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यूपी की सियासत में नया दांव: महिला चेहरों के सहारे SP का PDA मिशन तेज
बीजेपी के OBC वोटबैंक में सेंध लगाने की तैयारी, राजभर-निषाद-कुर्मी समीकरण पर नजर
उत्तर प्रदेश की राजनीति में चुनाव से पहले हलचल तेज हो चुकी है। इस बार मुकाबला सिर्फ रैलियों और वादों का नहीं, बल्कि रणनीति और सामाजिक समीकरणों का भी है। इसी कड़ी में Samajwadi Party (SP) ने एक नया दांव खेला है—महिला नेतृत्व के जरिए PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) को मजबूत करना।
पिछले कुछ वर्षों में Bharatiya Janata Party (BJP) ने गैर-यादव OBC वोटबैंक को मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय सहयोगियों पर खास भरोसा किया है। इनमें Apna Dal (Sonelal), Suheldev Bharatiya Samaj Party और NISHAD Party शामिल हैं, जो क्रमशः कुर्मी, राजभर और निषाद समुदायों में अच्छी पकड़ रखते हैं।
अब SP इन समीकरणों को तोड़ने के लिए महिला चेहरों को आगे कर रही है। पार्टी का मानना है कि अगर महिलाओं के जरिए घर-घर तक पहुंच बनाई जाए, तो सामाजिक आधार को ज्यादा व्यापक बनाया जा सकता है। खासतौर पर पूर्वांचल के इलाकों में, जहां ये जातीय समूह निर्णायक भूमिका निभाते हैं, SP अपनी पकड़ मजबूत करने की कोशिश में है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यह रणनीति केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर असर डालने वाली हो सकती है। हाल ही में SP द्वारा विभिन्न पदों पर महिलाओं की नियुक्ति इसी दिशा में उठाया गया कदम माना जा रहा है।
दिलचस्प बात यह है कि जहां BJP अपने गठबंधन के जरिए सामाजिक संतुलन बनाए रखने की कोशिश कर रही है, वहीं SP सीधे उन वर्गों में अपनी पैठ बनाने का प्रयास कर रही है, जो अब तक NDA के साथ जुड़े रहे हैं।
आने वाले विधानसभा चुनाव में यह देखना दिलचस्प होगा कि SP की यह नई रणनीति कितनी कारगर साबित होती है। क्या महिला नेतृत्व के सहारे PDA समीकरण बीजेपी के मजबूत किले में सेंध लगा पाएगा, या फिर मौजूदा समीकरण ही कायम रहेंगे—इसका जवाब चुनावी नतीजे ही देंगे।
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