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एक पैर पर खड़े होकर जीताई बाज़ी Krunal Pandya ने बताया उस शख्स का नाम जिसने बदल दी RCB की बैटिंग
Cramps से तड़पते हुए 73 रन की नाबाद पारी खेलने वाले Krunal Pandya ने जीत के बाद batting coach Dinesh Karthik को दिया पूरा श्रेय — कहा, “DK के बिना यह मुमकिन नहीं था।”
Bengaluru। कुछ पारियां सिर्फ स्कोरकार्ड पर नहीं, दिल पर भी छप जाती हैं। रविवार रात Royal Challengers Bengaluru और Mumbai Indians के बीच जो मैच खेला गया, वो क्रिकेट प्रेमियों को लंबे वक्त तक याद रहेगा। और उस मैच की सबसे बड़ी कहानी थी — Krunal Pandya की वो जाँबाज़ पारी, जो उन्होंने सचमुच एक पैर पर खड़े होकर खेली।
जब दर्द से ज़्यादा ज़रूरी था जीत
मैच के आखिरी ओवरों में Krunal को भयंकर cramps आ रहे थे। दौड़ना तो दूर, ठीक से खड़े होना भी मुश्किल हो गया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 46 गेंदों में नाबाद 73 रन — यह पारी सिर्फ आंकड़ा नहीं, एक जज़्बे की कहानी है।
आखिरी गेंद पर RCB को 2 रन चाहिए थे — और टीम ने वो रन बना लिए। नतीजा? पाँच बार के IPL champion Mumbai Indians Playoffs की दौड़ से बाहर हो गए।
Krunal ने खोला राज़ — “सब DK की वजह से हुआ”
मैच के बाद press conference में Krunal से जब RCB की बेहतर हुई बैटिंग के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के एक नाम लिया — Dinesh Karthik।
“पिछले साल और इस साल भी, उतार-चढ़ाव के बावजूद, बहुत सारा श्रेय DK को जाता है,” Krunal ने कहा।
“उन्होंने हर खिलाड़ी के साथ अलग-अलग समय बिताया है। हर बल्लेबाज़ की ताकत और कमज़ोरी को समझा है और उस पर काम किया है। वो हमेशा बल्लेबाज़ों के लिए मौजूद रहते हैं।”
यह वही Dinesh Karthik हैं जो कभी खुद RCB के लिए खेलते थे और अब पर्दे के पीछे रहकर टीम की बैटिंग संस्कृति को नई दिशा दे रहे हैं।
Cramps में भी Plan नहीं बदला
Krunal ने बताया कि pressure में शांत रहने की वजह थी — पहले से तैयार की गई रणनीति।
“हमने यह तय किया हुआ था कि अगर कोई एक bowler है जिसे आप target कर सकते हो, तो उसके 6 गेंद ठीक से खेलो। उस वक्त मैं settled था। लेकिन cramps की वजह से एक-दो रन दौड़ना बहुत मुश्किल हो रहा था। तो मैंने सोचा — ठीक है, बस खड़े रहो और जो मिले उसे भुनाओ।”
यही सोच, यही साहस — और इसी की बदौलत RCB ने आखिरी गेंद पर जीत हासिल की।
“मुझे मुश्किल हालात पसंद हैं”

Krunal अपने IPL करियर में कई पोजीशन पर बैटिंग कर चुके हैं। इस बारे में पूछने पर उन्होंने कहा:
“मुझे अच्छा लगता है कि टीम मुझ पर भरोसा करती है। जब भी मैं बैट करने जाता हूँ, तो पहले यह सोचता हूँ कि situation क्या है और टीम को अभी क्या चाहिए। मैंने कभी personal milestones के बारे में नहीं सोचा। और सच कहूँ तो — situation जितना मुश्किल होता है, मुझे उतना ही मज़ा आता है।”
Bhuvneshwar Kumar का भी कमाल
यह जीत सिर्फ Krunal की नहीं थी। अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ Bhuvneshwar Kumar ने पहले गेंदबाज़ी में 4 विकेट लेकर सिर्फ 23 रन दिए — और फिर बैटिंग में आखिरी ओवर की पहली गेंद पर ज़रूरी छक्का जड़कर मैच का रुख पलट दिया।
यह वो RCB है जो अब सिर्फ Virat Kohli के नाम पर नहीं, पूरी टीम की मेहनत पर जीत रही है।
