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मिडिल ईस्ट युद्ध का असर अब आपकी रसोई तक! पेट्रोल-डीजल महंगा होते ही बढ़ी खाने और सफर की लागत
तेल की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी से आम आदमी की जेब पर बढ़ा बोझ, सब्जियों से लेकर रोज़ के सफर तक सब हुआ महंगा
मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और युद्ध का असर अब सीधे आम लोगों की जिंदगी पर दिखाई देने लगा है। पहले जहां इसका असर सिर्फ अंतरराष्ट्रीय राजनीति और तेल बाजार तक सीमित माना जा रहा था, वहीं अब भारत में भी इसकी मार रसोई और रोज़मर्रा के खर्चों पर साफ नजर आने लगी है।
पिछले कुछ दिनों में पेट्रोल, डीजल और CNG की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर सिर्फ गाड़ियों के ईंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि खाने-पीने की चीजों और दैनिक जरूरतों पर भी पड़ रहा है।
लगातार बढ़े पेट्रोल-डीजल के दाम
15 मई के बाद से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में चार बार बढ़ोतरी हो चुकी है। दिल्ली में पेट्रोल का दाम 94.77 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 102.12 रुपये प्रति लीटर पहुंच गया। वहीं डीजल 87.67 रुपये से बढ़कर 95.2 रुपये प्रति लीटर हो गया है।
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यानी दोनों ईंधनों की कीमतों में औसतन करीब 7.5 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा CNG की कीमतों में भी लगभग 4 रुपये प्रति किलो का इजाफा देखा गया।
रसोई का बजट बिगड़ना शुरू
ईंधन महंगा होने का सबसे बड़ा असर ट्रांसपोर्ट लागत पर पड़ता है। ट्रकों और मालवाहक वाहनों का खर्च बढ़ते ही सब्जियां, फल, दूध और राशन जैसी चीजें भी महंगी होने लगती हैं।
कई शहरों में पहले से ही टमाटर, प्याज और हरी सब्जियों की कीमतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है। व्यापारियों का कहना है कि अगर तेल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं तो आने वाले दिनों में खाने-पीने की चीजें और महंगी हो सकती हैं।
दिल्ली के एक किराना दुकानदार ने बताया कि ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ने के कारण थोक बाजार से आने वाला सामान अब पहले से ज्यादा कीमत में मिल रहा है। इसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ रहा है।
रोज़ ऑफिस जाने वालों की मुश्किलें बढ़ीं
महंगे ईंधन का असर सबसे ज्यादा उन लोगों पर पड़ रहा है जो रोज़ाना लंबी दूरी तय करके ऑफिस जाते हैं। बाइक, कार और ऑटो का खर्च बढ़ने से महीने का बजट बिगड़ने लगा है।
कई कैब सेवाओं और ऑटो चालकों ने भी किराए में बढ़ोतरी कर दी है। वहीं CNG महंगी होने से सार्वजनिक परिवहन का खर्च भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।

नोएडा में काम करने वाले एक कर्मचारी ने बताया कि पहले जहां उसका महीने का पेट्रोल खर्च करीब 4 हजार रुपये था, अब वह 6 हजार रुपये के आसपास पहुंच गया है। ऐसे में बचत करना मुश्किल होता जा रहा है।
महंगाई बढ़ने की चिंता
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें और बढ़ीं, तो आने वाले समय में महंगाई का दबाव और ज्यादा बढ़ सकता है।
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है। ऐसे में मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ने का सीधा असर भारतीय बाजार पर पड़ता है। तेल महंगा होने से परिवहन, उत्पादन और सप्लाई चेन का खर्च बढ़ जाता है, जिसका असर अंततः आम जनता की जेब पर पड़ता है।
आम आदमी की चिंता बढ़ी
घर चलाने वाले मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोगों के लिए यह बढ़ती महंगाई नई चिंता बनती जा रही है। लोगों का कहना है कि वेतन उतना नहीं बढ़ रहा जितनी तेजी से रोजमर्रा की चीजों की कीमतें बढ़ रही हैं।
सोशल मीडिया पर भी लोग पेट्रोल-डीजल की कीमतों को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं। कई यूज़र्स ने लिखा कि अब सिर्फ कार चलाना ही नहीं, बल्कि घर का खाना बनाना भी महंगा पड़ने लगा है।
