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AAP के 7 सांसदों के BJP में विलय से Rajya Sabha में NDA और मजबूत, Anti-Defection Law पर बड़ा सवाल
Raghav Chadha ने कहा 2/3 सदस्यों ने BJP में merge होने का फैसला किया, AAP के Sanjay Singh ने disqualification की मांग की, अब Chairman CP Radhakrishnan करेंगे फैसला
Bharatiya Janata Party के नेतृत्व वाले National Democratic Alliance को Rajya Sabha में एक बड़ी ताकत मिलने वाली है। AAP के सात Rajya Sabha सांसदों ने BJP में विलय का ऐलान किया है और इसकी सूचना Upper House के Chairman CP Radhakrishnan को भी दे दी गई है। इस घटनाक्रम ने एक साथ कई राजनीतिक और संवैधानिक सवाल खड़े कर दिए हैं।
संख्या का खेल: NDA की बढ़ेगी ताकत
फिलहाल BJP के पास Rajya Sabha में 106 सदस्य हैं और NDA का कुल आंकड़ा 141 है, जिसमें सात nominated सदस्य भी शामिल हैं। सात AAP सांसदों के आने के बाद यह संख्या क्रमशः 113 और 148 हो जाएगी। BJP को उम्मीद है कि साल के अंत तक जब 30 से अधिक सीटें खाली होंगी, तब कम से कम पांच और सीटें जुड़ सकती हैं, जिससे वह Rajya Sabha में दो-तिहाई बहुमत यानी 163 के आंकड़े के करीब पहुंच जाएगी।
Raghav Chadha ने क्या कहा?
AAP के पूर्व Deputy Leader Raghav Chadha ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “हमने फैसला किया है कि हम, Rajya Sabha में AAP के 2/3 सदस्य, भारत के संविधान के प्रावधानों का इस्तेमाल करते हुए BJP में merge हो रहे हैं।” उन्होंने बताया कि सातों सांसदों ने एक पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं जो Rajya Sabha के Chairman को सौंपा गया है। इसके बाद सभी सात सांसदों ने BJP अध्यक्ष Nitin Nabin से मुलाकात भी की।
Sanjay Singh ने की disqualification की मांग
AAP नेता Sanjay Singh ने X पर post करते हुए कहा कि वे Rajya Sabha Chairman को पत्र देकर Raghav Chadha, Ashok Mittal और Sandeep Pathak को सदस्यता से अयोग्य घोषित करने की मांग करेंगे। उनका तर्क है कि BJP में जाना Constitution की Tenth Schedule के तहत voluntarily अपनी मूल पार्टी की सदस्यता छोड़ने के बराबर है।
Anti-Defection Law की पेचीदगी
यहां कानूनी पेचीदगी यह है कि Anti-Defection Law के तहत disqualification से बचने के लिए किसी parliamentary party के कम से कम दो-तिहाई elected सदस्यों का किसी दूसरी पार्टी में merge होना जरूरी है। चूंकि Rajya Sabha में AAP के 10 में से 7 सांसद यानी 2/3 से अधिक सदस्य इस विलय में शामिल हैं और Deputy Leader Ashok Mittal भी इनमें हैं, इसलिए ये सदस्य तकनीकी रूप से disqualification से बचे हुए हैं।
लेकिन Lok Sabha के पूर्व Secretary General PDT Achary ने एक अहम बात कही। उन्होंने कहा कि सदस्य तभी disqualification से बच सकते हैं जब उनकी “मूल राजनीतिक पार्टी” किसी अन्य पार्टी में merge हो। इसका मतलब यह है कि इन सात सांसदों को यह साबित करना होगा कि वे ही AAP की original party हैं। इसके लिए उन्हें Election Commission का रुख करना होगा। Achary ने यह भी कहा कि “जब तक AAP की original party का कोई दूसरी पार्टी में विलय नहीं होता, ये सदस्य disqualification के दायरे में हैं, चाहे 2/3 सदस्य ही क्यों न चले गए हों।”

Chairman CP Radhakrishnan को यह तय करना होगा कि यह merger Anti-Defection Law के अनुसार वैध है या नहीं।
AAP के पास क्या विकल्प?
अगर पार्टी में formal split होती है, तो AAP के founder और National Convenor Arvind Kejriwal Election Commission का दरवाजा खटखटाकर पार्टी का चुनाव चिन्ह अपने पक्ष में रखने की मांग कर सकते हैं। हालांकि यह ध्यान देने वाली बात है कि इन सात सांसदों ने BJP में merge होने की बात कही है, AAP का चुनाव चिन्ह लेने की कोई मांग नहीं की है।
2019 का TDP वाला इतिहास दोहराया?
यह घटनाक्रम 2019 की उस घटना की याद दिलाता है जब TDP Parliamentary Party ने BJP में merger किया था। उस वक्त TDP के छह में से चार Rajya Sabha MPs ने BJP join की थी और वे सभी Tenth Schedule के तहत disqualification से बच गए थे। TDP और BJP आज allies हैं।
AAP फिलहाल Delhi में 22 MLAs, Punjab में 92 MLAs और Gujarat, Jammu and Kashmir तथा Goa में भी अपने विधायकों के साथ मौजूद है। लेकिन Rajya Sabha में यह झटका पार्टी के लिए बड़ा नुकसान है।

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