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ईरान युद्ध के बीच PM Modi सरकार की बड़ी तैयारी! अर्थव्यवस्था को सुरक्षित रखने के लिए PM मोदी ने बुलाई अहम बैठक
वैश्विक तनाव और ईरान संकट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आर्थिक सलाहकार परिषद के साथ बैठक कर भारत की विकास रफ्तार बनाए रखने के उपायों पर चर्चा की।
नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और ईरान से जुड़े युद्ध जैसे हालातों के बीच भारत सरकार आर्थिक मोर्चे पर पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी Economic Advisory Council to the Prime Minister (EAC-PM) की एक महत्वपूर्ण बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की आर्थिक मजबूती बनाए रखने पर विस्तार से चर्चा हुई।
सूत्रों के अनुसार, बैठक में देश की आर्थिक वृद्धि, निवेश, रोजगार, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक बाजारों में पैदा हो रहे जोखिमों का आकलन किया गया। साथ ही ऐसे सुझावों पर विचार किया गया, जिनसे भारत की विकास दर आने वाले महीनों में प्रभावित न हो।
वैश्विक संकट के बीच भारत की रणनीति पर मंथन
ईरान और क्षेत्रीय संघर्षों के कारण अंतरराष्ट्रीय तेल बाजारों में अस्थिरता देखी जा रही है। ऐसे में भारत जैसे बड़े ऊर्जा आयातक देश के लिए स्थिति चुनौतीपूर्ण हो सकती है। बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि किसी भी वैश्विक संकट का असर आम भारतीयों और घरेलू उद्योगों पर न्यूनतम रहे।
प्रधानमंत्री मोदी ने विशेषज्ञों से विभिन्न क्षेत्रों में संभावित चुनौतियों और अवसरों को लेकर सुझाव मांगे। माना जा रहा है कि सरकार पहले से ही कई वैकल्पिक योजनाओं पर काम कर रही है ताकि वैश्विक उथल-पुथल का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर सीमित रखा जा सके।
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आर्थिक विकास की रफ्तार बनाए रखने पर फोकस
बैठक के दौरान भारत की दीर्घकालिक आर्थिक विकास रणनीति पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने विनिर्माण, डिजिटल अर्थव्यवस्था, बुनियादी ढांचा और निर्यात बढ़ाने जैसे विषयों पर अपने विचार रखे।
सरकार का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रह सकता है। इसके लिए निवेशकों का भरोसा बनाए रखना और घरेलू मांग को मजबूत करना बेहद जरूरी है।
ऊर्जा सुरक्षा और महंगाई पर विशेष नजर
ईरान संकट के चलते कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव की आशंका बनी हुई है। यदि तेल महंगा होता है तो परिवहन, उद्योग और रोजमर्रा की वस्तुओं की लागत बढ़ सकती है। ऐसे में बैठक में ऊर्जा आपूर्ति के वैकल्पिक स्रोतों और रणनीतिक भंडारों पर भी चर्चा हुई।
विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते उठाए गए कदम महंगाई के दबाव को कम करने में मदद कर सकते हैं। यही वजह है कि सरकार आर्थिक संकेतकों पर लगातार नजर बनाए हुए है।
निवेश और रोजगार पर भी हुई चर्चा
बैठक में यह भी विचार किया गया कि वैश्विक अस्थिरता के बावजूद भारत विदेशी निवेश आकर्षित करने में कैसे आगे बढ़ सकता है। कई विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि भारत को “China Plus One” रणनीति का लाभ उठाते हुए वैश्विक कंपनियों के लिए और अधिक आकर्षक निवेश केंद्र बनना चाहिए।
इसके अलावा रोजगार सृजन, कौशल विकास और नई तकनीकों में निवेश बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। सरकार का लक्ष्य है कि आर्थिक विकास का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे।

भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा कायम
हाल के वर्षों में भारत ने कई वैश्विक चुनौतियों का सामना करते हुए मजबूत आर्थिक प्रदर्शन किया है। महामारी, आपूर्ति श्रृंखला संकट और भू-राजनीतिक तनावों के बावजूद देश ने विकास की गति बनाए रखी।
विश्लेषकों का कहना है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बुलाई गई यह बैठक केवल वर्तमान संकट पर चर्चा तक सीमित नहीं थी, बल्कि भविष्य की चुनौतियों के लिए भी रोडमैप तैयार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम थी।
निष्कर्ष
ईरान से जुड़े तनावपूर्ण हालातों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक सलाहकार परिषद की बैठक ने यह संकेत दिया है कि भारत सरकार वैश्विक चुनौतियों को लेकर पूरी तरह सतर्क है। सरकार का फोकस केवल संकट से निपटने पर नहीं, बल्कि देश की आर्थिक विकास यात्रा को और मजबूत बनाने पर भी है। आने वाले समय में इस बैठक में हुई चर्चाएं भारत की आर्थिक नीतियों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

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