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होर्मुज में ‘डार्क पैसेज’ का खेल! 70 जहाजों को अमेरिकी मदद से कराया गया गुप्त पार, बढ़ा समुद्री तनाव

ईरान-अमेरिका तनाव के बीच होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों ने पहचान छिपाने की रणनीति अपनाई, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा।

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होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरते व्यापारिक जहाजों ने सुरक्षा कारणों से ‘डार्क पैसेज’ रणनीति अपनाई, जबकि अमेरिकी बलों ने कई जहाजों को मार्गदर्शन प्रदान किया।

मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक तनाव का असर अब वैश्विक समुद्री व्यापार पर भी साफ दिखाई देने लगा है। Strait of Hormuz यानी होर्मुज जलडमरूमध्य, जो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है, इन दिनों अंतरराष्ट्रीय चिंता का केंद्र बना हुआ है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले कुछ हफ्तों में दर्जनों व्यापारिक जहाजों को इस संवेदनशील समुद्री मार्ग से सुरक्षित निकालने के लिए अमेरिकी सैन्य बलों की मदद लेनी पड़ी। बताया जा रहा है कि कम से कम 70 जहाजों ने विशेष सुरक्षा व्यवस्था के तहत इस रास्ते को पार किया।

क्या है ‘डार्क पैसेज’?

समुद्री दुनिया में Dark Passage उस स्थिति को कहा जाता है जब कोई जहाज अपनी पहचान और लोकेशन बताने वाले ट्रांसपोंडर या ट्रैकिंग सिस्टम को अस्थायी रूप से बंद कर देता है।

सामान्य परिस्थितियों में जहाज लगातार अपनी स्थिति प्रसारित करते रहते हैं ताकि अन्य जहाजों और समुद्री एजेंसियों को उनकी जानकारी मिलती रहे। लेकिन संघर्ष या सुरक्षा खतरे वाले इलाकों में कभी-कभी जहाज अपनी मौजूदगी छिपाने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल करते हैं।

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रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अधिकांश जहाजों ने इसी रणनीति को अपनाया ताकि उनकी गतिविधियों का आसानी से पता न लगाया जा सके।

क्यों बढ़ी सुरक्षा की जरूरत?

विश्लेषकों का मानना है कि क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंताओं के कारण कई जहाज संचालक अतिरिक्त सावधानी बरत रहे हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से का कच्चा तेल और गैस इसी मार्ग से होकर गुजरता है। ऐसे में यदि इस क्षेत्र में कोई बड़ा व्यवधान आता है, तो उसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजारों और तेल कीमतों पर पड़ सकता है।

यही वजह है कि कई देशों की नौसेनाएं और सुरक्षा एजेंसियां इस समुद्री मार्ग पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।

अमेरिकी सेना की भूमिका पर चर्चा

रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सैन्य बलों ने कई जहाजों को मार्गदर्शन और सुरक्षा सहायता प्रदान की। हालांकि सुरक्षा कारणों से यह जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई कि जहाजों ने कौन-सा सटीक रास्ता अपनाया।

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सूत्रों के मुताबिक, कुछ मार्ग ऐसे चुने गए जो संवेदनशील तटीय क्षेत्रों से दूरी बनाए रखते थे। इसका उद्देश्य जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और संभावित जोखिमों को कम करना था।

वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है असर

विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज क्षेत्र में तनाव लंबे समय तक बना रहता है, तो समुद्री बीमा लागत बढ़ सकती है और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक कंपनियों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ सकता है।

इसके अलावा, ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव भी देखने को मिल सकता है। यही कारण है कि दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाएं इस क्षेत्र की स्थिति पर करीबी नजर रखे हुए हैं।

आगे क्या?

फिलहाल अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है, लेकिन अभी तक किसी बड़े समाधान के संकेत नहीं मिले हैं। ऐसे में समुद्री सुरक्षा और व्यापारिक जहाजों की आवाजाही आने वाले दिनों में भी वैश्विक चर्चा का विषय बनी रह सकती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक क्षेत्रीय तनाव पूरी तरह कम नहीं होता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक समुद्री मार्गों में से एक बना रहेगा।

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