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ईरान का सबसे बड़ा दावा नेतन्याहू के दफ्तर पर खैबर मिसाइल से हमला, इजरायल ने कहा “झूठ”
IRGC ने कहा — दसवीं लहर में नेतन्याहू का ऑफिस और वायुसेना प्रमुख का मुख्यालय निशाने पर था; इजरायल बोला — सब ठीक है, यह महज प्रोपेगेंडा
युद्ध में असली हथियारों के साथ-साथ एक और हथियार चलता है — सूचना का युद्ध। और इस वक्त ईरान और इजरायल दोनों इसी मैदान में भी आमने-सामने हैं।
2 मार्च 2026 को ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) ने एक बड़ा दावा किया — IRGC ने अपने टेलीग्राम चैनल पर कहा कि “दसवीं लहर” में खैबर शेकन बैलिस्टिक मिसाइलों का इस्तेमाल करके इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के दफ्तर और वायुसेना प्रमुख के मुख्यालय को सीधे निशाना बनाया गया।
नेतन्याहू की “किस्मत अधर में” — IRGC का दावा
ईरानी राज्य मीडिया ने दावा किया कि नेतन्याहू का हाल फिलहाल “अनिश्चितता के बादल में” है। सोशल मीडिया पर अफरातफरी मच गई। कुछ अकाउंट्स पर यह तक फैल गया कि नेतन्याहू जर्मनी भाग गए हैं।
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लेकिन सच्चाई कुछ और थी।
इजरायल का जवाब — “यह सब झूठ है”
नेतन्याहू के दफ्तर ने IRGC के दावे को “फेक न्यूज” करार दिया और कहा कि प्रधानमंत्री का कार्यालय पूरी तरह सुरक्षित है। इसके साथ ही यह भी बताया गया कि नेतन्याहू ने उसी दिन तेल अवीव में रक्षा मंत्री, सेना प्रमुख और मोसाद निदेशक के साथ बैठक की थी।
इजरायल ने पुष्टि की कि हमलों में कोई हताहत नहीं हुआ। यरूशलेम में सायरन जरूर बजे, विस्फोट की आवाजें आईं — लेकिन नेतन्याहू का दफ्तर पूरी तरह ठीक रहा।
खैबर शेकन — ईरान का खतरनाक हथियार
IRGC ने बताया कि इस हमले में खैबर शेकन मिसाइल का उपयोग किया गया — एक उन्नत सॉलिड-फ्यूल बैलिस्टिक मिसाइल जिसकी मारक क्षमता 1,450 किलोमीटर तक है यह वही मिसाइल है जिसे ईरान ने अपनी सबसे आधुनिक मिसाइल प्रणालियों में से एक बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान इस हमले के जरिए इजरायल की बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली — जिसमें एरो और पैट्रियट मिसाइल शामिल हैं — को परखने की कोशिश कर रहा था। यानी यह सिर्फ हमला नहीं था, एक परीक्षण भी था।

“दसवीं लहर” — और युद्ध की तीव्रता
यह हमला ईरान की तरफ से दसवीं बार था। ईरान ने 28 फरवरी को अमेरिका-इजरायल के संयुक्त हमले के बाद से लगातार मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखे हैं — इजरायल, खाड़ी देशों में अमेरिकी अड्डों और अन्य लक्ष्यों को निशाना बनाते हुए।
यह वैसे ही है जैसे 2006 में लेबनान युद्ध के दौरान हिजबुल्लाह ने लगातार इजरायल पर रॉकेट दागे थे — थकाने की रणनीति। ईरान यही कर रहा है — हर दिन एक नई लहर, हर बार एक नया दावा।
सूचना युद्ध — कौन जीत रहा है?
जब IRGC कहता है “नेतन्याहू का ऑफिस तबाह” और इजरायल कहता है “सब झीक” — तो आम इंसान क्या माने?
सच यह है कि इस युद्ध में मैदानी सच्चाई और प्रचार के बीच की रेखा बहुत धुंधली हो गई है। इजरायल अपनी जनता को आश्वस्त करना चाहता है, ईरान अपने समर्थकों को जोश दिलाना चाहता है। दोनों के अपने-अपने मकसद हैं।
भारत के लिए संदेश
भारत सरकार ने अपने नागरिकों से अपील की है कि वे इजरायल, कुवैत, UAE और अन्य खाड़ी देशों में अत्यधिक सावधानी बरतें। इन देशों में रह रहे लाखों भारतीय प्रवासियों के लिए यह युद्ध अब सिर्फ खबर नहीं, बल्कि उनकी रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने वाली हकीकत बन चुका है।
