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Benjamin Netanyahu बोले — “खामेनेई अब नहीं रहे”, ईरान ने कहा — “यह मनोवैज्ञानिक युद्ध है”, सच क्या है?
इज़राइली PM ने वीडियो में किया दावा — “तानाशाह अब ज़िंदा नहीं”, IRGC कमांडर और परमाणु अधिकारी भी मारे गए। ईरान ने दावे को बताया झूठ।
युद्ध में दो चीज़ें एक साथ चलती हैं — हथियार और अफवाहें। और शनिवार को इज़राइल-ईरान जंग में दोनों एक साथ चरम पर थे।
इज़राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक वीडियो बयान जारी किया जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया। उन्होंने कहा — “आज सुबह हमने तानाशाह खामेनेई के परिसर को तेहरान के दिल में नष्ट कर दिया। और कई संकेत हैं कि यह तानाशाह अब ज़िंदा नहीं है।”
यह बयान सुनते ही दुनियाभर के मीडिया में हड़कंप मच गया।
ईरान का जवाब — “यह मनोवैज्ञानिक युद्ध है”
लेकिन ईरान ने नेतन्याहू के इस दावे को सीधे नकार दिया। ईरान ने इसे “मनोवैज्ञानिक युद्ध” करार देते हुए खारिज कर दिया। ईरानी अधिकारियों ने कहा कि यह इज़राइल की एक चाल है — देश में दहशत फैलाने की, ईरानी जनता का मनोबल तोड़ने की।
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यह कोई नई बात नहीं है। युद्ध में दुश्मन के नेता की मौत की झूठी खबर फैलाना एक पुरानी रणनीति है। द्वितीय विश्वयुद्ध में भी ऐसा हुआ था जब हिटलर की मौत की खबरें कई बार समय से पहले फैलाई गईं — असली मकसद था दुश्मन की सेना का मनोबल गिराना।
IRGC कमांडर और परमाणु अधिकारी भी ढेर?
Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक इस ऑपरेशन में ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC के कमांडर, उच्च पदाधिकारी और परमाणु कार्यक्रम से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों को भी मारा गया है।
अगर यह सच है तो यह ईरान की सैन्य और परमाणु क्षमता के लिए बहुत बड़ा झटका है। IRGC ईरान की सबसे ताकतवर सैन्य इकाई है — यह वही संगठन है जो मध्य-पूर्व में ईरान के प्रॉक्सी नेटवर्क को चलाता है।
नेतन्याहू का दावा — परिसर “तेहरान के दिल में” नष्ट
नेतन्याहू ने अपने वीडियो में कहा कि खामेनेई के परिसर को “तेहरान के दिल में” तबाह किया गया। यह बयान इसलिए भी अहम है क्योंकि तेहरान का वह इलाका ईरान की सत्ता का केंद्र माना जाता है — वहां सुरक्षा के कई स्तर होते हैं।
यह वैसा ही है जैसे कोई कहे कि दिल्ली के साउथ ब्लॉक को नष्ट कर दिया — यानी सत्ता के एकदम केंद्र पर हमला।
सच क्या है — दुनिया इंतज़ार कर रही है
अभी तक खामेनेई की मौत की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। न इज़राइल के पास ठोस सबूत हैं, न ईरान ने साफ तस्वीर पेश की है। ईरानी विदेश मंत्री का “जहां तक मुझे पता है — वो ज़िंदा हैं” वाला अधूरा जवाब अभी भी सबसे बड़ा सवाल बना हुआ है।
एक बात तय है — खामेनेई ज़िंदा हों या न हों, ईरान की सत्ता अभी भी खड़ी है। और यह जंग अभी खत्म नहीं हुई।
