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‘Airport का Samosa’ से ‘Paternity Leave’ तक — Raghav Chadha ने Parliament में उठाए वो 7 मुद्दे जो आपकी ज़िंदगी से सीधे जुड़े हैं
AAP ने इन्हें ‘Soft PR’ कहकर नज़रअंदाज़ किया, लेकिन Raghav Chadha का कहना है कि यही असली मुद्दे हैं जो आम आदमी रोज़ झेलता है — और Parliament में इन्हें उठाना उनका हक था।
Politics में अक्सर वो मुद्दे सुर्खियाँ बटोरते हैं जो बड़े, शोरगुल भरे और टकराव वाले हों। लेकिन Raghav Chadha ने Rajya Sabha में कुछ अलग करने की कोशिश की — उन्होंने उन छोटी-छोटी तकलीफों को आवाज़ दी जो हर आम इंसान रोज़ महसूस करता है, लेकिन जिनके बारे में कोई नेता बात नहीं करता।
नतीजा? Aam Aadmi Party (AAP) ने उन्हें Rajya Sabha Deputy Leader के पद से हटा दिया। Party के Delhi Unit Chief Saurabh Bharadwaj ने उन पर आरोप लगाया कि वो Parliament में Prime Minister Narendra Modi और BJP-led केंद्र सरकार के खिलाफ कड़े सवाल नहीं उठाते — बल्कि “Soft PR” करते हैं।
Chadha का जवाब था — “क्या मैंने कोई अपराध किया है?” उन्होंने कहा कि उन्हें “चुप करा दिया गया।”
आइए एक नज़र डालते हैं उन 7 मुद्दों पर जो Raghav Chadha ने Parliament में उठाए — और जो शायद आपकी ज़िंदगी से भी जुड़े हों।
1. Paternity Leave — बाप को भी हक चाहिए
Chadha ने Parliament में माँग की कि India में Paternity Leave को कानूनी अधिकार बनाया जाए। उन्होंने कहा, “एक बाप को अपने नवजात बच्चे की देखभाल और नौकरी के बीच चुनाव नहीं करना चाहिए। और एक माँ को बिना अपने पति के सहारे के Childbirth से नहीं गुज़रना चाहिए।” उनका मानना है कि Caregiving सिर्फ माँ की ज़िम्मेदारी नहीं — यह साझा ज़िम्मेदारी है।
2. Traffic का दर्द — शहर बन गए Parking Lots
Bengaluru, Mumbai, Delhi और Chennai जैसे Metro Cities का हाल किसी से छुपा नहीं है। Chadha ने Parliament में बताया कि इन शहरों के लोग साल में 100 से 168 घंटे सिर्फ Traffic में बर्बाद करते हैं। उन्होंने एक “National Urban Decongestion Mission” की माँग की — जिसमें बेहतर Public Transport, Smart Traffic Systems और Scientific Parking Policy शामिल हो।
3. Prepaid Recharge का ’28-दिन वाला जुगाड़’
यह मुद्दा लगभग हर Smartphone User को सीधे छूता है। Chadha ने कहा कि Telecom Companies अपने Plans को “Monthly” बताती हैं — लेकिन वो सिर्फ 28 दिन के होते हैं। मतलब साल में आप 13 Recharges करते हैं, 12 नहीं।
इसके अलावा उन्होंने Daily Data Limit वाले Plans पर भी सवाल उठाया। “आपने 2GB के पैसे दिए, रात को 0.5GB बच गया — और वो उड़ गया। कोई Refund नहीं, कोई Rollover नहीं। यह गलती नहीं, यह Policy है।” उन्होंने माँग की कि Unused Data आगे Carry Forward होना चाहिए।
4. Menstrual Health — यह Sympathy नहीं, Rights की बात है
Chadha ने Parliament में Menstrual Health की बात उठाई — और बेबाकी से कही। उन्होंने कहा, “जब एक लड़की School इसलिए Miss करती है क्योंकि वहाँ न Pad है, न पानी, न Dustbin, न Privacy — तो यह उसकी Personal Problem नहीं है। यह हमारे System की नाकामी है।” उन्होंने साफ कहा, “महिलाओं को Sympathy नहीं, Rights चाहिए।”
5. Airport का Samosa — और Udaan Yatri Cafe
यही वो मुद्दा है जिस पर AAP नेताओं ने Chadha का सबसे ज़्यादा मज़ाक उड़ाया। लेकिन सच यह है कि Airport पर खाने की कीमतें हर आम यात्री की जेब पर भारी पड़ती हैं।
Chadha ने Parliament में इस पर आवाज़ उठाई और सरकार की Udaan Yatri Cafe Initiative का स्वागत करते हुए इसकी कमियाँ भी गिनाईं — कि ये Cafes बहुत कम Airports पर हैं और Security Area के बाहर हैं। कुछ दिनों बाद Ministry of Civil Aviation ने इसके विस्तार का ऐलान कर दिया।
30 March को Chadha ने खुद Mumbai Airport के Udaan Yatri Cafe पर जाकर सिर्फ ₹10 में Chai पी और कहा — “Affordable Airport Food मुमकिन है। और यह इसका सबूत है।”

6. Right to Recall — नेता को Vote से चुना, तो हटाया भी जा सके
Chadha ने एक बड़े Political Reform की बात की — Right to Recall। उनका कहना था, “अगर Voters किसी नेता को चुन सकते हैं, तो उन्हें हटाने का हक भी होना चाहिए।” उन्होंने कहा कि पाँच साल बहुत लंबा इंतज़ार है जवाबदेही के लिए — और दुनिया के कई Democracies में यह व्यवस्था पहले से मौजूद है।
7. Gig Workers — 10 मिनट Delivery के पीछे एक इंसान है
Zomato, Swiggy और दूसरी Delivery Apps पर काम करने वाले लाखों Gig Workers की तकलीफ को Chadha ने Parliament तक पहुँचाया। उन्होंने खुद एक Delivery Worker के साथ पूरा दिन बिताया — उनकी दिनचर्या, उनकी थकान और उनकी माँगों को समझा। उन्होंने Fair Wages, Humane Working Hours और 10-Minute Delivery जैसे Ultra-Fast Pressure को हटाने की माँग की।
तो क्या यह सच में ‘Soft PR’ था?
यह सवाल अब जनता पर छोड़ दीजिए। Paternity Leave, Telecom Scam, Menstrual Health, Gig Workers — क्या ये मुद्दे “Soft” हैं? या फिर यही असली ज़िंदगी है जो Parliament की चारदीवारी में कम ही सुनाई देती है?
AAP और Raghav Chadha के बीच की यह खींचतान जो भी हो — लेकिन इन 7 मुद्दों ने यह ज़रूर साबित किया कि कभी-कभी “छोटे” मुद्दे ही सबसे बड़े होते हैं।
