Entertainment
आज के Bollywood filmmakers नकलची हैं, original सोच नाम की कोई चीज़ बची नहीं Shekhar Suman का बड़ा बयान
“आज के Bollywood filmmakers नकलची हैं, original सोच नाम की कोई चीज़ बची नहीं” — Shekhar Suman का बड़ा बयान
कुछ लोग होते हैं जो बरसों बाद भी उतनी ही बेबाकी से बोलते हैं जितनी जवानी में बोलते थे। Shekhar Suman उन्हीं में से एक हैं। 62 साल की उम्र में, चार दशकों के करियर के बाद, उन्होंने Bollywood के मौजूदा हालात पर जो कहा — वो industry के बहुत से लोग सोचते हैं, लेकिन कहने की हिम्मत कम ही रखते हैं।
21 साल की उम्र, Bombay के 15 दिन — और Rekha के साथ debut
1983 की बात है। एक 21 साल का लड़का सपने लेकर Bombay पहुँचा था। नाम था Shekhar Suman। और किस्मत ऐसी कि महज़ 15 दिनों में उन्हें Girish Karnad की arthouse film Utsav में lead role मिल गया — वो भी Rekha, Shashi Kapoor, Amjad Khan, Anupam Kher और Neena Gupta जैसे दिग्गजों के साथ।
Shekhar खुद कहते हैं — “मैं बस किस्मत वाला था। एक चीज़ होती है — destiny। आप सही project का हिस्सा बनो, सही मौका मिले। मैं Bombay आया और 15 दिनों में Rekha जी के opposite hero चुन लिया गया।”
दो महीने में shooting शुरू, Utsav रिलीज़ हुई और फिर Nache Mayuri, Sansar, Tridev जैसी फिल्में आईं।
जब films कम हुईं तो Television ने गले लगाया
90 के दशक में जब film roles कम होने लगे, Shekhar ने television की तरफ रुख किया। और यहाँ भी destiny ने साथ दिया। Jaya Bachchan ने उन्हें Dekh Bhai Dekh के लिए चुना, Vinod Pandey ने Reporter के लिए — दोनों शो ज़बरदस्त hit रहे।
फिर आया वो दौर जिसने Shekhar Suman को घर-घर में पहचान दिलाई — Movers & Shakers। India का पहला Hindi late-night talk show। वो वक्त था जब television पर इस तरह की बेबाक बातचीत नई थी, ताज़ी थी — और Shekhar उसके चेहरे बने।
और भी पढ़ें : जब मोटी थी तो Fit होने को कहा, अब Fit हूँ तो कहते हैं पहले वाली अच्छी थी Keerthy Suresh का Body Shaming पर दमदार जवाब
“आज के filmmakers plagiarists हैं — formula के गुलाम”
लेकिन जब बात आज के Bollywood की आई, तो Shekhar Suman का लहजा बदल गया। उन्होंने साफ कहा कि आज के filmmakers original thinkers नहीं हैं — वो plagiarists हैं, formula पर dependent हैं।
यह बयान हल्का नहीं है। यह उस इंसान की बात है जिसने Utsav जैसी arthouse film से शुरुआत की और Heeramandi जैसे ambitious project में वापसी की। जिसने दोनों दौर देखे हैं — जब filmmakers risk लेते थे, और अब जब वो safe खेलते हैं।

जब Anurag Kashyap जैसे directors को struggle करना पड़ता है और remake पर remake आती रहती है — तो Shekhar के इस बयान में सच्चाई की गूँज सुनाई देती है।
Heeramandi से हुई वापसी — और अभी बहुत कुछ बाकी है
कई साल camera से दूर रहने के बाद Shekhar Suman ने Sanjay Leela Bhansali की Heeramandi से fiction में वापसी की। और यह वापसी उन्होंने ऐसे project से की जो formula से बिल्कुल अलग था।
शायद यही उनका जवाब है उस industry को — जो formula की गुलाम हो गई है।
62 साल में यह बेबाकी, यह हौसला — यही Shekhar Suman को भीड़ से अलग करता है।
