Economy
भारत से व्यापार आसान नहीं: US Trade Representative ने बताया ‘टफ नट टू क्रैक’, कृषि सेक्टर बना बड़ी चुनौती
भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर बातचीत जारी, 2030 तक $500 अरब व्यापार का लक्ष्य
भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ता एक अहम मोड़ पर पहुंच गई है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि Jamieson Greer ने भारत को “टफ नट टू क्रैक” बताते हुए कहा कि खासकर कृषि क्षेत्र में समझौता करना आसान नहीं है।
हाल ही में भारत की एक उच्चस्तरीय टीम ने वाशिंगटन में अमेरिकी अधिकारियों के साथ तीन दिन तक बातचीत की। भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वाणिज्य विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन कर रहे थे, जबकि अमेरिकी पक्ष की अगुवाई ब्रेंडन लिंच ने की।
Greer ने अमेरिकी कांग्रेस की एक समिति में कहा कि भारत लंबे समय से अपने कृषि बाजारों को सुरक्षित रखता आया है, और यही इस समझौते में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है। हालांकि उन्होंने यह भी संकेत दिया कि कुछ क्षेत्रों में दोनों देश सहमति बना सकते हैं।
बातचीत के दौरान डीडीजी (Distillers Dried Grains), सोयाबीन मील और एथेनॉल जैसे उत्पादों पर खास फोकस रहा। ये उत्पाद पशु आहार और ऊर्जा क्षेत्र में महत्वपूर्ण माने जाते हैं।
भारत और अमेरिका ने फरवरी की शुरुआत में इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते का फ्रेमवर्क तैयार किया था। इसके तहत दोनों देशों ने 2030 तक आपसी व्यापार को $500 अरब तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है।
इस डील के तहत अमेरिका ने भारत पर लगाए गए टैरिफ को 50% से घटाकर 18% तक लाने पर सहमति जताई है। वहीं भारत की कोशिश है कि उसे अमेरिकी बाजार में ज्यादा बेहतर और आसान पहुंच मिले।
हालांकि, इस बीच US Supreme Court के एक फैसले ने समीकरण बदल दिए हैं। कोर्ट ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए कुछ टैरिफ को खारिज कर दिया, जिससे अब नए सिरे से समझौते की शर्तों पर विचार किया जा रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील दोनों देशों के लिए बेहद अहम है, लेकिन इसे अंतिम रूप देने में समय लग सकता है। उदाहरण के तौर पर, भारत अपने किसानों और घरेलू उद्योगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है, जबकि अमेरिका अपने निर्यात को बढ़ाना चाहता है।
कुल मिलाकर, भारत-अमेरिका व्यापार समझौता एक संतुलन बनाने की कोशिश है, जहां दोनों देश अपने-अपने हितों को सुरक्षित रखते हुए आगे बढ़ना चाहते हैं।
