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Salman Khan vs पड़ोसी विवाद: Bombay HC ने Ketan Kakkad को लगाई फटकार, पोस्ट हटाने को कहा
Panvel farmhouse को लेकर पुराना झगड़ा फिर सुर्खियों में, कोर्ट बोला—सोशल मीडिया पर बदनाम करने का अधिकार नहीं
Bollywood superstar Salman Khan और उनके Panvel farmhouse के पड़ोसी Ketan Kakkad के बीच चल रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में आ गया है। इस मामले में Bombay High Court ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल किसी को बदनाम करने के लिए नहीं किया जा सकता।
गुरुवार को सुनवाई के दौरान Justice Sharmila Deshmukh की बेंच ने Ketan Kakkad से सवाल किया कि अगर कोई शिकायत है तो उसे संबंधित अधिकारियों के पास ले जाना चाहिए, न कि सोशल मीडिया पर पोस्ट करके विवाद खड़ा करना चाहिए। कोर्ट ने Ketan को Salman Khan के खिलाफ किए गए पोस्ट हटाने पर भी विचार करने को कहा।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर यह कंटेंट किसी तीसरे पक्ष द्वारा अपलोड किया गया है, तो संबंधित platforms को भी इसे हटाने के लिए कदम उठाने होंगे। इस मामले की अगली सुनवाई 6 जुलाई को तय की गई है।
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद सालों पुराना है और Panvel स्थित farmhouse की जमीन को लेकर शुरू हुआ था। साल 2022 में Salman Khan ने Ketan Kakkad के खिलाफ defamation suit दायर किया था। आरोप था कि Ketan ने सोशल मीडिया और YouTube वीडियो के जरिए अभिनेता के खिलाफ आपत्तिजनक और भड़काऊ बयान दिए।
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Salman Khan की ओर से कोर्ट में कहा गया कि Ketan के आरोप न केवल झूठे और बेबुनियाद हैं, बल्कि वे communal sentiments भड़काने वाले भी हैं। वहीं, Ketan का दावा था कि अभिनेता ने environmental norms का उल्लंघन किया और उनके property access को बाधित किया, लेकिन संबंधित अधिकारियों ने कोई कार्रवाई नहीं की।
विवादित आरोप और जवाब
कोर्ट में Salman Khan के वकील ने बताया था कि Ketan ने अभिनेता पर कई गंभीर आरोप लगाए थे, जिनमें D Gang से संबंध, धार्मिक पहचान पर टिप्पणी, और अन्य सनसनीखेज दावे शामिल थे।

इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए Salman Khan ने कहा था कि बिना किसी सबूत के इस तरह के आरोप लगाना पूरी तरह गलत है। उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार में अलग-अलग धर्मों के लोग हैं और वे सभी त्योहार मिलकर मनाते हैं, इसलिए इस तरह के धार्मिक आरोपों का कोई आधार नहीं है।
कोर्ट की सख्त टिप्पणी
Bombay High Court ने अपने ताजा रुख में साफ कर दिया है कि सोशल मीडिया की आजादी का मतलब यह नहीं है कि कोई भी व्यक्ति किसी के खिलाफ defamatory content पोस्ट करे, चाहे वह आम नागरिक हो या कोई celebrity।
यह मामला एक बार फिर यह दिखाता है कि सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणियां किस तरह कानूनी विवाद का रूप ले सकती हैं और इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
