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Supreme Court ने दी Passive Euthanasia की इजाज़त — 10 साल से Coma में पड़े Harish Rana को मिलेगी ‘सम्मान की मौत’

India में पहली बार ऐसा ऐतिहासिक फैसला — AIIMS में होगी Life Support वापसी, Court ने कहा — सवाल मौत का नहीं, सम्मान का है

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Supreme Court ने दी Passive Euthanasia की इजाज़त — 10 साल Coma में रहे Harish Rana का ऐतिहासिक मामला | Dainik Diary
Supreme Court of India — Justices JB Pardiwala और KV Viswanathan की Bench ने India में पहली बार Passive Euthanasia की अनुमति देते हुए ऐतिहासिक फैसला सुनाया।

भारत के न्यायिक इतिहास में बुधवार का दिन एक ऐसे फैसले के लिए याद किया जाएगा जो कानून, इंसानियत और परिवार की पीड़ा — तीनों के चौराहे पर खड़ा है। Supreme Court ने एक ऐसे 31 वर्षीय युवक के लिए Passive Euthanasia की अनुमति दे दी जो पिछले एक दशक से भी अधिक समय से Permanent Vegetative State में है। यह India में इस तरह का पहला न्यायिक आदेश है।

कौन हैं Harish Rana?

Uttar Pradesh के Ghaziabad निवासी Harish Rana कभी Panjab University के एक साधारण छात्र थे। 2013 में एक हादसे में वे अपने Paying Guest Accommodation की चौथी मंजिल से गिर गए। इस दुर्घटना में उन्हें गंभीर सिर की चोटें आईं और तब से वे पूरी तरह बेहोश और Bedridden हैं। खाने-पीने के लिए Feeding Tube पर निर्भर Harish न तो Mechanical Ventilator पर हैं, लेकिन 24 घंटे देखभाल के बिना वे जी नहीं सकते। दस से अधिक सालों में उनकी न्यूरोलॉजिकल स्थिति में रत्तीभर सुधार नहीं आया।

माँ-बाप का दिल टूटता रहा, Court का दरवाजा खटखटाया

वर्षों तक इलाज और Therapy कराने के बाद Harish के माता-पिता इस नतीजे पर पहुँचे कि चिकित्सा विज्ञान उनके बेटे को वापस नहीं ला सकता। लगातार Medical Intervention सिर्फ उसकी तकलीफ बढ़ा रही है। उन्होंने Supreme Court में अर्जी दी कि उनके बेटे को Life-Sustaining Treatment से मुक्ति दिलाई जाए। Court ने इस मामले में गहराई से सुनवाई की और Harish के परिवार से भी व्यक्तिगत रूप से बात की। परिवार के हर सदस्य — माता-पिता और छोटे भाई — ने एकमत से यही माँग रखी।

AIIMS की रिपोर्ट ने बदल दिया सब

Court ने पहले Ghaziabad और Meerut के डॉक्टरों की एक Primary Medical Board बनाई जिसने पाया कि Harish को 100% Disability Quadriplegia है और उनके ठीक होने की संभावना नगण्य है। इसके बाद 16 दिसंबर को AIIMS Delhi की Secondary Medical Board ने भी Report दी कि उनकी स्थिति Irreversible यानी पूरी तरह अपरिवर्तनीय है।

Court का ऐतिहासिक फैसला

Justices JB Pardiwala और KV Viswanathan की Bench ने अलग-अलग लेकिन एकमत विचार देते हुए कहा कि Harish की Clinically Assisted Nutrition and Hydration यानी CANH वापस ली जाए। यह प्रक्रिया AIIMS Delhi के Palliative Care Unit में Strict Medical Supervision में होगी।

Court ने एक बेहद अहम बात कही — “सवाल यह नहीं है कि मरीज को मरना चाहिए या नहीं। सवाल यह है कि क्या ऐसी परिस्थितियों में जहाँ ठीक होना Medical रूप से असंभव है, जीवन को कृत्रिम रूप से लंबा खींचते रहना उचित है?”

Court ने यह भी कहा कि CANH कोई साधारण देखभाल नहीं है — यह एक Technological Medical Intervention है। इसलिए Medical Boards को इसे वापस लेने का अधिकार है।

मौत नहीं — सम्मान

Supreme Court ने दी Passive Euthanasia की इजाज़त — 10 साल Coma में रहे Harish Rana का ऐतिहासिक मामला | Dainik Diary


Court ने स्पष्ट किया कि Life Support वापस लेना मरीज को छोड़ देना नहीं है। “यह एक ऐसी प्रक्रिया होनी चाहिए जो दर्द को कम करे और सम्मान सुनिश्चित करे।” Court ने यह भी कहा कि जरूरी नहीं कि End-of-Life Care हमेशा Hospital में ही हो — यह घर पर भी किया जा सकता है।

इस मामले में Court ने 2018 के Common Cause Judgment — जिसमें सम्मान के साथ मरने के अधिकार को मान्यता दी गई थी — में निर्धारित 30 दिन की प्रतीक्षा अवधि को भी माफ कर दिया, क्योंकि परिवार और दोनों Medical Boards सभी एकमत थे।

सरकार से कानून बनाने की अपील

Court ने केंद्र सरकार से आग्रह किया कि वह Passive Euthanasia पर एक स्पष्ट कानून बनाए। Bench ने कहा कि इस क्षेत्र में अभी एक “Legislative Vacuum” है जिसे भरना जरूरी है। साथ ही यह भी निर्देश दिया कि जिला-स्तर पर Chief Medical Officers Medical Experts के Panel तैयार करें ताकि भविष्य में इस तरह के मामलों में Passive Euthanasia की अर्जियों पर सुव्यवस्थित तरीके से विचार हो सके।

एक परिवार की 12 साल की पीड़ा

इस पूरे मामले को कानूनी और चिकित्सकीय नजरिए से देखना आसान है, लेकिन उस परिवार की पीड़ा को शब्दों में बयान करना मुश्किल है जिसने 12 साल तक अपने बेटे को उस हालत में देखा। Court ने खुद कहा कि Harish के परिवार ने जो वेदना व्यक्त की, वह गहरी और वास्तविक थी। यह फैसला उस परिवार को राहत तो देगा, लेकिन एक खालीपन भी छोड़ेगा जो शायद कभी नहीं भरेगा।

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