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क्या Dharmendra ने Govinda को मारा था थप्पड़? ‘आवारगी’ के सेट की सच्चाई आई सामने

90 के दशक की इस चर्चा ने मचाया था बवाल, लेकिन बाद में खुद धर्मेंद्र ने बताया पूरा सच

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क्या धर्मेंद्र ने गोविंदा को थप्पड़ मारा था? ‘आवारगी’ विवाद की पूरी सच्चाई
‘आवारगी’ के दौर की तस्वीर, धर्मेंद्र और गोविंदा के बीच विवाद की खबरों ने बटोरी थी सुर्खियां

बॉलीवुड के गलियारों में कई कहानियां ऐसी हैं जो सालों बाद भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी रहती हैं। ऐसी ही एक कहानी जुड़ी है फिल्म ‘आवारगी’ से, जिसमें यह अफवाह फैली थी कि धर्मेंद्र ने गुस्से में आकर गोविंदा को थप्पड़ मार दिया था। लेकिन क्या सच में ऐसा हुआ था? आइए जानते हैं पूरी कहानी।

कैसे शुरू हुई यह कहानी?

90 के दशक की शुरुआत में जब फिल्म ‘आवारगी’ बन रही थी, उस समय गोविंदा अपने करियर के शानदार दौर में थे। फिल्म की शुरुआती योजना में वह और मीनाक्षी शेषाद्रि मुख्य भूमिकाओं में थे।

लेकिन जैसे-जैसे फिल्म की कहानी आगे बढ़ी, इसमें अनिल कपूर की एंट्री हुई। यही बदलाव बाद में कई चर्चाओं की वजह बना।

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गोविंदा और अनिल कपूर के बीच अनबन?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, गोविंदा इस बात से खुश नहीं थे कि फिल्म में अनिल कपूर को जोड़ा गया है। इस बात को लेकर उन्होंने सीधे जाकर धर्मेंद्र से बात की, जो उस समय फिल्म से जुड़े हुए थे।

बताया जाता है कि इस मुलाकात के दौरान माहौल थोड़ा गर्म जरूर हुआ, लेकिन मामला जल्द ही संभल गया।

थप्पड़ वाली अफवाह—क्या है सच्चाई?

उस समय इंडस्ट्री में यह खबर तेजी से फैल गई कि धर्मेंद्र ने गोविंदा को थप्पड़ मार दिया। हालांकि, बाद में खुद धर्मेंद्र ने इन खबरों को सिरे से खारिज कर दिया।

क्या धर्मेंद्र ने गोविंदा को थप्पड़ मारा था? ‘आवारगी’ विवाद की पूरी सच्चाई


उन्होंने साफ कहा कि ऐसा कोई वाकया कभी हुआ ही नहीं। यह सिर्फ एक गलतफहमी थी, जिसे लोगों ने बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर दिया।

फिल्म ‘आवारगी’ की कहानी

‘आवारगी’, जिसे महेश भट्ट ने डायरेक्ट किया था, एक इमोशनल और ड्रामेटिक कहानी थी।

फिल्म में अनिल कपूर ने आजाद का किरदार निभाया, जो एक गैंगस्टर होते हुए भी दिल से अच्छा इंसान होता है। वह सीमा (मीनाक्षी शेषाद्रि) को एक मुश्किल जिंदगी से निकालकर उसे सिंगर बनाने का सपना देखता है।

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इस सफर में गोविंदा का किरदार धीरेन भी उनके साथ जुड़ता है, लेकिन कहानी तब दिलचस्प मोड़ लेती है जब दोनों ही सीमा से प्यार करने लगते हैं। यह लव ट्रायंगल फिल्म की सबसे खास बातों में से एक था।

म्यूजिक जो आज भी यादगार है

फिल्म का संगीत भी इसकी बड़ी ताकत रहा। अनु मलिक के म्यूजिक और “चमकते चांद को” जैसे गानों ने इसे आज भी यादगार बना रखा है।

यह गाना गुलाम अली की आवाज में आज भी लोगों के दिलों में बसता है।


आज, इतने सालों बाद भी ‘आवारगी’ सिर्फ अपनी कहानी या गानों के लिए नहीं, बल्कि इन ऑफ-स्क्रीन किस्सों के लिए भी याद की जाती है। लेकिन सच यही है कि कई बार जो हम सुनते हैं, वह पूरी सच्चाई नहीं होती।