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Bombay High Court से वापस ली गई Tata Trusts के खिलाफ याचिका, अब 16 मई की अहम बैठक का रास्ता साफ

Sir Ratan Tata Trust के लाइफ ट्रस्टी ढांचे को चुनौती देने वाली याचिका वापस, कोर्ट ने याचिकाकर्ता की निष्पक्षता पर उठाए सवाल।

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Bombay High Court: Tata Trusts के खिलाफ दायर याचिका वापस, 16 मई की बैठक अब तय समय पर
Bombay High Court में Tata Trusts से जुड़ी याचिका वापस लेने के बाद 16 मई की अहम बैठक का रास्ता साफ।

मुंबई से जुड़ी एक बड़ी कॉरपोरेट और कानूनी खबर में, Bombay High Court में दायर वह याचिका वापस ले ली गई है जिसमें Sir Ratan Tata Trust के ‘लाइफ ट्रस्टी’ ढांचे को चुनौती दी गई थी।

इस फैसले के बाद अब Tata Trusts की 16 मई को होने वाली महत्वपूर्ण बैठक का रास्ता साफ हो गया है। माना जा रहा है कि इस बैठक में Tata Sons के बोर्ड में ट्रस्ट के प्रतिनिधियों को लेकर अहम बदलाव किए जा सकते हैं।

सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट की बेंच ने याचिकाकर्ता के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि मामले में पूरी पारदर्शिता नहीं बरती गई। अदालत ने यह भी नोट किया कि याचिका दायर करने वाला व्यक्ति मूल शिकायतकर्ता नहीं था, जबकि इस बात का उल्लेख याचिका में साफ तौर पर नहीं किया गया था।

कोर्ट की टिप्पणी के बाद याचिकाकर्ता के वकील ने याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

दरअसल, यह मामला महाराष्ट्र पब्लिक ट्रस्ट (द्वितीय संशोधन) अधिनियम 2025 से जुड़ा था। याचिका में दावा किया गया था कि Sir Ratan Tata Trust के छह ट्रस्टियों में से तीन को आजीवन ट्रस्टी का दर्जा दिया गया है, जो नए कानून में तय सीमा का उल्लंघन माना जा सकता है।

याचिका में यह भी कहा गया था कि यदि ट्रस्ट की संरचना कानून के खिलाफ पाई जाती है, तो 16 मई को होने वाली बैठक में लिए गए फैसलों की वैधता पर सवाल उठ सकते हैं।

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हालांकि अब कानूनी चुनौती हटने के बाद Tata Trusts बिना किसी तत्काल अड़चन के अपनी बैठक आयोजित कर सकेगा। कॉरपोरेट जगत में इस बैठक को काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि इससे Tata समूह की भविष्य की रणनीति और बोर्ड स्तर पर प्रतिनिधित्व को लेकर नई दिशा तय हो सकती है।

Bombay High Court: Tata Trusts के खिलाफ दायर याचिका वापस, 16 मई की बैठक अब तय समय पर


विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के सबसे प्रभावशाली बिजनेस समूहों में शामिल Tata Group से जुड़े मामलों पर निवेशकों और उद्योग जगत की हमेशा करीबी नजर रहती है। ऐसे में यह कानूनी विवाद खत्म होना समूह के लिए राहत की खबर माना जा रहा है।