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गल्फ में बसे भारतीय अब प्रॉपर्टी से बना रहे दूरी? NRI निवेशकों का झुकाव तेजी से शेयर बाजार की ओर
नई रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि GCC देशों में रहने वाले भारतीय NRIs अब रियल एस्टेट की बजाय भारतीय इक्विटी और म्यूचुअल फंड में ज्यादा निवेश कर रहे हैं।
कभी दुबई, कतर और सऊदी अरब जैसे देशों में काम करने वाले भारतीयों के लिए भारत में जमीन या फ्लैट खरीदना सबसे बड़ा सपना माना जाता था। परिवार के लिए घर, भविष्य की सुरक्षा और समाज में प्रतिष्ठा — सब कुछ रियल एस्टेट से जुड़ा हुआ था। लेकिन अब तस्वीर तेजी से बदलती दिखाई दे रही है।
एक नई वेल्थ रिपोर्ट के अनुसार, खाड़ी देशों यानी GCC में रहने वाले भारतीय NRIs का निवेश पैटर्न बदल रहा है। अब वे भारत में प्रॉपर्टी खरीदने की बजाय शेयर बाजार, इक्विटी और म्यूचुअल फंड जैसे वित्तीय निवेश विकल्पों को ज्यादा महत्व दे रहे हैं।
रिपोर्ट में करीब 8,300 निवेशकों की राय शामिल की गई। इसमें सामने आया कि लगभग 73% निवेशक भारतीय इक्विटी और म्यूचुअल फंड में अपनी हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं, जबकि करीब 40% लोग भारतीय रियल एस्टेट में निवेश कम कर रहे हैं।
आखिर क्यों बदल रहा है निवेश का तरीका?
विशेषज्ञों का कहना है कि आज के समय में निवेशक “लिक्विड एसेट” यानी तुरंत खरीदे-बेचे जा सकने वाले विकल्पों को ज्यादा सुरक्षित मान रहे हैं। शेयर और म्यूचुअल फंड को कभी भी ऑनलाइन मैनेज किया जा सकता है, जबकि प्रॉपर्टी में पैसा लंबे समय तक फंसा रहता है।
खासकर मध्य-पूर्व में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों ने NRIs की सोच पर असर डाला है। रिपोर्ट के मुताबिक 83% निवेशकों ने माना कि क्षेत्रीय तनाव और अंतरराष्ट्रीय घटनाएं अब उनके वित्तीय फैसलों को प्रभावित कर रही हैं।
हाल के वर्षों में पश्चिम एशिया में संघर्ष और अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे माहौल में निवेशक ऐसी संपत्ति चाहते हैं जिसे जरूरत पड़ने पर जल्दी से नकदी में बदला जा सके। यही वजह है कि अब “ईंट और सीमेंट” की जगह “डिजिटल पोर्टफोलियो” ज्यादा आकर्षक बनता जा रहा है।
भारतीय शेयर बाजार बना पसंदीदा विकल्प
जब निवेशकों से पूछा गया कि वे नया पैसा कहां लगाना चाहेंगे, तो 43% लोगों ने भारतीय इक्विटी को चुना। यह आंकड़ा बाकी सभी एसेट क्लास से ज्यादा रहा।
वेल्थ एडवाइजर्स का कहना है कि भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था, डिजिटल इकोनॉमी और मजबूत कॉर्पोरेट ग्रोथ ने NRIs का भरोसा बढ़ाया है। अब भारत सिर्फ “घर भेजने वाले पैसे” की जगह नहीं रहा, बल्कि लॉन्ग टर्म वेल्थ क्रिएशन का बड़ा केंद्र बन चुका है।
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खर्च कम, बचत ज्यादा
रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि GCC देशों में रहने वाले भारतीय परिवार अब ज्यादा सतर्क वित्तीय रणनीति अपना रहे हैं। करीब 35% लोगों ने अपनी बचत बढ़ाई है, जबकि 26% ने गैर-जरूरी खर्चों में कटौती की है।

दिलचस्प बात यह है कि सर्वे में शामिल 85% लोग पिछले 10 साल या उससे ज्यादा समय से खाड़ी देशों में रह रहे हैं। यानी यह बदलाव नए प्रवासियों का नहीं, बल्कि लंबे समय से विदेश में बसे भारतीयों की सोच में आए परिवर्तन का संकेत है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में NRI निवेश का फोकस और ज्यादा टेक्नोलॉजी आधारित तथा वित्तीय बाजारों की ओर जा सकता है। हालांकि, रियल एस्टेट पूरी तरह खत्म नहीं होगा, लेकिन अब वह पहले जैसा “पहला पसंदीदा निवेश” शायद नहीं रह गया है।

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