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मिडिल ईस्ट में युद्ध का गहरा असर: पर्यटन उद्योग को हर दिन 600 मिलियन डॉलर का नुकसान
ईरान‑इज़राइल संघर्ष ने न केवल राजनीति बदली है बल्कि गुल्फ देशों के पर्यटन को भी भारी आर्थिक चोट दी है — रोजाना अरबों का कारोबारी नुक़सान बढ़ रहा है।
मध्य पूर्व में बढ़ता हुआ ईरान‑इज़राइल युद्ध अब सिर्फ़ सैन्य और राजनैतिक संकट नहीं रह गया है, बल्कि विश्व के प्रमुख पर्यटन केंद्रों के लिए भारी आर्थिक संकट बन चुका है। युद्ध की भूमिका से प्रभावित देशों के पर्यटन उद्योग को हर दिन लगभग 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी करीब 5000 करोड़ रुपए से अधिक का नुकसान हो रहा है।
विशेषज्ञों के अनुसार इस जंग के कारण अन्तरराष्ट्रीय यात्रा योजनाओं में भारी गिरावट आई है। यात्रियों की सुरक्षा चिंताओं, विमान मार्गों के बंद होने और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी में बाधा के कारण हवाई यात्रा में भारी रुकावटें आई हैं। इसी वजह से सऊदी अरब, यूएई, कतर, बहरीन और ओमान जैसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों की ओर आने वाले यात्रियों की संख्या में गिरावट दर्ज की जा रही है।
गुल्फ क्षेत्र के देशों की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की हिस्सेदारी काफी महत्वपूर्ण है। विश्लेषकों का कहना है कि अगर यह संघर्ष लंबे समय तक चलता है, तो न केवल स्थानीय होटल, रिसॉर्ट और यात्रा‑संबंधी व्यवसाय प्रभावित होंगे, बल्कि वैश्विक पर्यटन नेटवर्क पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा।
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युद्ध के कारण अब कई एयरलाइनों ने रूट में बदलाव किए हैं और कुछ ने यात्राएँ ही रोक दी हैं। ऐसे में विमान किराए बढ़े हैं और यात्री अपनी अगली छुट्टियों के लिए अन्य स्थलों की ओर रुख कर रहे हैं — उदाहरण के तौर पर यूरोप, कैरिबियन और दक्षिण पूर्व एशिया के पर्यटन स्थलों की मांग अचानक बढ़ गई है।
दुबई और अबू धाबी जैसे पर्यटन हब जो पहले शॉपिंग, लग्ज़री और सांस्कृतिक पर्यटन का केंद्र थे, अब युद्ध के डर के कारण यात्रियों को आकर्षित नहीं कर पा रहे हैं। यूनाइटेड नेशंस समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने भी यात्रियों से मध्य पूर्व की यात्रा पर सावधानी बरतने की सलाह दी है।

इसके अलावा, कुछ देशों के पर्यटन उद्योगों में रोजगार संकट भी उभरने लगा है। होटल स्टाफ़, ट्रैवल गाइड्स, ट्रांसपोर्ट सेवाएँ और स्थानीय छोटे‑बड़े व्यवसाय युद्ध के कारण मंदी का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर जल्द शांति नहीं मिली तो इन नौकरियों पर संकट और गहरा सकता है।
भारत जैसे देशों की अर्थव्यवस्था पर भी इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव पढ़ रहा है। भारतीय पर्यटक पारंपरिक रूप से यूएई, सउदी अरब और कतर जैसे दशाों में छुट्टियों के लिए जाते हैं, लेकिन मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के कारण अब पाँच लाख से अधिक भारतीय यात्रियों ने अपनी यात्रा योजनाएँ बदल दी हैं या रद्द कर दी हैं जिससे स्थानीय ट्रैवल एजेंसियों और एयरलाइनों को भी नुक़सान उठाना पड़ रहा है।
विश्लेषकों का मानना है कि विश्व पर्यटन उद्योग की क्षमता अपने पुराने ज़ेनिथ पर लौट सकती है, परन्तु इसके लिए मध्य पूर्व में स्थिरता और सुरक्षा की बहाली आवश्यक है। अगर शांति वापस आती है तो पर्यटन फिर से प्रगति कर सकता है, लेकिन उसके लिए समय और विश्वस्तर पर सहयोग की ज़रूरत होगी।
