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Kejriwal’s के एक सवाल ने बढ़ाई सियासी गर्मी, Petrol diesel पर BJP को देनी पड़ी सफाई
रूस और ईरान से सस्ता तेल खरीदने को लेकर अरविंद केजरीवाल ने उठाए सवाल, BJP ने बताया वैश्विक संकट और टैक्स का पूरा गणित
देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतें एक बार फिर बढ़ने के बाद सियासत तेज हो गई है। आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल ने सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल पूछते हुए कहा कि जब रूस और ईरान से सस्ता तेल उपलब्ध है, तो भारत उसका पूरा फायदा क्यों नहीं उठा रहा। उनके इस सवाल ने सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक नई बहस छेड़ दी।
केजरीवाल ने कहा कि लगातार बढ़ती महंगाई से आम आदमी की कमर टूट रही है। पेट्रोल-डीजल महंगा होने का असर सिर्फ वाहन चलाने तक सीमित नहीं रहता, बल्कि सब्जियों, राशन, ऑनलाइन डिलीवरी और रोजमर्रा की हर चीज पर पड़ता है। उन्होंने पूछा कि आखिर सरकार की ऐसी कौन-सी “मजबूरियां” हैं, जिनकी वजह से जनता को राहत नहीं मिल पा रही।
केजरीवाल के बयान के तुरंत बाद बीजेपी आईटी सेल प्रमुख अमित मालवीय ने जवाब देते हुए कहा कि भारत पहले से ही रूस से बड़े स्तर पर कच्चा तेल खरीद रहा है। उनके मुताबिक भारत हर दिन करीब 23 लाख बैरल रूसी तेल आयात कर रहा है और यही वजह है कि देश कई अन्य देशों की तुलना में बेहतर स्थिति में है।
अमित मालवीय ने यह भी कहा कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें सिर्फ भारत सरकार तय नहीं करतीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय हालात भी इसमें बड़ी भूमिका निभाते हैं। उन्होंने खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट संकट और वैश्विक युद्ध जैसे हालात का जिक्र किया। मालवीय के अनुसार, जब दुनिया के बड़े तेल सप्लाई रूट्स पर तनाव बढ़ता है, तो कच्चे तेल की कीमतें अचानक ऊपर चली जाती हैं।
दरअसल, होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक माना जाता है। यहां किसी भी तरह का तनाव या युद्ध पूरी दुनिया के तेल बाजार को प्रभावित करता है। इससे शिपिंग, बीमा और ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ जाती है, जिसका असर सीधे पेट्रोल-डीजल के दामों पर पड़ता है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि भारत भले ही रूस से डिस्काउंट पर तेल खरीद रहा हो, लेकिन वैश्विक बाजार के दबाव से पूरी तरह बचना आसान नहीं है। इसके अलावा पेट्रोल और डीजल पर केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स भी कीमतों को काफी प्रभावित करते हैं।

बीजेपी ने अपने जवाब में राज्यों के वैट टैक्स का मुद्दा भी उठाया। पार्टी का कहना है कि कई राज्यों में ज्यादा वैट की वजह से पेट्रोल-डीजल की कीमतें और बढ़ जाती हैं। यही कारण है कि अलग-अलग राज्यों में ईंधन के दाम अलग दिखाई देते हैं।
इस पूरे विवाद के बीच सबसे ज्यादा असर आम जनता पर पड़ रहा है। ऑटो चालकों से लेकर नौकरीपेशा लोगों तक हर कोई महंगे ईंधन का बोझ महसूस कर रहा है। सोशल मीडिया पर भी लोग सरकार से राहत की मांग कर रहे हैं।
फिलहाल पेट्रोल-डीजल का मुद्दा सिर्फ आर्थिक नहीं, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में यह बहस और तेज हो सकती है, क्योंकि महंगाई का असर सीधे लोगों की जेब पर पड़ रहा है।
