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पश्चिम एशिया संकट पर PM Modi का बड़ा बयान — ईरान, इजरायल और अमेरिका तीनों से है भारत का संपर्क

खाड़ी देशों में रह रहे एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा से लेकर तेल संकट तक — राज्यसभा में PM Modi ने खोले सारे पत्ते।

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PM Modi का बड़ा बयान: पश्चिम एशिया युद्ध में Iran-Israel-US से संपर्क, एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता
राज्यसभा में PM Narendra Modi ने पश्चिम एशिया संकट पर दिया बयान — Iran, Israel और US से संपर्क में है भारत, एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता।

पश्चिम एशिया में जारी युद्ध अब सिर्फ उस क्षेत्र की समस्या नहीं रही। इसकी आँच पूरी दुनिया तक पहुँच रही है — और भारत भी इससे अछूता नहीं है। मंगलवार को राज्यसभा में प्रधानमंत्री Narendra Modi ने इस पूरे संकट पर खुलकर बात की और देश को बताया कि भारत सरकार इस नाज़ुक स्थिति में क्या कदम उठा रही है।

तीन देशों से एक साथ संपर्क में है भारत

PM Modi ने स्पष्ट किया कि भारत इस वक्त Iran, Israel और United States — तीनों से एक साथ संवाद बनाए हुए है। यह कूटनीतिक संतुलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की परंपरागत विदेश नीति हमेशा से “सबसे दोस्ती, किसी की दुश्मनी नहीं” की रही है।

PM ने कहा, “हमारा लक्ष्य तनाव कम करना है। Strait of Hormuz को खुला रखना हमारी प्राथमिकता है।” यह जलमार्ग दुनिया के सबसे व्यस्त तेल परिवहन रास्तों में से एक है। अगर यह बंद हो जाए, तो वैश्विक ऊर्जा बाज़ार में भूचाल आ सकता है — और भारत जैसे देश, जो अपनी ऊर्जा ज़रूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर हैं, सबसे ज़्यादा प्रभावित होंगे।

एक करोड़ भारतीयों की सुरक्षा — सरकार की बड़ी चिंता

Gulf countries में लगभग एक करोड़ भारतीय रहते और काम करते हैं। Saudi Arabia, UAE, Kuwait, Qatar — इन देशों में बसे भारतीय हर साल अरबों रुपए की विदेशी मुद्रा भारत भेजते हैं। इन परिवारों की चिंता सिर्फ उनके अपनों तक सीमित नहीं — यह भारत की अर्थव्यवस्था से भी जुड़ी है।

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PM Modi ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक 3,72,000 से ज़्यादा भारतीय सुरक्षित वापस लौट चुके हैं। अकेले Iran से ही 1,000 से अधिक भारतीय स्वदेश लौटे हैं। यह आँकड़ा छोटा नहीं है — यह उस विशाल ऑपरेशन की झलक है जो सरकार पर्दे के पीछे चला रही है।

यह याद दिलाता है 2006 के Lebanon War का वह दौर, जब भारत ने “Operation Sukoon” के तहत हज़ारों भारतीयों को युद्धग्रस्त लेबनान से निकाला था। संकट की घड़ी में भारत की निकासी क्षमता हमेशा से अपने आप में एक मिसाल रही है।

पेट्रोल, डीजल, गैस और खाद — सब पर मंडरा रहा है खतरा

PM ने राज्यसभा में साफ कहा कि यह युद्ध दुनिया में एक गंभीर ऊर्जा संकट पैदा कर रहा है। भारत के लिए तेल और गैस की आपूर्ति के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। पेट्रोल, डीजल, रसोई गैस और यहाँ तक कि खेती के लिए ज़रूरी खाद तक की आपूर्ति पर असर पड़ रहा है।

यह सुनने में तकनीकी लग सकता है, लेकिन इसका सीधा असर उस किसान पर पड़ता है जो रबी की फसल के लिए खाद का इंतज़ार कर रहा है, उस ट्रक चालक पर जो बढ़ते डीजल दामों की मार झेल रहा है, और उस मध्यमवर्गीय परिवार पर जो हर महीने रसोई गैस सिलेंडर के बिल से जूझता है।

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53 लाख मीट्रिक टन का तेल भंडार — भारत की तैयारी

PM Modi ने बताया कि पिछले 11 वर्षों में भारत ने 53 लाख मीट्रिक टन का सामरिक तेल भंडार तैयार किया है। इसके अलावा, अतिरिक्त 65 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता बनाने का काम जारी है। यह Strategic Petroleum Reserve उस वक्त काम आता है जब वैश्विक बाज़ार में तेल की आपूर्ति अचानक बाधित हो जाती है।

तुलना के लिए — United States का Strategic Petroleum Reserve दुनिया का सबसे बड़ा आपातकालीन तेल भंडार माना जाता है। भारत भी अब इसी दिशा में मज़बूती से कदम बढ़ा रहा है।

जहाज़ निर्माण में 70,000 करोड़ का दाँव — आत्मनिर्भरता की ओर

PM ने एक और अहम घोषणा की — सरकार ने घरेलू जहाज़ निर्माण उद्योग को बढ़ावा देने के लिए 70,000 करोड़ रुपए की योजना बनाई है। युद्ध के दौरान अपने जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करना और विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भरता कम करना — यही इस पहल का मूल उद्देश्य है।

PM ने सीधे कहा — “भारत के पास आत्मनिर्भर होने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।” यह बात सिर्फ राजनीतिक नारा नहीं, बल्कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों की माँग है।

शांति की अपील, लेकिन तैयारी भी पूरी

PM Modi का यह भाषण एक संदेश देता है — भारत न किसी के पक्ष में है, न किसी के विपक्ष में। लेकिन भारत की ज़िम्मेदारी अपने नागरिकों के प्रति, अपनी अर्थव्यवस्था के प्रति और अपनी ऊर्जा सुरक्षा के प्रति सर्वोपरि है।

PM ने कहा, “किसी भी इंसान की जान को खतरा मानवता के हित में नहीं है। इसीलिए भारत लगातार सभी पक्षों को शांतिपूर्ण समाधान की ओर प्रेरित कर रहा है।” यह वही परंपरा है जो कभी Jawaharlal Nehru ने Non-Aligned Movement के ज़रिए दुनिया के सामने रखी थी — भारत की आवाज़ तटस्थ, लेकिन मज़बूत।

पश्चिम एशिया में आग जब तक बुझती नहीं, भारत की यह कूटनीतिक कसरत जारी रहेगी — और करोड़ों भारतीय परिवार उम्मीद लगाए बैठे रहेंगे कि उनके अपने सुरक्षित घर लौट आएँ।

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