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भारत पर फिर टैरिफ की तैयारी में Trump ! ‘फोर्स्ड लेबर’ के आरोपों के बीच अमेरिका का बड़ा कदम
नई दिल्ली में अमेरिकी व्यापार टीम की मौजूदगी के बीच सामने आया प्रस्ताव, भारत समेत कई देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तैयारी
भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक संबंधों को लेकर एक बार फिर नई चर्चा शुरू हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन कथित Forced Labour यानी जबरन श्रम से जुड़े मुद्दों को आधार बनाकर भारत सहित कई देशों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की तैयारी कर रहा है। हालांकि यह प्रस्ताव अभी अंतिम रूप में लागू नहीं हुआ है, लेकिन इसके सामने आने से अंतरराष्ट्रीय व्यापार जगत में हलचल तेज हो गई है।
दिलचस्प बात यह है कि यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों की एक टीम नई दिल्ली में विभिन्न व्यापारिक मुद्दों पर बातचीत कर रही है। ऐसे में दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों पर भी इसकी नजर रखी जा रही है।
किन देशों पर लग सकता है नया टैरिफ?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की ओर से जारी दस्तावेज के अनुसार, कई देशों पर कथित तौर पर forced labour imports के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया गया है।
प्रस्ताव के तहत भारत, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया, ब्राजील और स्विट्जरलैंड जैसे देशों पर 12.5 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बात कही गई है। वहीं कनाडा, मैक्सिको, ताइवान और यूनाइटेड किंगडम पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क का प्रस्ताव रखा गया है।
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यदि यह प्रस्ताव लागू होता है तो कई उत्पादों की अमेरिकी बाजार तक पहुंच महंगी हो सकती है, जिसका असर निर्यातकों और कारोबारियों पर पड़ सकता है।
ट्रंप प्रशासन की क्या है दलील?
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि वैश्विक सप्लाई चेन में जबरन श्रम से बने उत्पादों को रोकने के लिए सभी व्यापारिक साझेदारों को सख्त कदम उठाने चाहिए। वाशिंगटन का दावा है कि कुछ देशों द्वारा पर्याप्त कार्रवाई न किए जाने से अमेरिकी उद्योग और व्यापार प्रभावित हो रहे हैं।
इसी आधार पर Trade Act 1974 की धारा 301 के तहत कई देशों की समीक्षा की गई थी। अब उसी प्रक्रिया के बाद अतिरिक्त टैरिफ का प्रस्ताव सामने आया है।
क्या तुरंत लागू हो जाएगा फैसला?
फिलहाल ऐसा नहीं है। अमेरिकी सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रस्ताव अभी public comment और समीक्षा प्रक्रिया से गुजरेगा। यानी उद्योग संगठनों, व्यापारिक समूहों और आम लोगों की राय लेने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

इस वजह से निकट भविष्य में तत्काल प्रभाव से कोई नया शुल्क लागू होने की संभावना नहीं मानी जा रही है। हालांकि व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना आगे बढ़ती है तो वैश्विक व्यापार में नई चुनौतियां खड़ी हो सकती हैं।
भारत पर क्या हो सकता है असर?
भारत अमेरिका का एक महत्वपूर्ण व्यापारिक साझेदार है। दोनों देशों के बीच तकनीक, दवाइयों, इंजीनियरिंग सामान, टेक्सटाइल और कई अन्य क्षेत्रों में बड़ा कारोबार होता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अतिरिक्त टैरिफ लागू होता है तो कुछ भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ सकती है। हालांकि अंतिम प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि किन उत्पादों को इसके दायरे में शामिल किया जाता है और दोनों देशों के बीच आगे क्या समझौते होते हैं।
व्यापारिक रिश्तों पर टिकी नजर
पिछले कुछ वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी मजबूत हुई है। ऐसे में प्रस्तावित टैरिफ को लेकर दोनों देशों के कारोबारी समुदाय की नजरें आगामी बातचीत और अमेरिकी प्रशासन के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं।
फिलहाल यह मामला समीक्षा चरण में है, लेकिन इसने वैश्विक व्यापार और भारत-अमेरिका आर्थिक संबंधों को लेकर नई बहस जरूर छेड़ दी है।

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