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Cannes 2026 में Alia Bhatt का दमदार बयान: “अगर सिर्फ मर्दों के लिए फिल्में बनेंगी, तो महिलाएं कहाँ जाएंगी?”
L’Oréal Paris की Global Ambassador बनकर Cannes पहुँची Alia ने Bollywood की Male-Centric सोच पर उठाए तीखे सवाल, कहा — “Storytelling किसी एक Gender की नहीं होती”
Cannes: फ्रांस की धूप में हर साल Cannes Film Festival जब शुरू होता है, तो दुनिया भर की नज़रें उस Red Carpet पर टिक जाती हैं। लेकिन इस बार Alia Bhatt ने सिर्फ अपनी खूबसूरती से नहीं, बल्कि अपने शब्दों से भी सबका ध्यान खींचा। Cannes 2026 में उन्होंने एक ऐसा सवाल उठाया जो Bollywood के गलियारों में बरसों से दबा पड़ा था — “अगर हम सिर्फ पुरुषों को ध्यान में रखकर फिल्में बनाएंगे, तो महिलाओं का क्या होगा?”
दूसरी बार Cannes, पर इस बार ज़्यादा सहज
Alia Bhatt इस साल L’Oréal Paris की Global Ambassador के रूप में Cannes पहुँची थीं। पिछले साल 2025 में जब वो पहली बार यहाँ आई थीं, तो उन्होंने उस अनुभव को “Chaotic” बताया था — सब कुछ इतना तेज़ी से हुआ था कि ठीक से महसूस करने का वक्त ही नहीं मिला। लेकिन इस बार वो खुद कह रही हैं कि वो ज़्यादा Settled हैं और Festival को खुलकर Enjoy कर रही हैं।
Festival के दौरान उन्होंने The Hollywood Reporter India को एक इंटरव्यू दिया — और उसमें जो कहा, वो सुनने लायक है।
Barbie और Wuthering Heights ने दिया जवाब
Alia ने Cinema की मौजूदा स्थिति पर बात करते हुए कहा कि आज का दौर वाकई बेहद दिलचस्प है। उन्होंने ध्यान दिलाया कि दुनिया भर में महिला दर्शकों वाली फिल्मों ने Box Office पर इतिहास रच दिया है —“अगर आप Box Office को देखें, तो Barbie, Wuthering Heights, और The Devil Wears Prada जैसी फिल्मों ने जबरदस्त कमाई की। इनका मुख्य दर्शक वर्ग महिलाएं थीं — और ये Massive Hits बन गईं।”
यह बात सुनकर कोई भी रुककर सोच सकता है। जब Hollywood में महिलाएं थिएटर का रुख कर रही हैं और Billion Dollar Films बना रही हैं — तो भारत में यह सोच अभी भी क्यों बनी हुई है कि “असली दर्शक तो मर्द हैं”?
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“75% Male Audience” वाले तर्क पर Alia ने दिया करारा जवाब
Bollywood में एक argument बड़ी आम है — कि भारत में 75% Movie-Going Audience पुरुष है, इसलिए फिल्में उन्हें ध्यान में रखकर बनाई जाती हैं। Alia ने इस पर बेझिझक कहा —“India में जब Box Office और Numbers की बात होती है, तो यह Conversation बार-बार आती है कि 75% Audience Male है, इसलिए Masses को Cater करो। लेकिन मेरे मन में सवाल उठता है — अगर हम सिर्फ पुरुषों को Cater कर रहे हैं, तो महिलाओं का क्या होगा?”
यह सवाल जितना सरल लगता है, उतना ही गहरा है। क्या यह एक Chicken-and-Egg situation है — महिलाएं थिएटर इसलिए नहीं जातीं क्योंकि उनके लिए कुछ बना ही नहीं, या फिर कुछ बनता इसलिए नहीं क्योंकि यह मान लिया गया कि वो आएंगी नहीं?

“पुरुषों को बाहर करो” — यह नहीं कह रहीं Alia
Alia ने साफ किया कि उनकी बात किसी को बाहर करने की नहीं, बल्कि सबको जोड़ने की है —“मैं यह नहीं कह रही कि पुरुषों को Alienate करो। लेकिन किसी को भी क्यों Alienate करें? हम एक Gender को Cater क्यों करें? हम ऐसी फिल्में क्यों नहीं बना सकते जो Gender-Agnostic हों — जहाँ Storytelling Centre Stage पर हो?”
यह एक ऐसी बात है जो Alia Bhatt जैसी Actress के मुँह से और भी वज़नदार लगती है — क्योंकि वो खुद Bollywood की उस दुनिया का हिस्सा हैं जहाँ Blockbusters बनते हैं और Numbers की भाषा में ही बात होती है।
क्या Bollywood सुनेगा?
यह सवाल हवा में लटका हुआ है। Alia Bhatt ने Cannes के मंच से जो कहा, वो सिर्फ एक Interview की बात नहीं है — यह उस बड़े बदलाव की माँग है जो भारतीय सिनेमा को अंदर से हिलाने की ज़रूरत है। जब तक Storytelling Gender की जंजीरों में बंधी रहेगी, तब तक India का अपना “Barbie Moment” आना मुश्किल है।
