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हॉर्मुज़ में ‘समुद्री डकैती’ का विवाद: Donald Trump के बयान से बढ़ा अमेरिका-ईरान तनाव

अमेरिकी राष्ट्रपति के ‘हम पाइरेट्स जैसे हैं’ बयान पर भड़का ईरान, अंतरराष्ट्रीय कानून के उल्लंघन का लगाया आरोप

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हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की निगरानी करते अमेरिकी बल, ट्रंप के बयान के बाद बढ़ा विवाद
हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की निगरानी करते अमेरिकी बल, ट्रंप के बयान के बाद बढ़ा विवाद

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गहराता नजर आ रहा है, और इस बार वजह बना है एक ऐसा बयान जिसने वैश्विक राजनीति में हलचल मचा दी है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में एक रैली के दौरान ऐसा दावा किया, जिसे लेकर ईरान ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।

फ्लोरिडा में आयोजित एक जनसभा में ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी नौसेना हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों को रोककर तेल जब्त कर रही है। उन्होंने इस कार्रवाई को “बहुत मुनाफे वाला काम” बताते हुए कहा, “हम बिल्कुल पाइरेट्स (समुद्री डाकू) जैसे हैं… हम जहाज पर उतरते हैं, उसे अपने कब्जे में लेते हैं और तेल भी ले लेते हैं।”

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यह बयान ऐसे समय में आया है जब हाल ही में अमेरिकी बलों ने दो टैंकरों को रोका था, जिनके बारे में कहा जा रहा था कि वे ईरानी कच्चा तेल लेकर जा रहे थे। इस कार्रवाई के बाद ईरान ने कड़ा विरोध जताया है।

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता Esmaeil Baghaei ने इसे “खुलेआम समुद्री डकैती” करार दिया। उन्होंने कहा कि यह कदम न केवल अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन है, बल्कि वैश्विक समुद्री सुरक्षा के लिए भी खतरा है।

उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए लिखा कि दुनिया एक बार फिर “समुद्री डाकुओं की वापसी” देख रही है और अमेरिका इस तरह की कार्रवाई को कानूनी जामा पहनाने की कोशिश कर रहा है।

हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाजों की निगरानी करते अमेरिकी बल, ट्रंप के बयान के बाद बढ़ा विवाद


विशेषज्ञों का मानना है कि हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का एक अहम मार्ग है, वहां इस तरह की घटनाएं न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक तनाव को भी बढ़ा सकती हैं। इस क्षेत्र में किसी भी तरह की सैन्य गतिविधि का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल की कीमतों पर पड़ता है।

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ट्रंप के इस बयान ने अमेरिकी नीति पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां उनके समर्थक इसे राष्ट्रीय हितों की रक्षा के रूप में देख रहे हैं, वहीं आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचा सकते हैं।

ईरान पहले ही इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाने की बात कह चुका है। अगर यह विवाद और बढ़ता है, तो आने वाले दिनों में यह मामला संयुक्त राष्ट्र जैसी संस्थाओं तक भी पहुंच सकता है।

फिलहाल, यह कहना मुश्किल है कि यह तनाव किस दिशा में जाएगा, लेकिन इतना तय है कि ट्रंप का यह बयान आने वाले समय में अमेरिका-ईरान संबंधों पर गहरा असर डाल सकता है।

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