Politics
Rajya Sabha Chairman ने Raghav Chadha समेत 7 AAP सांसदों का BJP में विलय किया स्वीकार, BJP की संख्या 113 पहुंची
Raghav Chadha बोले ’15 साल दिए, लेकिन पार्टी गलत लोगों के हाथ में चली गई’, Kiren Rijiju ने कहा ‘NDA में आपका स्वागत है’
भारतीय राजनीति में एक बड़ा बदलाव आ गया है। Rajya Sabha Chairman CP Radhakrishnan ने Raghav Chadha और छह अन्य सांसदों के Aam Aadmi Party (AAP) छोड़कर Bharatiya Janata Party (BJP) में विलय को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया है। इसके साथ ही Rajya Sabha में BJP की कुल संख्या बढ़कर 113 हो गई है।
जिन सात सांसदों का BJP में विलय स्वीकार किया गया है उनमें Raghav Chadha, Ashok Mittal, Sandeep Pathak, Vikramjit Singh Sahney, Harbhajan Singh, Swati Maliwal और Rajinder Gupta शामिल हैं। ये सभी अब BJP की आधिकारिक सदस्य सूची में शामिल हो गए हैं।
Kiren Rijiju ने X पर किया स्वागत
Union Minister Kiren Rijiju ने X पर इस विलय की घोषणा करते हुए नए सदस्यों का स्वागत किया। उन्होंने लिखा कि Prime Minister Narendra Modi की दूरदर्शी नेतृत्व में nation-building NDA में आपका स्वागत है और Tukde-Tukde INDI Alliance को अलविदा। Rijiju ने नए सांसदों की तारीफ करते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा संसद में अनुशासन और मर्यादा बनाए रखी, कभी अभद्र भाषा का इस्तेमाल नहीं किया और कोई अनुशासनहीनता नहीं दिखाई।
24 April को किया था AAP छोड़ने का ऐलान

गौरतलब है कि Raghav Chadha, Sandeep Pathak और अन्य Rajya Sabha सांसदों ने 24 April को AAP छोड़ने की घोषणा की थी। इस कदम से AAP को Rajya Sabha में जबरदस्त झटका लगा। पार्टी की Upper House में संख्या घटकर महज तीन रह गई। सात में से छह सांसद Punjab से थे, जिससे उस राज्य में AAP का अब सिर्फ एक सांसद Balbir Singh Seechewal बचा है।
Raghav Chadha का AAP पर बड़ा हमला
Raghav Chadha ने सोमवार को एक नया video जारी करके AAP छोड़ने के कारण विस्तार से बताए। उन्होंने कहा, “मैंने इस पार्टी को अपनी जवानी के 15 साल दिए। लेकिन यह पार्टी अब वो नहीं रही जो पहले थी। यहां काम करने से रोका जाता है, Parliament में बोलने नहीं दिया जाता। यह पार्टी अब कुछ भ्रष्ट लोगों के हाथों में फंस गई है जो सिर्फ अपने निजी फायदे के लिए काम करते हैं। मुझे लगा कि मैं सही इंसान हूं लेकिन गलत पार्टी में हूं।”
Chadha ने यह भी बताया कि उन्होंने politics छोड़ने या AAP में रहकर उसे सुधारने की कोशिश करने जैसे विकल्पों पर भी विचार किया था। लेकिन अंत में उन्होंने BJP का दामन थामने का फैसला किया। उन्होंने एक तीखा सवाल भी उठाया कि एक या दो लोग गलत हो सकते हैं, लेकिन क्या सात लोग एक साथ गलत हो सकते हैं?
यह पूरा घटनाक्रम AAP के लिए एक गहरे संकट का संकेत है। एक ऐसी पार्टी जो कभी भ्रष्टाचार के खिलाफ आंदोलन से उभरी थी, आज उसके अपने co-founders और वरिष्ठ नेता ही उस पर भ्रष्टाचार और तानाशाही के आरोप लगा रहे हैं।
