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Mojtaba Khamenei ने अमेरिका को दिया सख्त संदेश, कहा यूरेनियम ईरान से बाहर नहीं जाएगा
अमेरिका और इजरायल के दबाव के बीच ईरान ने बदला रुख, परमाणु सामग्री को देश में ही रखने पर अड़ा तेहरान
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने एक बार फिर अमेरिका और पश्चिमी देशों को साफ संदेश दे दिया है। नई रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान के नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने देश के संवर्धित यूरेनियम को विदेश भेजने की मांग को सिरे से खारिज कर दिया है।
बताया जा रहा है कि ईरान के शीर्ष अधिकारियों का मानना है कि अगर यूरेनियम को देश से बाहर भेजा गया तो भविष्य में अमेरिका और इजरायल के संभावित हमलों के सामने ईरान कमजोर पड़ सकता है। इसी वजह से तेहरान अब अपने परमाणु भंडार को हर हाल में देश के अंदर ही सुरक्षित रखना चाहता है।
दरअसल, पिछले कुछ समय से अमेरिका और पश्चिमी देशों की ओर से लगातार दबाव बनाया जा रहा था कि ईरान अपने हाईली एनरिच्ड यूरेनियम को किसी तीसरे देश में ट्रांसफर करे। माना जा रहा था कि यह कदम मिडिल ईस्ट में शांति समझौते की दिशा में एक बड़ा हिस्सा बन सकता है। लेकिन अब मोजतबा खामेनेई के रुख ने साफ कर दिया है कि ईरान इस मुद्दे पर पीछे हटने के मूड में नहीं है।
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राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, ईरान की यह रणनीति केवल सुरक्षा तक सीमित नहीं है बल्कि यह ताकत दिखाने का भी एक तरीका है। तेहरान यह संदेश देना चाहता है कि वह बाहरी दबाव में अपने परमाणु कार्यक्रम पर समझौता नहीं करेगा।
पश्चिमी देशों का लंबे समय से आरोप रहा है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम के जरिए परमाणु हथियार विकसित करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। खासतौर पर 60 प्रतिशत तक यूरेनियम संवर्धन को लेकर अमेरिका, इजरायल और यूरोपीय देशों ने कई बार चिंता जताई है। हालांकि ईरान लगातार इन आरोपों से इनकार करता आया है और कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल ऊर्जा और वैज्ञानिक उद्देश्यों के लिए है।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच इजरायल भी लगातार ईरान पर नजर बनाए हुए है। इजरायली अधिकारियों को डर है कि अगर ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम को और तेज किया तो इससे पूरे मिडिल ईस्ट की सुरक्षा प्रभावित हो सकती है। यही कारण है कि अमेरिका और इजरायल दोनों ईरान पर कड़े प्रतिबंध और दबाव की नीति अपनाते रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि मोजतबा खामेनेई के इस फैसले से अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता और मुश्किल हो सकती है। आने वाले दिनों में दोनों देशों के बीच बयानबाजी और तनाव बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।
दुनिया की नजर अब इस बात पर है कि क्या ईरान अपने सख्त रुख पर कायम रहेगा या फिर अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते कोई नया समझौता सामने आएगा। फिलहाल तेहरान ने साफ कर दिया है कि उसका यूरेनियम उसके लिए सिर्फ परमाणु सामग्री नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और राजनीतिक शक्ति का प्रतीक बन चुका है।
