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जुलाई के बाद फिर शुरू होगी India Israel FTA पर बातचीत, इज़राइल में होगा अगला बड़ा दौर

West Asia में जारी संघर्ष के चलते टल चुकी India-Israel Free Trade Agreement की दूसरी बैठक अब जुलाई के बाद इज़राइल में होने की उम्मीद, मार्केट एक्सेस से लेकर टेक्नोलॉजी तक कई अहम मुद्दों पर होगी चर्चा।

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भारत और इज़राइल के बीच Free Trade Agreement पर बातचीत का दूसरा दौर जुलाई के बाद इज़राइल में होने की उम्मीद है।

भारत और इज़राइल के बीच बहुप्रतीक्षित Free Trade Agreement (FTA) को लेकर बातचीत का दौर एक बार फिर रफ्तार पकड़ने जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच इस व्यापक समझौते पर औपचारिक वार्ता का दूसरा दौर जुलाई महीने के बाद शुरू होने की संभावना है, और यह बैठक इस बार इज़राइल में आयोजित की जाएगी।

दरअसल, यह बैठक इससे पहले ही हो जानी थी, लेकिन West Asia में जारी संघर्ष के चलते इसका शेड्यूल बदलना पड़ा और अब यह उच्च-स्तरीय बैठक इस गर्मी के बाद के दौर में टल गई है। हालांकि, आमने-सामने की बैठकों में देरी के बावजूद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क लगातार बना हुआ है। वर्चुअल मीटिंग्स और तकनीकी स्तर की चर्चाओं के ज़रिए दोनों पक्षों ने इस मोमेंटम को बनाए रखा है।

इज़राइल में होने वाली बैठक में किन मुद्दों पर होगी बात?

जब दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल इज़राइल में मिलेंगे, तो बातचीत के इस दूसरे दौर में कुछ बेहद अहम क्षेत्रों और नियामक ढांचों पर गहराई से चर्चा होने की उम्मीद है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

  • मार्केट एक्सेस: आयात-निर्यात की प्रक्रियाओं को आसान बनाकर व्यापार की मात्रा को बढ़ाना।
  • सेवाएं और कस्टम्स: दोनों देशों के बीच प्रोफेशनल सेवाओं की आवाजाही को सुगम बनाना और कस्टम्स प्रक्रियाओं को सरल करना।
  • टेक्नोलॉजी और इनोवेशन: दोनों देशों की तकनीकी क्षमताओं का आपस में बेहतर उपयोग करना।
  • इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी (IP): द्विपक्षीय इनोवेशन को सुरक्षा देने के लिए एक मजबूत IP फ्रेमवर्क तैयार करना।

इस समझौते को लेकर पहले भी कई बार सकारात्मक संकेत मिल चुके हैं। पिछले साल नवंबर में Tel Aviv में Commerce and Industry Minister Piyush Goyal ने कहा था कि यह FTA सामान और सेवाओं दोनों में बड़े मार्केट एक्सेस, पूंजी के प्रवाह के दरवाजे खोलेगा, व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करेगा और दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों को स्पष्टता व स्थिरता प्रदान करेगा।

अब तक का सफर

इस ट्रेड पैक्ट की ज़मीन तैयार करने का काम पिछले साल के आखिर में ही तेज़ी से शुरू हो गया था, जब नवंबर 2025 में भारत और इज़राइल ने इस FTA के लिए आधिकारिक तौर पर Terms of Reference (ToR) पर हस्ताक्षर किए थे। इसके बाद इस साल फरवरी 2026 में New Delhi में बातचीत का पहला औपचारिक दौर सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था।

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व्यापार के आंकड़े क्या कहते हैं?

बात अगर दोनों देशों के बीच व्यापार के मौजूदा हालात की करें, तो आंकड़े कुछ अलग ही तस्वीर दिखाते हैं। वित्त वर्ष 2024-25 में Israel को भारत का निर्यात 52 प्रतिशत घटकर 2.14 अरब डॉलर पर आ गया, जो इससे पिछले साल 2023-24 में 4.52 अरब डॉलर था। इसी तरह, इज़राइल से भारत का आयात भी 26.2 प्रतिशत घटकर पिछले वित्त वर्ष में 1.48 अरब डॉलर रहा। इस दौरान दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 3.62 अरब डॉलर का रहा।

इन आंकड़ों में आई गिरावट के बावजूद एशिया में भारत, इज़राइल का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बना हुआ है।

किन चीज़ों का होता है आयात-निर्यात?

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दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में पारंपरिक रूप से हीरे (diamonds), पेट्रोलियम उत्पाद और रसायनों का दबदबा रहा है। हालांकि हाल के वर्षों में इलेक्ट्रॉनिक मशीनरी, हाई-टेक प्रोडक्ट्स, कम्युनिकेशन सिस्टम और मेडिकल इक्विपमेंट जैसे क्षेत्रों में भी बढ़ोतरी देखी गई है।

भारत से इज़राइल को होने वाले निर्यात में मुख्य रूप से मोती और कीमती पत्थर, ऑटोमोटिव डीज़ल, रासायनिक और मिनरल प्रोडक्ट्स, मशीनरी व इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट, प्लास्टिक, टेक्सटाइल, अपैरल, बेस मेटल्स, ट्रांसपोर्ट इक्विपमेंट और कृषि उत्पाद शामिल हैं। दूसरी ओर, इज़राइल से होने वाले आयात में मोती व कीमती पत्थर, रासायनिक-मिनरल और फर्टिलाइज़र प्रोडक्ट्स, मशीनरी व इलेक्ट्रिकल इक्विपमेंट और पेट्रोलियम ऑयल जैसी चीज़ें प्रमुख हैं।

ऐसे में माना जा रहा है कि अगर यह FTA सफलतापूर्वक पूरा होता है, तो यह न सिर्फ घटते व्यापार के आंकड़ों को पटरी पर ला सकता है, बल्कि टेक्नोलॉजी, इनोवेशन और सेवाओं के क्षेत्र में दोनों देशों के लिए नए मौके भी खोल सकता है। अब सबकी निगाहें जुलाई के बाद इज़राइल में होने वाली इस अहम बैठक पर टिकी हैं।

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