Economy
महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल! RBI गवर्नर ने Middle East संकट पर दी बड़ी चेतावनी
RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा बोले — अगर लंबे समय तक बढ़े रहे कच्चे तेल के दाम, तो जनता पर पड़ सकता है सीधा असर
मध्य पूर्व में जारी तनाव का असर अब भारत की अर्थव्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने संकेत दिए हैं कि अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ सकती हैं।
स्विट्जरलैंड में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान RBI गवर्नर ने कहा कि फिलहाल सरकार और सरकारी तेल कंपनियां बढ़ती कीमतों का बोझ खुद उठा रही हैं, लेकिन यह स्थिति हमेशा नहीं चल सकती।
जनता पर पड़ सकता है असर
संजय मल्होत्रा ने कहा कि अगर Middle East संकट लंबा खिंचता है, तो सरकार को अंततः ईंधन की बढ़ी हुई लागत उपभोक्ताओं तक पहुंचानी पड़ सकती है।
उन्होंने बताया कि अभी केंद्र सरकार ने एक्साइज ड्यूटी में कटौती कर कुछ राहत दी हुई है, जबकि सरकारी तेल कंपनियां भी अतिरिक्त लागत को अपने स्तर पर संभाल रही हैं।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल लगातार महंगा रहता है, तो आने वाले महीनों में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ना लगभग तय हो सकता है।
PM मोदी ने भी की थी बचत की अपील
RBI गवर्नर का यह बयान ऐसे समय आया है जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही देशवासियों से ईंधन बचाने और गैर-जरूरी खर्च कम करने की अपील कर चुके हैं।
प्रधानमंत्री ने हाल ही में लोगों से पेट्रोल-डीजल का कम इस्तेमाल करने, पब्लिक ट्रांसपोर्ट अपनाने और सोने की खरीद टालने की सलाह दी थी ताकि विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव कम किया जा सके।
महंगाई पर भी बढ़ सकता है दबाव
भारत में अप्रैल महीने में खुदरा महंगाई दर 3.48% रही, जो मार्च के मुकाबले थोड़ी ज्यादा है। हालांकि यह अनुमान से कम रही, लेकिन RBI ने माना कि तेल की बढ़ती कीमतें आगे चलकर महंगाई बढ़ा सकती हैं।
विशेषज्ञों के मुताबिक, ईंधन महंगा होने से ट्रांसपोर्ट, खाद्य पदार्थ और रोजमर्रा की कई चीजों की लागत भी बढ़ जाती है।
सप्लाई चेन पर असर शुरू
RBI गवर्नर ने कहा कि मध्य पूर्व में जारी संघर्ष की वजह से सप्लाई चेन पर असर दिखना शुरू हो गया है। उन्होंने माना कि सिर्फ मौद्रिक नीति से ऐसे बड़े झटकों से निपटना आसान नहीं होता और इसके लिए सरकार और RBI के बीच बेहतर तालमेल जरूरी है।
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उन्होंने यह भी कहा कि RBI अब “डेटा आधारित” रणनीति पर ज्यादा फोकस कर रहा है और हालात के हिसाब से कदम उठाए जाएंगे।

जून की बैठक पर नजर
अब बाजार की नजर RBI की अगली मौद्रिक नीति बैठक पर टिकी है, जो 5 जून को होने वाली है। माना जा रहा है कि तेल कीमतों और महंगाई की स्थिति को देखते हुए RBI अपनी रणनीति में बदलाव कर सकता है।
आर्थिक जानकारों का कहना है कि अगर वैश्विक हालात जल्द नहीं सुधरे, तो भारत को ईंधन कीमतों और महंगाई दोनों मोर्चों पर चुनौती का सामना करना पड़ सकता है।
