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Trump, JD Vance ने ईरान डील को अमेरिकी किसानों के लिए “फायदे का सौदा” बताया, तेहरान ने किया इनकार

ईरान से जुड़ा प्रस्तावित समझौता अमेरिकी किसानों के लिए “बड़ा फायदा” बताया गया, लेकिन तेहरान ने दावों को सिरे से खारिज किया

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अमेरिका-ईरान समझौते पर चर्चा के बीच व्हाइट हाउस में कूटनीतिक बातचीत का दृश्य

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच एक नया विवाद सामने आया है, जिसमें प्रस्तावित शांति समझौते को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump और उपराष्ट्रपति JD Vance का कहना है कि इस डील से अमेरिकी किसानों को बड़ा आर्थिक लाभ मिल सकता है।

दोनों नेताओं के अनुसार, ईरान के बाहर फ्रीज़ की गई संपत्तियों और फंड्स का उपयोग अमेरिकी कृषि उत्पादों—जैसे गेहूं, मक्का और सोयाबीन—की खरीद में किया जा सकता है। ट्रंप प्रशासन का दावा है कि यह कदम न केवल अमेरिका के किसानों को फायदा देगा, बल्कि वैश्विक व्यापार संतुलन को भी प्रभावित करेगा।

हालांकि, ईरान ने इन दावों को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। तेहरान का कहना है कि किसी भी तरह की संपत्ति को इस तरह के उपयोग में शामिल करने की बात “राजनीतिक प्रचार” से ज्यादा कुछ नहीं है।

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रिपोर्ट्स के मुताबिक, प्रस्तावित समझौते में यह भी शामिल है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ को दोबारा खोला जाएगा, जिससे वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति को राहत मिलेगी। यह वही समुद्री मार्ग है जिससे दुनिया के लगभग 20% तेल और गैस का परिवहन होता है।

साथ ही, 60 दिनों के भीतर ईरान को अपने तेल की बिक्री फिर से शुरू करने की अनुमति देने का भी प्रस्ताव है, जबकि दोनों देश इस दौरान प्रमुख मुद्दों पर बातचीत जारी रखेंगे। इसी समझौते में ईरानी संपत्तियों को आंशिक रूप से अनफ्रीज करने की बात भी शामिल है।

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लेकिन यह डील विवादों से घिरी हुई है। आलोचकों का कहना है कि यह समझौता उन मूल कारणों को संबोधित नहीं करता जिनकी वजह से अमेरिका ने ईरान के साथ टकराव बढ़ाया था। इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय मिलिशिया समूहों जैसे हिज़बुल्लाह और हमास को समर्थन देने जैसे मुद्दे शामिल हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता अगर आगे बढ़ता है, तो यह सिर्फ एक कूटनीतिक समझौता नहीं बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार और अमेरिकी घरेलू राजनीति दोनों को प्रभावित करने वाला बड़ा कदम साबित हो सकता है।