Connect with us

India News

Western Ghats को मिलेगा नया संरक्षण दर्जा… फिर भी Kerala और Karnataka क्यों जता रहे हैं आपत्ति?

केंद्र सरकार Western Ghats के बड़े हिस्सों को Eco-Sensitive Area घोषित करने की तैयारी में है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय हितों के बीच संतुलन को लेकर विवाद अभी भी जारी है।

Published

on

Dainik Diary Zaid 26 1
Western Ghats के बड़े हिस्सों को Eco-Sensitive Area घोषित करने की तैयारी के बीच कई राज्यों में बहस तेज हो गई है।

भारत के सबसे महत्वपूर्ण प्राकृतिक क्षेत्रों में गिने जाने वाले Western Ghats को लेकर केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। रिपोर्ट्स के अनुसार, Gujarat, Goa और Maharashtra में फैले Western Ghats के कई हिस्सों को Eco-Sensitive Area (ESA) घोषित किया जा सकता है। इस पहल का उद्देश्य जैव विविधता से भरपूर इस क्षेत्र को अनियंत्रित विकास और पर्यावरणीय नुकसान से बचाना है।

Western Ghats को दुनिया के सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले क्षेत्रों में शामिल किया जाता है। यहां हजारों दुर्लभ पौधों, पक्षियों और वन्यजीवों की प्रजातियां पाई जाती हैं। यही कारण है कि पर्यावरणविद लंबे समय से इस क्षेत्र को विशेष संरक्षण देने की मांग करते रहे हैं।

और भी पढ़ें : Captain नहीं, फिर भी सबसे बड़ा Leader Mo Bobat ने बताया RCB में Virat Kohli की असली भूमिका

हालांकि इस प्रस्ताव को लेकर सभी राज्यों की राय एक जैसी नहीं है। जहां Gujarat, Goa और Maharashtra के कुछ हिस्सों में इस दिशा में प्रगति होती दिख रही है, वहीं Kerala और Karnataka ने कई मुद्दों पर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं।

इन राज्यों का कहना है कि यदि बड़े क्षेत्रों को Eco-Sensitive Area घोषित कर दिया जाता है, तो इसका असर स्थानीय लोगों की आजीविका, कृषि गतिविधियों और विकास परियोजनाओं पर पड़ सकता है। कई ग्रामीण समुदायों और किसानों को आशंका है कि नए नियमों के कारण भविष्य में निर्माण कार्य, खनन और अन्य आर्थिक गतिविधियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लग सकते हैं।

Dainik Diary Zaid 25 1


दूसरी ओर, पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि Western Ghats सिर्फ एक पर्वतीय क्षेत्र नहीं, बल्कि दक्षिण भारत के जल स्रोतों और पारिस्थितिकी तंत्र की रीढ़ है। यहां होने वाला पर्यावरणीय नुकसान दूर-दराज के क्षेत्रों में भी असर डाल सकता है। इसलिए दीर्घकालिक संरक्षण को प्राथमिकता देना आवश्यक है।

पिछले कुछ वर्षों में Western Ghats में भूस्खलन, बाढ़ और अत्यधिक वर्षा जैसी घटनाओं ने भी पर्यावरण संरक्षण पर बहस को तेज किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनियंत्रित निर्माण और प्राकृतिक संसाधनों के अत्यधिक दोहन से ऐसे जोखिम बढ़ सकते हैं।

अब केंद्र सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय विकास के बीच संतुलन बनाने की है। यदि राज्यों और केंद्र के बीच सहमति बनती है, तो यह कदम भारत की पर्यावरण नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकता है।

फिलहाल सभी की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले महीनों में Western Ghats को लेकर अंतिम निर्णय क्या होता है और क्या Kerala तथा Karnataka की चिंताओं का कोई समाधान निकल पाता है।

Continue Reading
Click to comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *