Politics
Harivansh Narayan Singh की Rajya Sabha में वापसी, President Droupadi Murmu ने किया पुनर्नामांकन
Article 80 के तहत राष्ट्रपति का बड़ा फैसला, JD(U) की चुप्पी के बीच फिर से मिला Upper House का रास्ता
President of India Droupadi Murmu ने वरिष्ठ पत्रकार से नेता बने Harivansh Narayan Singh को एक बार फिर Rajya Sabha के लिए नामित किया है। यह फैसला उनके पिछले कार्यकाल के 9 April को समाप्त होने के एक दिन बाद सामने आया है।
यह नामांकन Constitution के Article 80 के तहत किया गया है, जिसके अनुसार राष्ट्रपति साहित्य, विज्ञान, कला और सामाजिक सेवा जैसे क्षेत्रों से अधिकतम 12 सदस्यों को Rajya Sabha में नामित कर सकते हैं।
अचानक बदला राजनीतिक घटनाक्रम
Harivansh Narayan Singh का पिछला कार्यकाल खत्म होने के बाद यह चर्चा तेज हो गई थी कि शायद उनका parliamentary career यहीं समाप्त हो सकता है। खासकर तब जब उनकी पार्टी Janata Dal (United) ने उन्हें इस बार formal तौर पर फिर से नामित नहीं किया था।
लेकिन राष्ट्रपति के इस निर्णय ने सभी अटकलों पर विराम लगा दिया और उन्हें एक बार फिर Upper House में जगह मिल गई।
पत्रकारिता से संसद तक का सफर
Harivansh Narayan Singh का राजनीतिक और सार्वजनिक जीवन पत्रकारिता से शुरू हुआ था। 2014 में वे पहली बार JD(U) के समर्थन से Rajya Sabha पहुंचे थे।
2018 में उन्हें Rajya Sabha का Deputy Chairman चुना गया और 2020 में दोबारा इस पद पर बने रहे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्हें सदन की कार्यवाही में संतुलन और मर्यादा बनाए रखने के लिए जाना जाता है।
Nitish Kumar के करीबी माने जाते हैं
Singh को Bihar के मुख्यमंत्री Nitish Kumar का करीबी माना जाता है। राजनीतिक उतार-चढ़ाव के बावजूद उन्होंने अपने constitutional role को नहीं छोड़ा।
जब JD(U) ने NDA से दूरी बनाई थी, तब भी उन्होंने Deputy Chairman के पद से इस्तीफा नहीं दिया था, यह कहते हुए कि यह पद राजनीतिक नहीं बल्कि संवैधानिक है।

Parliament भवन उद्घाटन में मौजूदगी
नए Parliament भवन के उद्घाटन समारोह में उनकी मौजूदगी भी चर्चा में रही थी, जहां Prime Minister Narendra Modi भी उपस्थित थे। विपक्ष के बहिष्कार के बीच उनकी उपस्थिति ने राजनीतिक संकेतों पर बहस को जन्म दिया था।
राजनीतिक विश्लेषकों की राय
इस फैसले को सिर्फ एक पुनर्नामांकन नहीं बल्कि उनके अनुभव और institutional role की recognition के रूप में देखा जा रहा है।
पटना के राजनीतिक विश्लेषक Surendra Kishore ने कहा कि यह निर्णय उनकी राजनीतिक समझ और योगदान का सम्मान है।
क्या दर्शाता है यह फैसला?
विशेषज्ञों के अनुसार यह पुनर्नामांकन इस बात का संकेत है कि Harivansh Narayan Singh की भूमिका को केवल पार्टी राजनीति तक सीमित नहीं देखा जा रहा, बल्कि उन्हें एक संवैधानिक और institutional figure के रूप में महत्व दिया जा रहा है।
