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Film festival cinema के लिए होना चाहिए, glamour के लिए नहीं Cannes से लौटीं Anupriya Goenka ने कही Anurag Kashyap वाली बात
Bombay Stories लेकर Cannes गईं Anupriya Goenka बोलीं — International projects करने की इच्छा हमेशा से थी, और Manto के साहित्य पर काम करना एक सपना पूरा होने जैसा था।
Cannes का नाम आते ही दो चीज़ें ज़हन में आती हैं — cinema और red carpet। लेकिन हाल ही में filmmaker Anurag Kashyap ने कहा कि red carpet “दिन का सबसे कम ज़रूरी हिस्सा” है। और अब Anupriya Goenka ने भी यही बात दोहराई — उस experience से जो उन्होंने खुद जिया।
“यह film festival है — cinema पहले होना चाहिए”
Anupriya ने साफ कहा — “यह essentially एक film festival है और यहाँ cinema, storytelling और दुनिया भर के creative minds से मिलना — यही सब होना चाहिए। Major focus films और storytelling पर होना चाहिए, बाकी किसी चीज़ पर नहीं। वहाँ इतनी creativity चारों तरफ होती है — उसे celebrate करना चाहिए।”
“वहाँ कोई यह नहीं पूछता कि तुमने कितनी films की हैं”
39 साल की Anupriya ने international film festivals के एक ऐसे पहलू की बात की जो बहुत कम लोग highlight करते हैं।
उन्होंने कहा — “ऐसे festival में सबसे exciting हिस्सा होता है — दुनिया के अलग-अलग cinema के लोगों से मिलना। वो आपको उस actor की तरह नहीं treat करते जिसने इतना काम किया है। वो आपको उस actor की तरह treat करते हैं जो एक film लेकर आई है।”
यह distinction important है — और यही international festivals को अलग बनाता है।
International projects की इच्छा — और वो क्यों
Anupriya ने बताया कि Cannes के इस experience ने उनकी Indo-Western और international projects करने की इच्छा और मज़बूत की। उन्होंने कहा — “मैं हमेशा से India के बाहर के लोगों के साथ भी काम करना चाहती थी — अपनी sensibilities को broaden करने के लिए, अपना craft grow करने के लिए।”
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Bombay Stories और Manto — एक सपने का पूरा होना
Anupriya Cannes में अपनी film Bombay Stories की premiere के साथ गई थीं। उन्होंने Manto के साहित्य पर आधारित character Sogandhi निभाया है।

उन्होंने कहा — “मैं हमेशा से Manto के literature पर काम करना चाहती थी। Sogandhi का किरदार — उसमें comedy, seduction, pain, anger, vulnerability और rage — सब कुछ था। हर emotion को explore किया।”
Audience की वो reaction जो भूल नहीं सकतीं
Cannes में screening के बाद जो response मिला — वो Anupriya के लिए सबसे बड़ा पल था।
“कुछ महिलाएँ रोते हुए बाहर आईं और उन्होंने मुझे गले लगाया। एक-दो तो बोल ही नहीं पा रही थीं। Film ने उन्हें इतना affect किया था।”
और उन्होंने इसकी वजह भी बताई — “दुनिया भर की महिलाएँ एक जैसे judgement, दर्द और तकलीफ से गुज़रती हैं। इसीलिए यह एक global story बन जाती है।”
Anurag और Anupriya — एक जैसी सोच
Anurag Kashyap ने भी Cannes में कहा था कि वो red carpet को seriously नहीं लेते — film screening सबसे important है। Anupriya ने यही बात अपने experience से confirm की।
यह दोनों की सोच नहीं — यह उन सभी की सोच है जो cinema को genuinely love करते हैं।
