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जिस यूक्रेन को अमेरिका ने अकेला छोड़ा, अब उसी से माँग रहा है मदद ईरानी ड्रोन से बचाओ हमें!
ज़ेलेंस्की ने खुलासा किया कि अमेरिका समेत कई मध्य-पूर्व देशों ने यूक्रेन से ईरानी शाहेद ड्रोन मार गिराने की विशेषज्ञता माँगी है — लेकिन यूक्रेन की भी अपनी शर्तें हैं।
कीव/वाशिंगटन — कुछ महीने पहले तक डोनाल्ड ट्रम्प यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की को “तानाशाह” और “पी.टी. बार्नम” जैसे शब्दों से नवाज़ रहे थे। व्हाइट हाउस की बैठक में ट्रम्प ने ज़ेलेंस्की के कपड़ों पर तंज कसा था। लेकिन आज हालात बदल गए हैं — वही अमेरिका अब यूक्रेन के दरवाज़े पर दस्तक दे रहा है और मदद माँग रहा है।
क्या है पूरा मामला?
अमेरिका ने यूक्रेन से मध्य-पूर्व में ईरानी शाहेद ड्रोन से बचाव में मदद करने का अनुरोध किया है। ज़लेंस्की ने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन्हें “मध्य-पूर्व क्षेत्र में शाहेद ड्रोन से सुरक्षा के लिए अमेरिका की तरफ से विशेष मदद का अनुरोध मिला है” और उन्होंने अपने अधिकारियों को ज़रूरी साजो-सामान और यूक्रेनी विशेषज्ञ मुहैया कराने के निर्देश दे दिए हैं।
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यूक्रेन को शाहेद ड्रोन का इतना अनुभव क्यों?
रूस ने यूक्रेन पर अपने हमले की शुरुआत से ही हज़ारों की तादाद में शाहेद ड्रोन दागे हैं — एक रात में 800 से ज़्यादा ड्रोन और डिकॉय छोड़ने का रिकॉर्ड भी बना चुका है। चार साल की इस जंग में यूक्रेन ने इन ड्रोन को मार गिराने की ऐसी तकनीक और रणनीति विकसित की है जो दुनिया में किसी और के पास नहीं है। यूक्रेन ने सिर्फ 1,000 डॉलर की लागत में बनने वाले ड्रोन-किलर तैयार किए हैं जो हवा में ही दुश्मन के ड्रोन को नष्ट कर देते हैं। इसलिए आज पूरी दुनिया की नज़र कीव पर है।
मध्य-पूर्व में ईरान का ड्रोन तांडव
कुछ ही दिनों में ईरान ने 800 से अधिक मिसाइलें और 1,400 से ज़्यादा ड्रोन दाग दिए हैं, जिससे समुद्री रास्ते बाधित हो गए हैं और तेल-गैस की कीमतें अस्थिर हो गई हैं। अमरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों के बाद ईरान ने यही शाहेद ड्रोन खाड़ी देशों पर भी बरसाने शुरू कर दिए, और CNN की रिपोर्ट के अनुसार अमेरिकी वायु रक्षा इन ईरानी ड्रोन को रोकने में पूरी तरह सक्षम नहीं है।
ज़ेलेंस्की की चालाक कूटनीति*
यूक्रेन मदद करेगा — लेकिन मुफ्त में नहीं। ज़ेलेंस्की ने साफ कहा कि यूक्रेनी सहायता तभी दी जाएगी जब इससे खुद यूक्रेन की रक्षा क्षमता कमज़ोर न हो, और जब यह कूटनीतिक रूप से रूस के खिलाफ यूक्रेन के लिए दबाव बनाने में काम आए। सीधे शब्दों में — “हम उनकी मदद करते हैं जो हमारी मदद करते हैं।”
ज़ेलेंस्की ने खाड़ी देशों के सामने एक डील भी रखी है — वे अपने पैट्रियट एयर डिफेंस मिसाइलें यूक्रेन को दें और बदले में यूक्रेन उन्हें अपने ड्रोन-इंटरसेप्टर सिस्टम देगा। यूएई, कतर, बहरीन, जॉर्डन और कुवैत के नेताओं से ज़ेलेंस्की पहले ही इस बारे में बात कर चुके हैं।

ट्रम्प की दोहरी चाल
एक तरफ ट्रम्प ने रॉयटर्स से कहा कि वे “किसी भी देश से कोई भी मदद लेंगे।” दूसरी तरफ उसी दिन Politico से बातचीत में उन्होंने ज़ेलेंस्की पर निशाना साधते हुए कहा कि “उन्हें काम पर लगना होगा और डील करनी होगी।” ट्रम्प ने यह भी दोहराया कि पुतिन “डील के लिए तैयार हैं” — जबकि ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयान करती है।
रूस-यूक्रेन शांति वार्ता भी लटकी
ईरान संकट के कारण इस हफ्ते होने वाली रूस-यूक्रेन-अमेरिका की त्रिपक्षीय वार्ता भी टल गई है। ज़लेंस्की ने कहा कि “ईरान की स्थिति के चलते अभी इस बैठक के लिए ज़रूरी संकेत नहीं मिले हैं।” यानी यूक्रेन की जंग एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं की भीड़ में पिछड़ती नज़र आ रही है।
यह पूरा घटनाक्रम एक बड़ी सच्चाई उजागर करता है — आज की दुनिया में दोस्त और दुश्मन की परिभाषाएं तेज़ी से बदल रही हैं। जो कल तक बोझ लग रहा था, वही आज ज़रूरत बन गया है।
