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ईरान ने भारत को दिया ‘दोस्त देश’ का दर्जा होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकेंगे भारतीय जहाज

अमेरिका-इज़राइल युद्ध के बीच ईरान ने भारत, रूस, चीन, पाकिस्तान और इराक को दी राहत — दुनिया के 20% तेल की आवाजाही का रास्ता खुला

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ईरान ने भारत को दिया 'मित्र देश' का दर्जा, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजर सकेंगे भारतीय जहाज | Dainik Diary
फाइल फोटो: होर्मुज जलडमरूमध्य की ओर जाता एक मालवाहक जहाज। ईरान ने भारत समेत 5 मित्र देशों के जहाजों को इस संवेदनशील रास्ते से गुजरने की अनुमति दी है।

नई दिल्ली / तेहरान। पश्चिम एशिया में अमेरिका और इज़राइल के साथ युद्ध के बीच ईरान ने एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत को अपनी “मित्र देशों” की सूची में शामिल कर लिया है। इसका मतलब साफ है — भारतीय जहाज अब होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित गुजर सकते हैं।

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने गुरुवार को ईरानी राज्य टेलीविजन पर बयान देते हुए कहा कि चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान के जहाजों को होर्मुज से सुरक्षित रास्ता दिया जा रहा है। मुंबई स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास ने भी सोशल मीडिया पर इसकी पुष्टि करते हुए लिखा — “ईरान के विदेश मंत्री अराघची: हमने चीन, रूस, भारत, इराक और पाकिस्तान सहित मित्र देशों के लिए होर्मुज जलडमरूमध्य से रास्ता खोला है।”

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क्यों ज़रूरी है यह रास्ता भारत के लिए?

होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का वह नाजुक समुद्री गलियारा है जिससे होकर दुनिया का करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है। भारत के लिए तो यह और भी अहम है — देश की 70 से 80 प्रतिशत एलपीजी (रसोई गैस) की आपूर्ति इसी रास्ते से होती है। सोचिए, जब यह रास्ता बंद हुआ तो घरों की रसोई से लेकर पेट्रोल पंप तक असर पड़ा।

28 फरवरी 2026 को जब अमेरिका और इज़राइल ने ईरान पर संयुक्त हवाई हमले किए — जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली ख़ामेनेई की मौत भी हुई — तब ईरान ने जवाबी कार्रवाई में होर्मुज को पूरी तरह बंद कर दिया। इसके बाद से कच्चे तेल की कीमत 65 डॉलर प्रति बैरल से उछलकर 126 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई — यानी लगभग दोगुनी। विशेषज्ञ इसे 1970 के दशक के ऊर्जा संकट के बाद का सबसे बड़ा व्यवधान बता रहे हैं।

भारत की कूटनीति रंग लाई

यह राहत यूं ही नहीं मिली। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर इन दिनों फ्रांस में G7 बैठक में शामिल हैं और होर्मुज संकट वहां भी प्रमुख मुद्दा बना हुआ है। भारतीय राजनयिकों ने तेहरान से बातचीत कर अपने जहाजों के लिए रास्ता सुनिश्चित किया। इससे पहले दो भारतीय एलपीजी टैंकर होर्मुज पार कर पश्चिमी भारत के बंदरगाहों की ओर रवाना हो चुके हैं। बंदरगाह मंत्रालय के विशेष सचिव राजेश कुमार सिन्हा ने नई दिल्ली में प्रेस ब्रीफिंग में इसकी जानकारी दी।

अराघची ने अपने बयान में यह भी स्पष्ट किया कि यह रास्ता सिर्फ उन्हीं देशों के लिए खुला है जिन्होंने ईरान से संपर्क किया और समन्वय बनाया। उन्होंने कहा — “हम युद्ध की स्थिति में हैं। यह क्षेत्र एक युद्ध क्षेत्र है। हमारे दुश्मनों के जहाजों को रास्ता देने का कोई कारण नहीं है — लेकिन बाकियों के लिए रास्ता खुला है।”

अमेरिका और इज़राइल के जहाज रहेंगे बाहर

ईरान ने साफ कर दिया है कि अमेरिका, इज़राइल और उनके सहयोगी खाड़ी देशों के जहाजों को होर्मुज से गुजरने नहीं दिया जाएगा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके जवाब में नौसैनिक गठबंधन बनाने की बात कही है। यूरोप भी चिंतित है — Shell के सीईओ ने चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज जल्द नहीं खुला तो अगले महीने से यूरोप में ईंधन की किल्लत हो सकती है।

संयुक्त राष्ट्र महासचिव अंतोनियो गुतेरेस ने भी होर्मुज को पूरी तरह खोलने की मांग की है। उन्होंने कहा कि होर्मुज की लंबी बंदी वैश्विक बुवाई के मौसम में तेल, गैस और खाद की आवाजाही को बाधित कर रही है जिससे दुनियाभर के आम नागरिकों पर भारी असर पड़ रहा है।

आगे क्या?

फिलहाल भारत के लिए यह एक बड़ी राहत है। लेकिन विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति स्थायी नहीं है। जब तक अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध जारी है, होर्मुज का संकट बना रहेगा। भारत की कोशिश होगी कि वह गुटनिरपेक्षता की अपनी परंपरागत नीति पर चलते हुए इस संकट में अपने हितों की रक्षा करता रहे — ठीक वैसे ही जैसे रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान उसने दोनों पक्षों से संबंध बनाए रखे।