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ऑफिस जॉब से ज़्यादा कमाते हैं डिलीवरी पार्टनर? जोमैटो CEO के बयान ने छेड़ी नई बहस
डिलीवरी बॉय की कमाई को लेकर जोमैटो CEO ने बताया पूरा गणित, सोशल मीडिया पर छिड़ी नौकरी बनाम गिग वर्क की चर्चा।
भारत में नौकरी की परिभाषा तेज़ी से बदल रही है। एक समय था जब 9 से 5 की ऑफिस जॉब को सबसे सुरक्षित और सम्मानजनक करियर माना जाता था, लेकिन अब गिग इकॉनमी इस सोच को चुनौती दे रही है। इसी बीच जोमैटो के CEO के एक बयान ने लोगों को चौंका दिया है।
जोमैटो CEO का कहना है कि कई शहरों में डिलीवरी पार्टनर की कमाई एक सामान्य ऑफिस जॉब से ज़्यादा हो सकती है, बशर्ते काम के घंटे और ऑर्डर की संख्या सही हो।
क्या है डिलीवरी की कमाई का गणित?
CEO के मुताबिक,
- एक डिलीवरी पार्टनर अगर दिन में 8–10 घंटे काम करता है
- पीक टाइम (लंच और डिनर) में ज़्यादा ऑर्डर लेता है
- इंसेंटिव और बोनस का फायदा उठाता है
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तो उसकी मासिक कमाई कई एंट्री-लेवल ऑफिस जॉब से बेहतर हो सकती है। इसमें बेस पे, प्रति ऑर्डर भुगतान और साप्ताहिक इंसेंटिव शामिल होते हैं।
ऑफिस जॉब बनाम गिग वर्क
इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है।

- कुछ लोग इसे गिग वर्क की आज़ादी और मेहनत का सही इनाम बता रहे हैं
- वहीं कुछ का कहना है कि डिलीवरी का काम शारीरिक रूप से थकाने वाला और अस्थिर है
ऑफिस जॉब में जहां स्थिर सैलरी और भविष्य की सुरक्षा होती है, वहीं गिग वर्क में कमाई ज़्यादा लेकिन अनिश्चित हो सकती है।
युवाओं की सोच में बदलाव
आज के युवा सिर्फ कुर्सी और केबिन तक सीमित नहीं रहना चाहते। फ्लेक्सिबल टाइम, तुरंत भुगतान और स्वतंत्रता उन्हें गिग वर्क की ओर आकर्षित कर रही है। खासकर बड़े शहरों में, कई युवा डिलीवरी को फुल-टाइम या पार्ट-टाइम विकल्प के रूप में देख रहे हैं।
Dainik Diary की नजर
जोमैटो CEO का बयान सिर्फ कमाई की तुलना नहीं है, बल्कि यह बदलते भारत के वर्क कल्चर की तस्वीर दिखाता है। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि कौन ज़्यादा कमाता है, बल्कि यह भी है कि कौन सा काम लंबे समय तक सुरक्षित और संतुलित जीवन देता है। आने वाले समय में गिग वर्क और ऑफिस जॉब के बीच की यह बहस और तेज़ हो सकती है।
