Politics
‘Mamata Banerji धृतराष्ट्र बन चुकी हैं’: बागी सांसद Satabdi Roy’s के बयान से TMC में मचा सियासी भूचाल
टीएमसी सांसद सताब्दी रॉय ने पार्टी नेतृत्व पर साधा बड़ा निशाना, बोलीं— “हमारी आवाज़ नहीं सुनी गई, अब NDA का समर्थन करेंगे”
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर बड़ा सियासी तूफान उठता दिखाई दे रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की वरिष्ठ सांसद और अभिनेत्री से नेता बनीं सताब्दी रॉय ने पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें “धृतराष्ट्र” तक कह दिया। उनके इस बयान ने बंगाल की राजनीति में हलचल तेज कर दी है।
सताब्दी रॉय, जो अब बागी गुट की उपनेता बनाई गई हैं, ने खुलकर कहा कि पार्टी नेतृत्व अब कार्यकर्ताओं और सांसदों की बात सुनने को तैयार नहीं है। उन्होंने दावा किया कि कई नेताओं ने चुनाव परिणामों के बाद ममता बनर्जी से मुलाकात कर पार्टी की स्थिति और असंतोष पर चर्चा करनी चाही, लेकिन उन्हें नजरअंदाज कर दिया गया।
एक मीडिया बातचीत में सताब्दी रॉय ने कहा,
“हम सबने मिलकर अपनी बात रखने की कोशिश की, लेकिन दीदी जनादेश स्वीकार करने को तैयार नहीं थीं। तभी मुझे समझ आ गया कि अब पार्टी में हमारी कोई अहमियत नहीं बची है।”
उन्होंने आगे कहा कि वे 2009 से ममता बनर्जी के साथ जुड़ी हुई थीं, जब टीएमसी सत्ता में भी नहीं थी। लेकिन अब पार्टी का माहौल पूरी तरह बदल चुका है।
सताब्दी रॉय ने दावा किया कि पार्टी के भीतर असंतोष सिर्फ कुछ नेताओं तक सीमित नहीं है, बल्कि कई सांसद और विधायक नाराज़ हैं। उन्होंने कहा,
“सभी सांसदों को शिकायतें हैं। हम सब एक जैसी बातें कह रहे हैं, लेकिन अब हम इस स्थिति में आगे नहीं बढ़ना चाहते।”
इतना ही नहीं, उन्होंने यह भी संकेत दिए कि आने वाले समय में और सांसद पार्टी छोड़ सकते हैं। उन्होंने पूर्व टीएमसी नेता सुष्मिता देव का उदाहरण देते हुए कहा कि “अब पार्टी में भविष्य नजर नहीं आता।”
और भी पढ़ें : TMC में बगावत पर Kalyan Banerjee का पलटवार, बोले- ‘जो जाना चाहते हैं जाएं, BJP भी नहीं अपनाएगी’
बागी खेमे के मुताबिक, पार्टी में फैसले कुछ चुनिंदा लोगों तक सीमित हो गए हैं और कई वरिष्ठ नेताओं को नेतृत्व तक पहुंचने का मौका भी नहीं मिलता। सूत्रों का दावा है कि मंत्रियों और नेताओं के बीच संवाद की कमी लगातार बढ़ती जा रही है।

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बंगाल में आगामी चुनावों से पहले टीएमसी के भीतर बढ़ती नाराज़गी पार्टी के लिए चिंता का विषय बन सकती है। खासकर तब, जब पार्टी के पुराने और भरोसेमंद चेहरे खुलकर नेतृत्व पर सवाल उठाने लगे हों।
इस बीच, सताब्दी रॉय और काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाला बागी गुट NDA को समर्थन देने की बात भी कह चुका है। इससे बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनने की अटकलें तेज हो गई हैं।
अब सबकी नजर ममता बनर्जी और टीएमसी नेतृत्व की अगली रणनीति पर टिकी हुई है। क्या पार्टी इस संकट को संभाल पाएगी या फिर बंगाल की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा, यह आने वाला वक्त तय करेगा।
