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S Sreesanth Insurance विवाद Rajasthan Royals और Insurance Company Supreme Court में आमने-सामने
2012 IPL सीज़न से जुड़ा S Sreesanth Insurance विवाद अब Supreme Court तक पहुंचा Rajasthan Royals और United India Insurance के बीच बड़ी जंग
भारतीय क्रिकेट के सबसे चर्चित खिलाड़ियों में शुमार एस श्रीसंत एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं। लेकिन इस बार वजह कोई गेंदबाज़ी का रिकॉर्ड या मैदान पर विवाद नहीं, बल्कि एक पुराना Insurance Claim Case है।
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मामला कहाँ से शुरू हुआ?
साल 2012 में Rajasthan Royals ने अपने स्टार गेंदबाज़ श्रीसंत के लिए एक विशेष बीमा पॉलिसी ली थी। लेकिन सीज़न शुरू होने के साथ ही जयपुर में एक प्रैक्टिस मैच के दौरान उन्हें गंभीर घुटने की चोट (Knee Injury) लगी और वे पूरे सीज़न से बाहर हो गए। इसके बाद फ्रेंचाइज़ी ने लगभग 82 लाख का इंश्योरेंस क्लेम किया।
बीमा कंपनी United India Insurance ने इस क्लेम को ठुकरा दिया। उनका तर्क था कि श्रीसंत पहले से ही 2011 में Toe Injury से जूझ रहे थे और इस जानकारी को छिपाया गया।
Rajasthan Royals का तर्क
रॉयल्स ने कहा कि toe injury के बावजूद श्रीसंत खेलते रहे थे और 2012 में उन्हें बाहर करने का कारण केवल नई knee injury थी। उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट और फिटनेस सर्टिफिकेट पेश कर यह साबित करने की कोशिश की कि टीम के साथ पारदर्शिता बरती गई थी।
NCDRC और अब Supreme Court
यह मामला पहले National Consumer Disputes Redressal Commission (NCDRC) पहुँचा, जहाँ Rajasthan Royals के पक्ष में निर्णय दिया गया और बीमा कंपनी को भुगतान करने का आदेश दिया गया। लेकिन United India Insurance ने इसे Supreme Court में चुनौती दे दी।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता शामिल थे, ने सुनवाई में पूछा कि toe injury का खुलासा पॉलिसी लेते समय किया गया था या नहीं। कोर्ट ने यह भी कहा कि अगर कंपनी को चोट की जानकारी थी तो बीमा नहीं करना चाहिए था या फिर प्रीमियम ज़्यादा लेना चाहिए था।
कोर्ट में पेश हुए तर्क
- Additional Solicitor General ऐश्वर्या भाटी ने बीमा कंपनी की ओर से तर्क दिया कि toe injury छुपाई गई थी।
- वहीं, सीनियर एडवोकेट नीरज किशन कौल ने Rajasthan Royals की ओर से कहा कि toe injury खेल में बाधा नहीं थी, बल्कि knee injury ही असली कारण थी।
क्यों अहम है यह विवाद?
यह विवाद सिर्फ एक खिलाड़ी या टीम का नहीं है। यह पूरे भारतीय खेल जगत के लिए स्पोर्ट्स इंश्योरेंस की पारदर्शिता और खिलाड़ियों के अधिकारों को लेकर एक मिसाल बनेगा।
क्रिकेट प्रेमियों के लिए यह मामला 2012 IPL की यादें ताज़ा कर रहा है। बहुत से लोग सोच रहे हैं कि अगर श्रीसंत उस सीज़न में खेलते तो शायद राजस्थान की किस्मत कुछ और होती।
अब नज़रें सुप्रीम कोर्ट के फ़ैसले पर टिकी हैं। यह निर्णय न सिर्फ Rajasthan Royals और United India Insurance के लिए अहम होगा बल्कि आने वाले समय में खिलाड़ियों और फ्रेंचाइज़ियों के बीच होने वाली बीमा नीतियों के लिए भी दिशा तय करेगा।
