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माँ बीमार थी, हम फिर भी शिकायत करते थे Triptii Dimri की आँखें भर आईं जब माँ ने सुनाई अपनी तकलीफें
Netflix film Maa Behen के trailer launch पर Triptii Dimri ने वो बात कही जो शायद हम सब महसूस करते हैं लेकिन कभी ज़ोर से नहीं कहते — हम माँ को इंसान कम, भूमिका ज़्यादा समझते हैं।
कुछ सच ऐसे होते हैं जो सुनकर अंदर तक हिला देते हैं — क्योंकि वो सिर्फ किसी और की कहानी नहीं होती, वो हमारी अपनी कहानी होती है। Mumbai में Netflix की film Maa Behen के trailer launch पर Triptii Dimri ने कुछ ऐसा ही कहा — और शायद उस कमरे में कम ही लोग रहे होंगे जिन्हें वो बात चुभी नहीं।
“माँ को हमने एक bracket में बंद कर दिया”
Triptii ने कहा कि जब बात औरतों की आती है — खासकर माँ की — तो हम उन्हें judge करते हैं, एक role में बाँध देते हैं। उनके शब्द थे — “हम माँ को एक bracket में डाल देते हैं — कि यह उसकी ज़िम्मेदारी है, यह उसका काम है। चाहे films हों या असल ज़िंदगी।”
यह एक लाइन में उन्होंने वो बात कह दी जो समाज दशकों से सोचता आया है — माँ सेवा करती है, यह उसका “स्वभाव” है। लेकिन उसके भी दर्द हैं, उसकी भी थकान है — यह हम कम ही सोचते हैं।
जब माँ बीमार पड़ी — और हमने फिर भी शिकायत की
Triptii ने अपनी ज़िंदगी का एक वो लम्हा साझा किया जो बहुत से घरों की सच्चाई है। उन्होंने बताया कि जब उनकी माँ बीमार पड़ी और रोज़ के काम — खाना बनाना, घर सँभालना — नहीं कर पाईं, तो घर में शिकायतें होने लगीं।
“हमने कभी उनके human side को नहीं देखा,” Triptii ने कहा।
और फिर उन्होंने वो बात बताई जो सबसे ज़्यादा असर करती है — जब बड़े होकर माँ से बात हुई, जब उन्होंने अपनी तकलीफें बताईं — तो आँखें भर आईं। इसलिए नहीं कि माँ ने रोया — बल्कि इसलिए कि तब एहसास हुआ कि हमने उन्हें इंसान की तरह कभी नहीं देखा था।
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“यह सिर्फ मेरी माँ की कहानी नहीं — हर औरत की है”
Triptii ने यह भी कहा कि यह सिर्फ माँ तक सीमित नहीं है — हर औरत को इसी तरह judge किया जाता है, bracket में रखा जाता है।

और यही वजह है कि उन्होंने Maa Behen को अपने करियर की सबसे special films में से एक बताया — क्योंकि वो इस script से personally connect कर पाईं।
जब कोई actor किरदार नहीं निभाता, बल्कि उसे जीता है — तो वो screen पर अलग ही दिखता है। Triptii के साथ शायद यही होने वाला है।
एक सवाल जो घर जाकर पूछना चाहिए
Triptii की यह बात सुनकर मन में एक ख्याल आता है — हम सबने कभी न कभी अपनी माँ से शिकायत की होगी। खाने में नमक कम था, कपड़े समय पर नहीं धुले, कुछ और नहीं बना।
लेकिन क्या हमने कभी पूछा — “माँ, तुम कैसी हो?”
