Business / Economy
दुनिया ने खोया “इंडियाना जोन्स ऑफ इन्वेस्टिंग”: 89 साल की उम्र में Mark Mobius का निधन
उभरते बाजारों में निवेश की दुनिया बदलने वाले दिग्गज ने छोड़ी ऐसी विरासत, जिसने वैश्विक फाइनेंस की दिशा बदल दी
वैश्विक निवेश जगत से एक युग का अंत हो गया है। उभरते बाजारों (Emerging Markets) में निवेश को नई पहचान देने वाले दिग्गज निवेशक मार्क मोबियस का 89 वर्ष की उम्र में निधन हो गया है। उनकी मौत की पुष्टि उनके लिंक्डइन पेज पर साझा एक बयान के जरिए की गई है।
मार्क मोबियस को दुनिया भर में “इंडियाना जोन्स ऑफ इमर्जिंग मार्केट्स” के नाम से जाना जाता था, क्योंकि वे जोखिम भरे और कम विकसित बाजारों में भी मौके तलाशने के लिए जाने जाते थे। उनका मानना था कि जहां अस्थिरता है, वहीं असली अवसर छिपा होता है।
लंबे समय तक उन्होंने फ्रैंकलिन टेम्पलटन के टेम्पलटन इमर्जिंग मार्केट्स ग्रुप का नेतृत्व किया और करीब 30 साल से अधिक समय तक उभरते बाजारों को वैश्विक निवेशकों के लिए आकर्षक बनाया। अपने करियर में उन्होंने एशिया, लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और पूर्वी यूरोप जैसे क्षेत्रों में निवेश के नए रास्ते खोले।
मोबियस सिर्फ एक निवेशक नहीं थे, बल्कि एक “फील्ड रिसर्चर” की तरह काम करते थे। वे साल में सैकड़ों दिनों तक दुनिया के अलग-अलग देशों में घूमकर कंपनियों, फैक्ट्रियों और स्थानीय बाजारों को खुद देखते थे। अनुमान है कि उन्होंने अपने जीवन में 100 से अधिक देशों की यात्रा की थी।
उनकी सोच किताबों में भी साफ झलकती है। उन्होंने लिखा था कि किसी भी बाजार को समझने के लिए सबसे पहले वहां के लोगों को समझना जरूरी है—यानी बैलेंस शीट से ज्यादा जमीन की हकीकत मायने रखती है।

मोबियस का मानना था कि उभरते बाजारों में असली ग्रोथ वहीं से आती है, जिन्हें पारंपरिक निवेशक अक्सर नजरअंदाज कर देते हैं। इसी सोच ने उन्हें वैश्विक निवेश जगत में एक अलग पहचान दिलाई और अरबों डॉलर का निवेश इन बाजारों की ओर आकर्षित हुआ।
रिटायरमेंट के बाद भी वे सक्रिय रहे और नए निवेश अवसरों पर काम करते रहे। उनकी मृत्यु के बाद निवेश जगत में शोक की लहर है, लेकिन साथ ही उनकी सोच और सिद्धांत आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।
मार्क मोबियस का जाना सिर्फ एक व्यक्ति का अंत नहीं है, बल्कि उस सोच का अंत है जिसने दुनिया को सिखाया कि “जहां जोखिम है, वहीं अवसर भी है।”
और पढ़ें- DAINIK DIARY
