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क्या Karnataka में 80 लाख वोटर लिस्ट से हटेंगे? Congress ने Election Commission को लिखा पत्र, उठाए बड़े सवाल
Karnataka Pradesh Congress Committee ने राज्य के Chief Electoral Officer को ज्ञापन सौंपकर मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण के दौरान 80 लाख से अधिक मतदाताओं के संभावित नाम हटाए जाने पर चिंता जताई है।
Karnataka में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) को लेकर सियासी बहस तेज हो गई है। Karnataka Pradesh Congress Committee (KPCC) ने राज्य के Chief Electoral Officer (CEO) V. Anbukkumar को ज्ञापन सौंपकर आशंका जताई है कि यदि मौजूदा प्रक्रिया में पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गई तो लाखों वास्तविक मतदाता अपने संवैधानिक मतदान अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
पार्टी ने Election Commission of India से तत्काल हस्तक्षेप कर निष्पक्ष और पारदर्शी सत्यापन प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की है।
80 लाख मतदाताओं को लेकर जताई चिंता
KPCC की ओर से दिए गए ज्ञापन में दावा किया गया है कि विशेष पुनरीक्षण के दौरान राज्य के 80 लाख से अधिक मतदाताओं को “Absent”, “Shifted”, “Refused to Sign”, “Multiple Enrolments”, “ASDDO” और अन्य श्रेणियों में रखा गया है।
पार्टी का कहना है कि यह संख्या राज्य के कुल मतदाताओं का लगभग 15 प्रतिशत है। यदि इन मामलों की गहन जांच किए बिना नाम हटाए जाते हैं, तो बड़ी संख्या में पात्र मतदाता वोट देने के अधिकार से वंचित हो सकते हैं।
Congress ने रखीं कई अहम मांगें
Congress ने अपने ज्ञापन में कहा कि मतदाता सूची से डुप्लीकेट या अपात्र नाम हटाना जरूरी है, लेकिन प्रशासनिक त्रुटियों या अधूरे सत्यापन के कारण किसी वास्तविक मतदाता का नाम नहीं हटना चाहिए।
पार्टी ने Election Commission से मांग की कि जिन मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित या हटाए जाने योग्य श्रेणी में रखा गया है, उनका दोबारा भौतिक सत्यापन कराया जाए।
इसके अलावा यह भी मांग की गई कि केवल एक बार घर जाकर जांच करने या अधूरी जानकारी के आधार पर किसी मतदाता का नाम सूची से न हटाया जाए।
मतदाताओं को मिले अपना पक्ष रखने का मौका
KPCC ने कहा कि किसी भी मतदाता का नाम अंतिम रूप से हटाने से पहले उसे पर्याप्त नोटिस दिया जाए और अपना पक्ष रखने का उचित अवसर भी मिले।
पार्टी ने गांव, वार्ड और मतदान केंद्र स्तर पर सहायता केंद्र स्थापित करने की भी मांग की, ताकि नागरिक अपने दस्तावेजों में सुधार कर सकें और आवश्यक जानकारी समय पर जमा करा सकें।
पारदर्शिता बढ़ाने पर जोर
ज्ञापन में निर्वाचन आयोग से विधानसभा क्षेत्रवार और श्रेणीवार प्रस्तावित नाम हटाने के आंकड़े सार्वजनिक करने की मांग भी की गई है।
साथ ही Congress ने कहा कि मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को सत्यापन प्रक्रिया की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर आपत्तियां या समर्थन संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने की अनुमति दी जानी चाहिए।
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कमजोर वर्गों की सुरक्षा की मांग
KPCC ने विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों, महिलाओं, प्रवासी मजदूरों, दिहाड़ी श्रमिकों और छात्रों के हितों की रक्षा करने की अपील की। पार्टी का कहना है कि प्रक्रियागत कठिनाइयों के कारण इन वर्गों के वास्तविक मतदाता सूची से बाहर नहीं होने चाहिए।
गलत जानकारी फैलाने वालों पर कार्रवाई की मांग

Congress ने यह आरोप भी लगाया कि कुछ व्यक्ति और राजनीतिक संगठन SIR प्रक्रिया को लेकर भ्रामक जानकारी फैला रहे हैं, जिससे लोग मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में भाग लेने से हिचक सकते हैं।
पार्टी ने Election Commission of India से आग्रह किया कि वह जनता के बीच स्पष्ट जानकारी जारी करे और यदि कोई जानबूझकर गलत सूचना फैलाता पाया जाता है तो उसके खिलाफ Representation of the People Act, 1950 और Registration of Electors Rules, 1960 के तहत कार्रवाई की जाए।
अपने ज्ञापन में KPCC ने Article 324 of the Constitution of India का हवाला देते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग की संवैधानिक जिम्मेदारी है कि वह सटीक, समावेशी और त्रुटिरहित मतदाता सूची सुनिश्चित करे, ताकि प्रत्येक पात्र नागरिक का लोकतांत्रिक अधिकार सुरक्षित रह सके।
