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Harleen Deol से सीखें Babar Azam, जब अहं टीम से बड़ा हो जाए तो क्रिकेट हार जाता है
एक ओर संयम और टीम भावना, दूसरी ओर नाराज़गी और आत्मकेंद्रित सोच, Harleen Deol और Babar Azam की दो कहानियां
क्रिकेट का सबसे बड़ा उसूल हमेशा एक ही रहा है – टीम पहले, खिलाड़ी बाद में। लेकिन जब कोई खिलाड़ी खुद को ही मुकाबले का केंद्र मानने लगे, तो वही खेल उसके खिलाफ खड़ा हो जाता है। हाल के दिनों में यह फर्क दो अलग-अलग मुकाबलों में साफ दिखाई दिया, जहां एक ओर Harleen Deol ने टीम के फैसले को चुपचाप स्वीकार कर जवाब दिया, वहीं दूसरी ओर Babar Azam अपने ही गुस्से में उलझते नजर आए।
WPL के एक मुकाबले में DY Patil Stadium, Navi Mumbai में UP Warriorz ने Delhi Capitals के खिलाफ Harleen Deol को रिटायर आउट करने का चौंकाने वाला फैसला लिया। उस वक्त Harleen 47 रन बनाकर क्रीज पर थीं। बाहर से देखने पर यह फैसला गैरज़रूरी लगा, लेकिन टीम मैनेजमेंट ने आखिरी ओवरों में ज्यादा आक्रामक बल्लेबाज़ी के लिए यह जोखिम उठाया। फैसला मैच में काम नहीं आया, लेकिन Harleen ने इसे निजी अपमान नहीं बनाया।
अगले ही दिन Harleen Deol ने बल्ले से जवाब दिया। Mumbai Indians के खिलाफ उन्होंने नाबाद 64 रन की शानदार पारी खेली और UP Warriorz को सीज़न की पहली जीत दिलाई। न कोई बयान, न कोई नाराज़गी, सिर्फ प्रदर्शन। यही वह रवैया है जो बड़े खिलाड़ी को पहचान देता है।
अब इस तस्वीर की तुलना Sydney Sixers के उस मुकाबले से कीजिए, जहां Babar Azam और Steve Smith क्रीज पर थे। SCG में खेले गए Sydney Derby में Babar 47 रन पर खेल रहे थे, तभी आखिरी गेंद पर Steve Smith ने सिंगल लेने से इनकार कर दिया। वजह थी BBL का Power Surge, जिसमें Smith खुद स्ट्राइक पर रहना चाहते थे।
रणनीति साफ थी। BBL का Power Surge आम पावरप्ले से अलग है और Sixers ने तय किया था कि Smith इस दौरान ज्यादा रन बटोरेंगे। लेकिन Babar Azam को यह फैसला नागवार गुज़रा। मिड-पिच पर दोनों की मुलाकात में तनाव साफ दिखा, और Babar का गुस्सा चेहरे से झलक रहा था।

विडंबना यह रही कि जिस फैसले पर Babar नाराज़ थे, उसी फैसले ने मैच Sixers के पक्ष में मोड़ दिया। Steve Smith ने Ryan Hadley के ओवर में 32 रन ठोक दिए, जो BBL इतिहास का सबसे महंगा ओवर बना। इसके बावजूद Babar अपने गुस्से से बाहर नहीं आए। अगली ही बार जब वह स्ट्राइक पर आए, तो जल्दबाज़ी में शॉट खेल बैठे और आउट होकर गुस्से में पवेलियन लौटे।
मैच तो Sixers जीत गए, लेकिन Babar का रवैया सवालों के घेरे में आ गया। यह पहला मौका नहीं है। Pakistan में पहले ही उनके T20 रवैये और स्ट्राइक रेट को लेकर बहस चल रही है। कभी उन्हें Virat Kohli के बराबर बताया गया, लेकिन छोटे प्रारूप में टीम को आगे न ले जा पाने की वजह से आलोचना बढ़ती गई।
आंकड़े भी सख्त सवाल पूछते हैं। 129 T20I पारियों में 128 के आसपास का स्ट्राइक रेट, पावरप्ले का पूरा इस्तेमाल न कर पाना और मिडिल ऑर्डर पर दबाव डालना – ये सारी बातें Babar की बल्लेबाज़ी पर उंगली उठाती हैं। BBL में भी उनका प्रदर्शन औसत से नीचे रहा है, जिससे फैंस की नाराज़गी समझी जा सकती है।
इसके उलट Harleen Deol का उदाहरण बताता है कि क्रिकेट में जवाब शब्दों से नहीं, बल्ले से दिया जाता है। उन्होंने न रिटायर आउट होने पर सवाल उठाए, न टीम मैनेजमेंट को दोष दिया। उन्होंने खेला, जीता और आगे बढ़ गईं।
यही फर्क है। एक खिलाड़ी खुद को टीम से ऊपर रखता है, दूसरा टीम के लिए खुद को पीछे रखता है। क्रिकेट इतिहास गवाह है, जो खिलाड़ी इस फर्क को समझ लेता है, वही लंबे समय तक याद रखा जाता है।
