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Pakistan में आमने-सामने बैठेंगे Iran और US जानिए इस ऐतिहासिक बातचीत की 5 बड़ी बातें

छह हफ्तों की जंग के बाद Islamabad में शुरू होने जा रही है वो बातचीत जिस पर टिकी है पूरी दुनिया की नज़र — कौन आएगा, क्या होगा एजेंडा, और क्यों Pakistan बना मध्यस्थ?

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Iran-US Islamabad Talks: Pakistan की मध्यस्थता में शुरू होगी ऐतिहासिक बातचीत, जानें 5 ज़रूरी बातें | Dainik Diary
Pakistan की मध्यस्थता में Iran-US वार्ता, Islamabad में जमा हुई दुनिया की नज़रें।

छह हफ्ते से ज़्यादा हो चुके हैं। इस दौरान हज़ारों लोगों की जानें गई हैं, तेल के बाज़ार हिल गए हैं और एक पूरा समुद्री रास्ता बंद है। लेकिन अब, इतने खून और तबाही के बाद, Iran और United States आखिरकार एक मेज़ पर बैठने को तैयार हैं — और वो मेज़ लगी है Islamabad में।

यह कोई साधारण कूटनीतिक बैठक नहीं है। यह उस युद्ध की आग को बुझाने की कोशिश है जिसने पूरे मध्य-पूर्व को झुलसा दिया है।

दो हफ्तों की नाज़ुक शांति, और एक बड़ा मौका

फिलहाल दोनों देशों के बीच दो हफ्तों का युद्धविराम लागू है। इसी खिड़की का फायदा उठाते हुए Pakistan ने मध्यस्थता का हाथ बढ़ाया और दोनों पक्षों ने उसे स्वीकार किया। Pakistani Prime Minister Shehbaz Sharif के निमंत्रण पर यह बातचीत Islamabad में हो रही है — संभावित स्थल है मशहूर Serena Hotel।

कौन-कौन शामिल है इस बड़ी बैठक में?

America की तरफ से यह अब तक की सबसे वरिष्ठ टीम है जो Iran के साथ बातचीत करने पहुंची है। US Vice President JD Vance इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। उनके साथ हैं विशेष दूत Steve Witkoff और राष्ट्रपति के दामाद Jared Kushner। गौरतलब है कि 2015 में John Kerry ने जो nuclear deal की थी, उसके बाद यह America की Iran के साथ सबसे उच्च-स्तरीय कूटनीतिक भागीदारी है।

Iran की ओर से विदेश मंत्री Abbas Araghchi और संसदीय अध्यक्ष Mohammad Bagher Ghalibaf के साथ कई सुरक्षा और आर्थिक अधिकारी Islamabad पहुंच चुके हैं।

क्या है बातचीत का एजेंडा?

यह बातचीत सीधी नहीं, बल्कि अप्रत्यक्ष होगी — दोनों प्रतिनिधिमंडल अलग-अलग कमरों में बैठेंगे और Pakistani अधिकारी दोनों के बीच प्रस्ताव लेकर आते-जाते रहेंगे। बिल्कुल वैसे ही जैसे Oman में पहले की मध्यस्थता हुई थी।

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America ने Iran को एक 15-सूत्रीय प्रस्ताव भेजा है। इसमें मुख्य मांगें हैं — Iran अपना संवर्धित यूरेनियम का भंडार सौंपे और Strait of Hormuz को फिर से खोले।

Iran की 10-सूत्रीय जवाबी मांगों में शामिल हैं — इस जलडमरूमध्य पर नियंत्रण, गुज़रने वाले जहाज़ों पर शुल्क, क्षेत्रीय सैन्य अभियानों का अंत, और सभी प्रतिबंधों की समाप्ति।

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एक और पेचीदा मुद्दा है Lebanon का। Israel ने युद्धविराम के दौरान भी Lebanon में Hezbollah पर हमले जारी रखे हैं। Iran का कहना है कि जब तक Lebanon में भी ceasefire नहीं होता, वो बातचीत में शामिल नहीं होगा।

Pakistan क्यों बना मध्यस्थ? यह कोई इत्तेफ़ाक नहीं है

Pakistan की यह भूमिका बेहद सोची-समझी और स्वाभाविक भी है। Iran वो पहला देश था जिसने 1947 में Pakistan की आज़ादी को मान्यता दी थी। दोनों देशों के बीच 900 किलोमीटर की साझा सीमा है, और गहरे ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और धार्मिक रिश्ते हैं। Pakistan में 2 करोड़ से अधिक शिया मुसलमान रहते हैं — Iran के बाद दुनिया की सबसे बड़ी शिया आबादी।

दूसरी तरफ, Pakistan 2004 से America का Major Non-NATO Ally भी है। Pakistani Field Marshal Asim Munir ने हाल के दिनों में अमेरिकी और ईरानी नेताओं से कई दौर की बातचीत की है।

इसमें China की भी अहम भूमिका है। Pakistan के विदेश मंत्री Ishaq Dar ने मार्च के अंत में Beijing का दौरा कर इस मध्यस्थता के लिए समर्थन हासिल किया। Former US President Donald Trump ने भी माना कि China ने Iran को बातचीत की मेज़ पर लाने में मदद की।

Islamabad में युद्धस्तरीय तैयारी

Pakistan ने Islamabad में दो दिन की सार्वजनिक छुट्टी घोषित की है। पूरे शहर में भारी सुरक्षा बंदोबस्त है — सशस्त्र जवान तैनात हैं, ट्रैफिक डायवर्जन हैं, और प्रमुख इलाकों में पुलिस चेकपोस्ट लगाई गई हैं।

दुनिया की नज़रें इस वक्त Islamabad पर टिकी हैं। सवाल यह है — क्या यह बातचीत एक नई सुबह की शुरुआत होगी, या बस एक और नाकाम कोशिश?