India News
12 साल में ‘Fragile Five’ से दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था तक: Modi Government के आर्थिक सफर की बड़ी कहानी
GDP दोगुना होने से लेकर डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग और रिकॉर्ड पूंजीगत निवेश तक, पिछले 12 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था में कई बड़े बदलाव देखने को मिले हैं। हालांकि रोजगार और निजी निवेश जैसी चुनौतियां अब भी बाकी हैं।
नई दिल्ली: प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व वाली सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के साथ ही भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। एक दशक पहले तक जिन देशों को वैश्विक बाजार में आर्थिक रूप से कमजोर माना जाता था, उनमें भारत का नाम भी शामिल था। लेकिन आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था के रूप में अपनी पहचान मजबूत कर चुका है।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, पिछले 12 वर्षों में केवल अर्थव्यवस्था का आकार ही नहीं बढ़ा, बल्कि उसकी बुनियादी संरचना भी पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। यही कारण है कि वैश्विक निवेशक भारत को अब एक बड़े अवसर के रूप में देख रहे हैं।
GDP में दोगुनी बढ़ोतरी
बीते दशक में भारत की नाममात्र GDP लगभग दोगुनी हो चुकी है। जहां 2015 के आसपास भारतीय अर्थव्यवस्था का आकार करीब 2 ट्रिलियन डॉलर था, वहीं अब यह लगभग 4 ट्रिलियन डॉलर के स्तर तक पहुंच गया है।
हालिया वित्तीय वर्षों में भारत दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल रहा है। मजबूत घरेलू मांग, सरकारी निवेश और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार ने इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
सरकारी निवेश बना विकास का इंजन
सरकार ने सड़क, रेलवे, बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर पूंजीगत निवेश बढ़ाया। एक दशक पहले जहां पूंजीगत व्यय सीमित था, वहीं अब इसमें कई गुना वृद्धि देखने को मिली है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस निवेश का उद्देश्य निजी क्षेत्र के लिए बेहतर आधारभूत ढांचा तैयार करना था, ताकि उद्योग और व्यापार को आगे बढ़ने का अवसर मिल सके।
डिजिटल इंडिया की सफलता
पिछले कुछ वर्षों में Aadhaar, UPI और Direct Benefit Transfer (DBT) जैसी व्यवस्थाओं ने भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था को नई पहचान दी है।
आज UPI दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान नेटवर्क में शामिल है। इससे न केवल लेन-देन आसान हुआ है बल्कि सरकारी योजनाओं का लाभ सीधे लोगों तक पहुंचाने में भी मदद मिली है। कई देश अब भारत के डिजिटल मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं।
और भी पढ़ें : बंगाल की राजनीति में नया मोड़! TMC के बागी नेता Ritabrata Banerjee का बड़ा दावा, ’58 विधायक हमारे साथ’
मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ा फोकस
सरकार की Make in India और PLI (Production Linked Incentive) योजनाओं का सबसे बड़ा असर इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में दिखाई दिया है।
भारत अब मोबाइल फोन निर्माण के मामले में दुनिया के प्रमुख देशों में शामिल हो चुका है। मोबाइल फोन उत्पादन और निर्यात दोनों में रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा फार्मास्यूटिकल्स और अन्य रणनीतिक क्षेत्रों में भी घरेलू उत्पादन क्षमता बढ़ाने की कोशिशें तेज हुई हैं।
हालांकि मैन्युफैक्चरिंग को GDP के 25 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हो सका है और यह आने वाले वर्षों की बड़ी चुनौती बना हुआ है।
रोजगार पर अभी और काम की जरूरत

आर्थिक विकास के बावजूद रोजगार का मुद्दा अभी भी चर्चा के केंद्र में है। सरकार का दावा है कि विभिन्न योजनाओं और औद्योगिक परियोजनाओं से लाखों नौकरियां पैदा हुई हैं, लेकिन तेजी से बढ़ती कार्यबल की जरूरतों को देखते हुए यह पर्याप्त नहीं माना जा रहा।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत को श्रम-प्रधान उद्योगों और MSME सेक्टर को और मजबूत करना होगा, ताकि बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकें।
आगे का रास्ता
पिछले 12 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था ने कई महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं। महंगाई नियंत्रण, बेहतर राजकोषीय प्रबंधन, डिजिटल क्रांति और इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार जैसे कदमों ने विकास की मजबूत नींव तैयार की है।
हालांकि निजी निवेश, रोजगार सृजन और विनिर्माण क्षेत्र के व्यापक विस्तार जैसे मुद्दे अब भी नीति निर्माताओं के सामने बड़ी चुनौती बने हुए हैं। आने वाले वर्षों में यही तय करेगा कि भारत की आर्थिक इमारत कितनी ऊंचाई तक पहुंचती है।
