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तेल संकट के बीच Narendra Modi की बड़ी अपील, फिर लौट सकता है Work From Home कल्चर
ईरान तनाव और बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों के बीच प्रधानमंत्री ने ईंधन बचाने, विदेश यात्रा कम करने और सोना खरीदने से बचने की सलाह दी
मध्य पूर्व में जारी ईरान संकट का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी पर भी दिखने लगा है। कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से ईंधन की बचत करने, Work From Home (WFH) को बढ़ावा देने और गैर-जरूरी विदेश यात्राओं से बचने की अपील की है।
हैदराबाद में एक जनसभा को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि देशहित अब सिर्फ सीमा पर लड़ाई तक सीमित नहीं है, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी में जिम्मेदारी निभाना भी देशभक्ति का हिस्सा है।
क्यों करनी पड़ रही है ऐसी अपील?
दरअसल, ईरान युद्ध और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते तनाव के कारण वैश्विक तेल सप्लाई प्रभावित हो रही है। यही वजह है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक:
- Brent Crude की कीमत 105 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई
- US West Texas Intermediate भी लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया
भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा असर देश के आयात बिल और विदेशी मुद्रा भंडार पर पड़ता है।
Strait of Hormuz क्यों है इतना अहम?
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक है। दुनिया की लगभग 20 प्रतिशत तेल सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है।
भारत के लिए यह और भी अहम है क्योंकि:
- भारत का लगभग 50% कच्चा तेल
- 60% LNG
- और लगभग पूरा LPG सप्लाई
इसी समुद्री मार्ग से होकर आता है।
अगर यहां तनाव बढ़ता है, तो भारत में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से अपील की कि:
- अनावश्यक ईंधन खर्च कम करें
- जहां संभव हो, WFH अपनाएं
- विदेश यात्राओं को सीमित करें
- और फिलहाल सोने की खरीदारी कम करें
उन्होंने कहा कि इससे भारत की विदेशी मुद्रा बचाने में मदद मिलेगी।
कोविड जैसी यादें फिर ताजा
पीएम मोदी की यह अपील कई लोगों को Covid-19 pandemic के दौर की याद दिला रही है, जब देशभर में Work From Home और सीमित यात्रा जैसी व्यवस्थाएं आम हो गई थीं।

हालांकि इस बार स्थिति अलग है। यह कदम स्वास्थ्य संकट नहीं बल्कि आर्थिक दबाव और वैश्विक ऊर्जा संकट से निपटने के लिए सुझाया गया है।
दूसरे एशियाई देश भी उठा रहे ऐसे कदम
भारत अकेला ऐसा देश नहीं है जिसने ऊर्जा बचत की अपील की हो। एशिया के कई देश पहले ही ईंधन खपत कम करने और ऊर्जा बचाने के लिए नई नीतियां अपना रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले महीनों में दुनिया के कई देशों को सख्त आर्थिक फैसले लेने पड़ सकते हैं।
आम लोगों पर क्या होगा असर?
अगर कच्चा तेल लगातार महंगा होता है, तो:
- पेट्रोल-डीजल महंगे हो सकते हैं
- ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ सकता है
- महंगाई पर असर पड़ सकता है
- घरेलू गैस सिलेंडर की कीमतें भी बढ़ सकती हैं
इसी वजह से सरकार अभी से लोगों को सतर्क रहने और बचत करने की सलाह दे रही है।
देशभक्ति का नया संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण में कहा कि आज देशभक्ति का मतलब सिर्फ सीमा पर लड़ना नहीं है, बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत रखने में योगदान देना भी है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर करोड़ों लोग थोड़ी-थोड़ी बचत भी करें, तो इसका असर देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा हो सकता है।
