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शुभमन गिल और गौतम गंभीर को अनिल कुंबले की सख्त सलाह – नितीश रेड्डी को टीम में बनाए रखें

लॉर्ड्स टेस्ट में नितीश कुमार रेड्डी की गेंदबाज़ी से प्रभावित हुए पूर्व कप्तान, बोले- ‘ऐसे खिलाड़ी ही बदलते हैं मैच का रुख।’

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अनिल कुंबले की सलाह: नितीश रेड्डी को टीम में टिकाकर रखें शुभमन गिल से उम्मीदें

भारत और इंग्लैंड के बीच खेले जा रहे लॉर्ड्स टेस्ट में एक युवा चेहरे ने सबका ध्यान खींचा है – नितीश कुमार रेड्डी। इस होनहार ऑलराउंडर ने अपनी सधी हुई गेंदबाज़ी से न सिर्फ इंग्लैंड की सलामी जोड़ी को पवेलियन भेजा, बल्कि पूर्व दिग्गजों का दिल भी जीत लिया।

अनिल कुंबले, भारत के पूर्व कप्तान और स्पिन दिग्गज, ने जियोहॉटस्टार पर चर्चा करते हुए शुभमन गिल और कोच गौतम गंभीर को खुलकर सलाह दी कि “नितीश जैसे खिलाड़ी को टीम में टिकाकर रखें, बार-बार बदलाव करना नुकसानदायक हो सकता है।”

द लॉर्ड्स की हरियाली पर चमके रेड्डी
‘द टैलेंटेड ऑलराउंडर’ को पहली बार नई गेंद से मौका मिला और उन्होंने तीसरे ओवर में ही बेन डकेट और जैक क्रॉली जैसे बल्लेबाज़ों को चलता कर दिया। गिल ने उन्हें 14वें ओवर में गेंदबाज़ी के लिए लगाया और रेड्डी ने पहले ही ओवर में कमाल कर दिखाया।

द ‘सीनियर लेगेंड’ ने किया पूरा विश्लेषण
अनिल कुंबले ने कहा – “रेड्डी की गेंदबाज़ी अनुशासित थी। डकेट का विकेट भले ही लेग साइड का कैच रहा, लेकिन क्रॉली को जो गेंद डाली, वह टेस्ट मैच की क्लासिक डिलीवरी थी। उसके बाद ध्रुव जुरेल का शानदार कैच भी मैच का टर्निंग पॉइंट बन गया।”

उन्होंने आगे कहा, “रेड्डी ने एक ही स्पैल में करीब 14 ओवर फेंके। यह फिटनेस और नियंत्रण का बड़ा संकेत है। साथ ही, वह एक शतकवीर बल्लेबाज़ और शानदार फील्डर भी हैं।”

बुमराह को नहीं रोक सकता कोई – कुंबले
कुंबले ने यह भी जोड़ा कि जसप्रीत बुमराह का खेल में होना ही विपक्ष के लिए एक मनोवैज्ञानिक दबाव है। वह हर पारी में कुछ ना कुछ कमाल कर जाते हैं।”

दूसरे दिन की रणनीति पर कुंबले की भविष्यवाणी
कुंबले ने कहा कि “अगर भारत इंग्लैंड को 300 रन के भीतर रोक देता है, तो वह पहले इनिंग में गेम में बना रहेगा। खासकर अगर नई गेंद से सुबह जल्दी विकेट मिले, तो मैच का रुख पलट सकता है।”

टीम इंडिया के लिए संकेत
यह बात स्पष्ट है कि टीम इंडिया को स्थिरता की आवश्यकता है, और नितीश कुमार रेड्डी जैसे युवा खिलाड़ियों को लगातार मौका देना समय की मांग है। बार-बार बदलाव की नीति ने पहले भी भारत को नुकसान पहुंचाया है, और जैसा कि कुंबले ने कहा – “पर्सिस्ट करना ही समाधान है।”

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