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Benjamin Netanyahu से फोन कॉल के बाद Donald Trump बदले, लेबनान सीजफायर पर पलटा अमेरिका

सीजफायर समझौते में शामिल था लेबनान, लेकिन रुख बदलते ही इज़राइल ने किए 100 से ज्यादा हमले

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Trump-Netanyahu Call: लेबनान सीजफायर पर बदला अमेरिकी रुख, बढ़ा तनाव
सीजफायर पर बयान के बाद ट्रंप और नेतन्याहू की बातचीत से बदले हालात

पश्चिम एशिया में तनाव एक बार फिर गहरा गया है। अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति Donald Trump द्वारा घोषित सीजफायर समझौते को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इज़राइल के प्रधानमंत्री Benjamin Netanyahu से फोन पर बातचीत के बाद ट्रंप ने अपने रुख में बदलाव कर लिया।

शुरुआत में अमेरिका और ईरान के बीच जिस युद्धविराम समझौते की बात सामने आई थी, उसमें पूरे पश्चिम एशिया क्षेत्र को शामिल किया गया था, जिसमें लेबनान भी शामिल था। इस समझौते में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Shehbaz Sharif ने मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। व्हाइट हाउस ने भी संकेत दिए थे कि इज़राइल इस समझौते से सहमत है।

लेकिन हालात अचानक बदल गए। ट्रंप और नेतन्याहू के बीच बातचीत के बाद अमेरिका का रुख बदल गया और लेबनान को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं रही। इस बदलाव के तुरंत बाद इज़राइल ने लेबनान में बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई शुरू कर दी।

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रिपोर्ट्स के अनुसार, इज़राइल ने 100 से ज्यादा हवाई हमले किए, जिनमें कम से कम 250 लोगों की मौत हो गई। इस घटनाक्रम ने पूरे क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।

Trump-Netanyahu Call: लेबनान सीजफायर पर बदला अमेरिकी रुख, बढ़ा तनाव


अमेरिका के उपराष्ट्रपति JD Vance ने इस पूरे मामले को “गलतफहमी” करार दिया। हालांकि, ईरान ने इस पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है।

ईरान के विदेश मंत्री Abbas Araghchi ने साफ कहा कि अमेरिका को तय करना होगा कि वह शांति चाहता है या फिर इज़राइल के जरिए युद्ध जारी रखना चाहता है। वहीं, ईरान के उप विदेश मंत्री Saeed Khatibzadeh ने भी अमेरिका की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि एक तरफ सीजफायर की बात करना और दूसरी तरफ अपने सहयोगी को हमले की छूट देना पूरी तरह विरोधाभासी है।

यह घटनाक्रम अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में भरोसे के संकट को भी उजागर करता है। जहां एक तरफ शांति की बात होती है, वहीं दूसरी तरफ जमीनी स्तर पर हिंसा जारी रहती है।

अब सवाल यह है कि क्या पश्चिम एशिया में शांति की कोई ठोस पहल हो पाएगी या यह क्षेत्र फिर से बड़े संघर्ष की ओर बढ़ रहा है।

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