz जैसे अहम रास्तों में बाधा आने से कीमतें बढ़ गई हैं।

इसके अलावा:
- महंगाई में बढ़ोतरी
- सख्त मौद्रिक नीतियां
- कमजोर अंतरराष्ट्रीय व्यापार
ये सभी कारण मिलकर दुनिया की आर्थिक रफ्तार को धीमा कर रहे हैं।
क्या है आगे का जोखिम?
हालांकि 2027-28 में वैश्विक ग्रोथ 2.8% तक सुधरने की उम्मीद है, लेकिन World Bank ने चेतावनी दी है कि अगर geopolitical tensions (भूराजनीतिक तनाव) जारी रहे, तो स्थिति और खराब हो सकती है।
निष्कर्ष
कुल मिलाकर, जहां एक तरफ वैश्विक अर्थव्यवस्था दबाव में है, वहीं भारत अभी भी मजबूती से खड़ा नजर आ रहा है। हालांकि चुनौतियां कम नहीं हैं, लेकिन सही नीतियों और सुधारों के जरिए भारत आगे भी मजबूत ग्रोथ बनाए रख सकता है।
